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बाल वीर ईशान ने विदेश तक चमकाया नाम
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बाल वीर ईशान शर्मा।
- फोटो : Yamuna Nagar
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। बच्चे ही देश का भविष्य होते हैं। बच्चे जितने प्रतिभाशाली होंगे देश का भविष्य उतना ही उज्ज्वल होगा। जिले के कई ऐसे बच्चे हैं, जिन्होंने अपना ही नहीं बल्कि स्कूल, माता-पिता, जिले व प्रदेश का नाम रोशन किया है। शहर निवासी ईशान शर्मा ने जिले का नाम देश में ही बल्कि विदेश में भी रोशन किया है। ईशान ने भारतीय संस्कृति अतिथि देवो भव की गरिमा की रक्षा करते हुए रशियन महिला की सहायता की। इसके लिए उसे राष्ट्रपति ने राष्ट्रीय बाल वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया है।
ईशान अभी 11वीं में है और चिकित्सक बनने का अपना लक्ष्य साधकर पढ़ाई कर रहा हैं। सावनपुरी निवासी ईशान शर्मा को बाल वीर के नाम से जिलेभर के लोग जानते हैं। ईशान ने 24 जुलाई 2019 को रशियन महिला की विषम परिस्थितियों में सहायता करके देश का नाम बदनाम होने से बचाया था। रशियन महिला मास्को से यहां अपने दोस्त के कहने पर आई थी।
यहां लालची दोस्त ने उसके साथ धोखा किया और सावनपुरी के पास छोड़कर फरार हो गया। ऐसे में ईशान ने महिला को देखा और उसकी सहायता की। यह काम किसी बड़े के लिए भी आसान नहीं था। महिला रशियन के अलावा अन्य कोई भाषा नहीं जाती थी। ऐसे में ईशान महिला को घर ले आया और गगूल ट्रांसलेट से उसकी पूरी बात सुनी और समझी। इसके बाद प्रशासन व पुलिस को इसकी सूचना दी। महिला सामान मिलने तक ईशान और उसके परिवार के साथ उनके घर रही। इसके बाद उसे सकुशल स्वदेश भेज दिया गया।
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महिला ने ईशान, जिला प्रशासन व भारत का धन्यवाद किया। रशियन नागरिक एलिना टिटोवा ने जाते हुए कहा कि था भारत एक महान देश है और ईशान जैसे बच्चे इसका गौरव हैं। ईशान को इस अदम्य साहस के लिए बाल वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया गया। पिछले साल 26 जनवरी को ईशान ने दिल्ली की परेड में हिस्सा लिया। वहीं राष्ट्रपति ने ईशान को राष्ट्रीय बाल वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इस दौरान उत्तर भारत में यह पुरस्कार पाने वाला ईशान अकेला वीर था। ईशान को जिले का गौरव भी कहा जाता है।
भुवन ने माता पिता का नाम चमकाया
शहर निवासी भुवन ने भी विषम परिस्थितियों में अपना, परिवार और जिले का नाम रोशन किया है। छात्र भुवन ने पारिवारिक परिस्थितियों को दरकिनार कर शिक्षा के क्षेत्र में नाम चमकाया।
इंजीनियर बनने का ख्वाब संजोय भुवन इसे पूरा करने में जी जान से जुटा हुआ है। जगाधरी वर्कशॉप की विष्णु नगर कॉलोनी निवासी भुवन के पिता प्रमोद बाली ऑटो चलाकर परिवार का पालन करते हैं। बच्चे बेहतर जिंदगी पाएं और कामयाब बनें, इसके लिए उन्हें उच्च शिक्षा दिला रहे हैं। भुवन ने हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड से 12वीं पास की। जिस समय देश में कोरोना अपने पांव पसार रहा था और सरकार इस पर रोक लगाने के लिए तमाम नीतियां बना रही थी। ऐसी परिस्थितियों में भुवन ने विज्ञान संकाय में 97.6 प्रतिशत अंक लेकर जिले भर में नाम चमकाया। अपने क्षेत्र में भुवन बच्चों के लिए रोल मॉडल हैं। बच्चे शिक्षा के दौरान आने वाली परेशानियां भुवन से साझा करते हैं।
कन्या शिक्षा के लिए बनीं मिसाल मीनू धीमान
रामनगर कॉलोनी निवासी मीनू धीमान ने भी शिक्षा क्षेत्र में मिसाल कायम की है। मीनू दूसरे बच्चों के लिए प्रेरणा का स्त्रोत है।
चार बहनों में सबसे छोटी मीनू अभी 12वीं की पढ़ाई कर रही हैं। मीनू धीमान का कोई भाई नहीं है। वह बेटों की तरह माता-पिता का नाम रोशन कर रही हैं। मीनू ने दसवीं कक्षा में 98.6 प्रतिशत अंक लेकर स्कूल, माता-पिता व जिले का नाम प्रदेश में रोशन किया है। 12वीं में भी वह दोबारा मुकाम पाने के लिए जी जान से मेहनत कर रही हैं। मीनू महिला शिक्षा की प्रबल समर्थक हैं और इसके लिए मीनू दूसरों को जागरूक भी करती है।
