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Yamuna Nagar News: हथिनी मोती की मौत का बरेली आईवीआरआई की रिपोर्ट खोलेगी राज
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हथिनी मोती की मौत क्यों और कैसे हुई इस राज का खुलासा बरेली के इज्जतनगर स्थित भारतीय पशुचिकित्सा अनुसंधान संस्थान (इंडियन वेटनरी रिसर्च इंस्टीट्यूट या आईवीआरआई) की रिपोर्ट के आने के बाद खुलेगा। करीब 10 से 15 दिन में पोस्टमार्टम की रिपोर्ट आ जाएगी। बरहाल रविवार को पांच डॉक्टरों के पैनल ने हथिनी मोती के शव को पोस्टमार्टम किया। यह प्रक्रिया दोपहर 12 से शाम चार बजे यानी चार घंटे तक चली। उसके बाद मोती के शव को लगभग 30 फीट गहरे गड्ढे में दफना दिया गया। भारी भरकम हथिनी मोती के शव को उठाने के लिए हाइड्रा मशीन को मंगवाया गया था। वहीं पोस्टमार्टम प्रक्रिया में डॉ. अशोक खासा, डॉ. सुखबीर नैन, डाॅ. अमित, डॉ. गोचलन और डॉ. प्रमोद शामिल रहे।
हालांकि हथिनी मोती 60 साल की थी, डॉक्टरों के पैनल ने उसके शव का पोस्टमार्टम किया। इस दौरान पैनल ने मौत के सही कारणों को जानने के लिए छह से सात सैंपल लिए जिन्हें आईवीआरआई लैब में भेजा जाएगा। अभी तक मोती की मौत को ऐज फैक्टर भी माना जा रहा है। लेकिन असली खुलासा रिपोर्ट से होगा। उल्लेखनीय है हथिनी मोती ने शनिवार को दम तोड़ दिया था। ऐसे में अब बनसंतौर स्थित चौधरी सुरेंद्र सिंह हाथी पुनर्वास केंद्र में चार चंचल, लिली, लक्ष्मी वन ओर लक्ष्मी टू हथिनियां रह गई हैं। साल 2019 में मोती को रेस्क्यू कर बनसंतौर में लाया गया था।
भारतीय पशुचिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) भारत का एक प्रमुख शोध संस्थान है जो पशुचिकित्सा शोध में अग्रणी भूमिका निभाकर देश के विकास में सतत रूप से प्रयासरत है। संस्थान देश एवं विदेश के छात्रों को गुणवत्तायुक्त स्नातकोत्तर शिक्षा प्रदान करता है। यह संस्थान पशुचिकित्सा एवं पशुविज्ञान, पशुधन उत्पादन प्रौद्योगिकी, बेसिक विज्ञान एवं प्रसार शिक्षा के 20 से अधिक विषयों में स्नातकोत्तर एवं पीएचडी की डिग्री प्रदान करता है।
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प्रोटोकॉल के तहत डॉक्टरों के पैनल द्वारा हथिनी मोती के शव का पोस्टमार्टम कराया गया। सैंपल लेकर बरेली आईवीआरआई लैब भेज दिया जाएगा। रिपोर्ट आने में 10 से 15 दिन लगते हैं। रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है। मोती की उम्र भी हो रही थी एक कारण ऐज फैक्टर भी हो सकता है।
-संदीप सैनी, डीएफओ, वाइल्ड लाइफ, पंचकूला।
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हालांकि हथिनी मोती 60 साल की थी, डॉक्टरों के पैनल ने उसके शव का पोस्टमार्टम किया। इस दौरान पैनल ने मौत के सही कारणों को जानने के लिए छह से सात सैंपल लिए जिन्हें आईवीआरआई लैब में भेजा जाएगा। अभी तक मोती की मौत को ऐज फैक्टर भी माना जा रहा है। लेकिन असली खुलासा रिपोर्ट से होगा। उल्लेखनीय है हथिनी मोती ने शनिवार को दम तोड़ दिया था। ऐसे में अब बनसंतौर स्थित चौधरी सुरेंद्र सिंह हाथी पुनर्वास केंद्र में चार चंचल, लिली, लक्ष्मी वन ओर लक्ष्मी टू हथिनियां रह गई हैं। साल 2019 में मोती को रेस्क्यू कर बनसंतौर में लाया गया था।
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भारतीय पशुचिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) भारत का एक प्रमुख शोध संस्थान है जो पशुचिकित्सा शोध में अग्रणी भूमिका निभाकर देश के विकास में सतत रूप से प्रयासरत है। संस्थान देश एवं विदेश के छात्रों को गुणवत्तायुक्त स्नातकोत्तर शिक्षा प्रदान करता है। यह संस्थान पशुचिकित्सा एवं पशुविज्ञान, पशुधन उत्पादन प्रौद्योगिकी, बेसिक विज्ञान एवं प्रसार शिक्षा के 20 से अधिक विषयों में स्नातकोत्तर एवं पीएचडी की डिग्री प्रदान करता है।
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प्रोटोकॉल के तहत डॉक्टरों के पैनल द्वारा हथिनी मोती के शव का पोस्टमार्टम कराया गया। सैंपल लेकर बरेली आईवीआरआई लैब भेज दिया जाएगा। रिपोर्ट आने में 10 से 15 दिन लगते हैं। रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है। मोती की उम्र भी हो रही थी एक कारण ऐज फैक्टर भी हो सकता है।
-संदीप सैनी, डीएफओ, वाइल्ड लाइफ, पंचकूला।