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Yamuna Nagar News: गजब ः बिना आईसीयू का जिला अस्पताल
Fri, 21 Jun 2024 05:53 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Fri, 21 Jun 2024 05:53 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। प्रदेश सरकार ने 105 करोड़ रुपये की मोटी रकम खर्च करके 200 बेड का पांच मंजिला अस्पताल तो खड़ा कर दिया, लेकिन इसमें आईसीयू की सुविधा आज तक शुरू नहीं हुई। अस्पताल का नया भवन पिछले एक साल से बिना आईसीयू के चल रहा है। अस्पताल में आईसीयू न होने से गंभीर बीमारी वाले मरीज परेशान हैं।
मरीज की हालत जब ज्यादा खराब होती है तो डॉक्टर उन्हें पीजीआई चंडीगढ़ रेफर कर अपनी जिम्मेदारी से मुक्त हो जाते हैं। एक साल में स्वास्थ्य विभाग की तरफ से आईसीयू को शुरू करने को लेकर कोई भी प्रयास नहीं किया गया। दरअसल कुछ डॉक्टर नहीं चाहते की अस्पताल में आईसीयू बने। आईसीयू से डॉक्टरों का काम बढ़ जाएगा। इसके अलावा डॉक्टरों की आपसी राजनीति भी है जो मरीजों को सुविधा से महरूम रखे हुए है।
गत वर्ष 11 मई को 200 बेड के नए अस्पताल का शुभारंभ हुआ था। नया अस्पताल बनने से यहां पर मरीजों की ओपीडी भी दोगुना से ज्यादा हो गइईहै। अस्पताल में रोजाना औसतन 1500 मरीजों की ओपीडी होती है। सामान्य रोग वाले मरीज तो चेकअप के बाद दवाई लेकर घर चले जाते हैं। परंतु सड़क हादसों में गंभीर रूप से घायल, बड़ी सर्जरी या गंभीर रोग के मरीजों को अस्पताल में भर्ती करना पड़ता है।
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खासकर उन लोगों को आईसीयू में वेंटीलेटर पर रखना पड़ता है, जिन्हें सांस लेने में दिक्कत आने लगे या फिर उनके शरीर के अंग काम करना बंद कर दें। ऐसे में उन्हें गंभीर दीर्घकालिक प्रभावों या यहां तक कि मृत्यु से बचने के लिए उन्हें विशेष उपचार व देखभाल की आवश्यकता होती है। आईसीयू में मॉनिटर, बेड व अन्य उपकरणों से मरीजों पर निगरानी रखी जाती है।
जिला नागरिक अस्पताल में आईसीयू के लिए छह बेड, छह माॅनिटर, वेंटीलेटर, मेडिकल ऑफिसर, एमडी मेडिसन, 20 स्टाफ नर्स के अलावा मरीजों की केयर करने वाला अनुभवी स्टाफ की जरूरत पड़ेगी। हालांकि स्वास्थ्य विभाग के पास 40 वेंटीलेटर पड़े हुए हैं, जो स्टोर में धूल फांक रहे हैं। वहीं ट्रामा सेंटर के पुराने भवन में भी वेंटीलेटर के बेड कबाड़ हो रहे हैं। कुछ माह पहले अस्पताल को करीब 45 स्टाफ नर्स मिली थी।
आईसीयू के वार्ड में खोला एटीएफ
अस्पताल के बी ब्लॉक में ही ऑपरेशन थियेटर के पास ही आईसीयू के लिए अलग से वार्ड निर्धारित है। एक साल में आईसीयू के लिए न तो किसी को पत्र लिखा गया और न ही आला अधिकारियों से इसके लिए स्टाफ व जरूरी उपकरणों की डिमांड की गई। आईसीयू के लिए जो वार्ड निर्धारित था उसमें भी स्वास्थ्य विभाग की तरफ से एडिक्शन ट्रीटमेंट फेसिलिटी (एटीएफ) सेंटर खोल दिया। इस वार्ड में ऑक्सीजन व सक्शन के लिए पाइप लाइन लगी हुई है। परंतु अब इसमें नशा करने वाले लोगों का उपचार होगा।
आईसीयू जल्द शुरू करने का प्रयास : पीएमओ
मुकंद लाल जिला नागरिक अस्पताल की पीएमओ डॉ. दिव्या मंगला ने बताया कि आईसीयू को जल्द शुरू करने का प्रयास कर रहे हैं। इसके लिए वार्ड में किचन खोलना था अब वहां पर आईसीयू के लिए व्यवस्था की जाएगी। आईसीयू के लिए अलग से विशेषज्ञ स्टाफ की जरूरत होती है। इसके लिए भी निदेशालय में बात करेंगी।