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यमुनानगर। बच्चे ही देश का भविष्य होते हैं। बच्चे जितने प्रतिभाशाली होंगे देश का भविष्य उतना ही उज्ज्वल होगा। जिले के कई ऐसे बच्चे हैं, जिन्होंने अपना ही नहीं बल्कि स्कूल, माता-पिता, जिले व प्रदेश का नाम रोशन किया है। शहर निवासी ईशान शर्मा ने जिले का नाम देश में ही बल्कि विदेश में भी रोशन किया है। ईशान ने भारतीय संस्कृति अतिथि देवो भव की गरिमा की रक्षा करते हुए रशियन महिला की सहायता की। इसके लिए उसे राष्ट्रपति ने राष्ट्रीय बाल वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया है।
ईशान अभी 11वीं में है और चिकित्सक बनने का अपना लक्ष्य साधकर पढ़ाई कर रहा हैं। सावनपुरी निवासी ईशान शर्मा को बाल वीर के नाम से जिलेभर के लोग जानते हैं। ईशान ने 24 जुलाई 2019 को रशियन महिला की विषम परिस्थितियों में सहायता करके देश का नाम बदनाम होने से बचाया था। रशियन महिला मास्को से यहां अपने दोस्त के कहने पर आई थी।
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यहां लालची दोस्त ने उसके साथ धोखा किया और सावनपुरी के पास छोड़कर फरार हो गया। ऐसे में ईशान ने महिला को देखा और उसकी सहायता की। यह काम किसी बड़े के लिए भी आसान नहीं था। महिला रशियन के अलावा अन्य कोई भाषा नहीं जाती थी। ऐसे में ईशान महिला को घर ले आया और गगूल ट्रांसलेट से उसकी पूरी बात सुनी और समझी। इसके बाद प्रशासन व पुलिस को इसकी सूचना दी। महिला सामान मिलने तक ईशान और उसके परिवार के साथ उनके घर रही। इसके बाद उसे सकुशल स्वदेश भेज दिया गया।
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महिला ने ईशान, जिला प्रशासन व भारत का धन्यवाद किया। रशियन नागरिक एलिना टिटोवा ने जाते हुए कहा कि था भारत एक महान देश है और ईशान जैसे बच्चे इसका गौरव हैं। ईशान को इस अदम्य साहस के लिए बाल वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया गया। पिछले साल 26 जनवरी को ईशान ने दिल्ली की परेड में हिस्सा लिया। वहीं राष्ट्रपति ने ईशान को राष्ट्रीय बाल वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इस दौरान उत्तर भारत में यह पुरस्कार पाने वाला ईशान अकेला वीर था। ईशान को जिले का गौरव भी कहा जाता है।
भुवन ने माता पिता का नाम चमकाया
शहर निवासी भुवन ने भी विषम परिस्थितियों में अपना, परिवार और जिले का नाम रोशन किया है। छात्र भुवन ने पारिवारिक परिस्थितियों को दरकिनार कर शिक्षा के क्षेत्र में नाम चमकाया।
इंजीनियर बनने का ख्वाब संजोय भुवन इसे पूरा करने में जी जान से जुटा हुआ है। जगाधरी वर्कशॉप की विष्णु नगर कॉलोनी निवासी भुवन के पिता प्रमोद बाली ऑटो चलाकर परिवार का पालन करते हैं। बच्चे बेहतर जिंदगी पाएं और कामयाब बनें, इसके लिए उन्हें उच्च शिक्षा दिला रहे हैं। भुवन ने हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड से 12वीं पास की। जिस समय देश में कोरोना अपने पांव पसार रहा था और सरकार इस पर रोक लगाने के लिए तमाम नीतियां बना रही थी। ऐसी परिस्थितियों में भुवन ने विज्ञान संकाय में 97.6 प्रतिशत अंक लेकर जिले भर में नाम चमकाया। अपने क्षेत्र में भुवन बच्चों के लिए रोल मॉडल हैं। बच्चे शिक्षा के दौरान आने वाली परेशानियां भुवन से साझा करते हैं।
कन्या शिक्षा के लिए बनीं मिसाल मीनू धीमान
रामनगर कॉलोनी निवासी मीनू धीमान ने भी शिक्षा क्षेत्र में मिसाल कायम की है। मीनू दूसरे बच्चों के लिए प्रेरणा का स्त्रोत है।
चार बहनों में सबसे छोटी मीनू अभी 12वीं की पढ़ाई कर रही हैं। मीनू धीमान का कोई भाई नहीं है। वह बेटों की तरह माता-पिता का नाम रोशन कर रही हैं। मीनू ने दसवीं कक्षा में 98.6 प्रतिशत अंक लेकर स्कूल, माता-पिता व जिले का नाम प्रदेश में रोशन किया है। 12वीं में भी वह दोबारा मुकाम पाने के लिए जी जान से मेहनत कर रही हैं। मीनू महिला शिक्षा की प्रबल समर्थक हैं और इसके लिए मीनू दूसरों को जागरूक भी करती है।

भुवन बाली।- फोटो : Yamuna Nagar

मीनू धीमान।- फोटो : Yamuna Nagar