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जैसा होगा तरीका, वैसा ही जीवन का रंग : डॉ. स्वाति
Mon, 28 Oct 2024 12:55 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Mon, 28 Oct 2024 12:55 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। एसएस जैन सभा मॉडल टाउन के प्रांगण में चल रहे चतुर्मास के 99वें दिन साध्वी डॉ. स्वाति महाराज ने फरमाया कि पानी का कोई रंग नहीं होता, उसे जिस पात्र में रखा जाए उसके अनुसार रंग दिखाई देता है। ऐसे ही जीवन का कोई निश्चित फल नहीं होता, जीने का तरीका जैसा होगा वैसा ही जीवन का रंग दिखाई देगा।
उन्होंने बताया जीवन को शांति से चखने पर मिठास और उग्रता व्याग्रता से चखने पर कड़वाहट का अनुभव होगा। मन अमूल्य निधि है। इससे मुक्ति को प्राप्त की जा सकती है। हमारे मन में उत्पन्न विचार ही आत्मा के उत्थान और पतन का कारण बनते हैं। वीत राग अर्थात राग और द्वेष से परे। दुनिया में जितने भी संघर्ष और संताप होते हैं, उसका मूल है राग और द्वेष।
ममत्व की भावना हमें स्वार्थी बना देती है। राग के कारण हमारी विचारधारा मैं और मेरा इन दो शब्दों से आगे बढ़ नहीं पाती। राग के कारण व्यक्ति अंधा हो जाता है। जबकि द्वेष व्यक्ति को शांति से जीने नहीं देती। राग खुद की सुरक्षा की चिंता में लगा रहता है। द्वेष दूसरों के संहार के षड्यंत्र हमेशा बनाता रहता है, जो इन दुर्गुणों से दूर होता है, वह जगत पूज्य बन जाता है।
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यमुनानगर। एसएस जैन सभा मॉडल टाउन के प्रांगण में चल रहे चतुर्मास के 99वें दिन साध्वी डॉ. स्वाति महाराज ने फरमाया कि पानी का कोई रंग नहीं होता, उसे जिस पात्र में रखा जाए उसके अनुसार रंग दिखाई देता है। ऐसे ही जीवन का कोई निश्चित फल नहीं होता, जीने का तरीका जैसा होगा वैसा ही जीवन का रंग दिखाई देगा।
उन्होंने बताया जीवन को शांति से चखने पर मिठास और उग्रता व्याग्रता से चखने पर कड़वाहट का अनुभव होगा। मन अमूल्य निधि है। इससे मुक्ति को प्राप्त की जा सकती है। हमारे मन में उत्पन्न विचार ही आत्मा के उत्थान और पतन का कारण बनते हैं। वीत राग अर्थात राग और द्वेष से परे। दुनिया में जितने भी संघर्ष और संताप होते हैं, उसका मूल है राग और द्वेष।
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ममत्व की भावना हमें स्वार्थी बना देती है। राग के कारण हमारी विचारधारा मैं और मेरा इन दो शब्दों से आगे बढ़ नहीं पाती। राग के कारण व्यक्ति अंधा हो जाता है। जबकि द्वेष व्यक्ति को शांति से जीने नहीं देती। राग खुद की सुरक्षा की चिंता में लगा रहता है। द्वेष दूसरों के संहार के षड्यंत्र हमेशा बनाता रहता है, जो इन दुर्गुणों से दूर होता है, वह जगत पूज्य बन जाता है।
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