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यमुनानगर। प्रदेश सरकार ने 105 करोड़ रुपये की मोटी रकम खर्च करके 200 बेड का पांच मंजिला अस्पताल तो खड़ा कर दिया, लेकिन इसमें आईसीयू की सुविधा आज तक शुरू नहीं हुई। अस्पताल का नया भवन पिछले एक साल से बिना आईसीयू के चल रहा है। अस्पताल में आईसीयू न होने से गंभीर बीमारी वाले मरीज परेशान हैं।
मरीज की हालत जब ज्यादा खराब होती है तो डॉक्टर उन्हें पीजीआई चंडीगढ़ रेफर कर अपनी जिम्मेदारी से मुक्त हो जाते हैं। एक साल में स्वास्थ्य विभाग की तरफ से आईसीयू को शुरू करने को लेकर कोई भी प्रयास नहीं किया गया। दरअसल कुछ डॉक्टर नहीं चाहते की अस्पताल में आईसीयू बने। आईसीयू से डॉक्टरों का काम बढ़ जाएगा। इसके अलावा डॉक्टरों की आपसी राजनीति भी है जो मरीजों को सुविधा से महरूम रखे हुए है।
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गत वर्ष 11 मई को 200 बेड के नए अस्पताल का शुभारंभ हुआ था। नया अस्पताल बनने से यहां पर मरीजों की ओपीडी भी दोगुना से ज्यादा हो गइईहै। अस्पताल में रोजाना औसतन 1500 मरीजों की ओपीडी होती है। सामान्य रोग वाले मरीज तो चेकअप के बाद दवाई लेकर घर चले जाते हैं। परंतु सड़क हादसों में गंभीर रूप से घायल, बड़ी सर्जरी या गंभीर रोग के मरीजों को अस्पताल में भर्ती करना पड़ता है।
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खासकर उन लोगों को आईसीयू में वेंटीलेटर पर रखना पड़ता है, जिन्हें सांस लेने में दिक्कत आने लगे या फिर उनके शरीर के अंग काम करना बंद कर दें। ऐसे में उन्हें गंभीर दीर्घकालिक प्रभावों या यहां तक कि मृत्यु से बचने के लिए उन्हें विशेष उपचार व देखभाल की आवश्यकता होती है। आईसीयू में मॉनिटर, बेड व अन्य उपकरणों से मरीजों पर निगरानी रखी जाती है।
जिला नागरिक अस्पताल में आईसीयू के लिए छह बेड, छह माॅनिटर, वेंटीलेटर, मेडिकल ऑफिसर, एमडी मेडिसन, 20 स्टाफ नर्स के अलावा मरीजों की केयर करने वाला अनुभवी स्टाफ की जरूरत पड़ेगी। हालांकि स्वास्थ्य विभाग के पास 40 वेंटीलेटर पड़े हुए हैं, जो स्टोर में धूल फांक रहे हैं। वहीं ट्रामा सेंटर के पुराने भवन में भी वेंटीलेटर के बेड कबाड़ हो रहे हैं। कुछ माह पहले अस्पताल को करीब 45 स्टाफ नर्स मिली थी।
आईसीयू के वार्ड में खोला एटीएफ
अस्पताल के बी ब्लॉक में ही ऑपरेशन थियेटर के पास ही आईसीयू के लिए अलग से वार्ड निर्धारित है। एक साल में आईसीयू के लिए न तो किसी को पत्र लिखा गया और न ही आला अधिकारियों से इसके लिए स्टाफ व जरूरी उपकरणों की डिमांड की गई। आईसीयू के लिए जो वार्ड निर्धारित था उसमें भी स्वास्थ्य विभाग की तरफ से एडिक्शन ट्रीटमेंट फेसिलिटी (एटीएफ) सेंटर खोल दिया। इस वार्ड में ऑक्सीजन व सक्शन के लिए पाइप लाइन लगी हुई है। परंतु अब इसमें नशा करने वाले लोगों का उपचार होगा।
आईसीयू जल्द शुरू करने का प्रयास : पीएमओ
मुकंद लाल जिला नागरिक अस्पताल की पीएमओ डॉ. दिव्या मंगला ने बताया कि आईसीयू को जल्द शुरू करने का प्रयास कर रहे हैं। इसके लिए वार्ड में किचन खोलना था अब वहां पर आईसीयू के लिए व्यवस्था की जाएगी। आईसीयू के लिए अलग से विशेषज्ञ स्टाफ की जरूरत होती है। इसके लिए भी निदेशालय में बात करेंगी।