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Yamuna Nagar News: स्टे हटने से डॉक्टर मंजीत फिर बने सिविल सर्जन
Sat, 31 May 2025 02:13 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Sat, 31 May 2025 02:13 AM IST
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यमुनानगर। स्टे हटने पर डॉ. मंजीत फिर से यमुनानगर के सिविल सर्जन बन गए हैं। मंजीत सिंह के वापस आने से डॉक्टरों में उत्साह है। इसी साल 20 मार्च को स्वास्थ्य विभाग ने अंबाला की सिविल सर्जन डॉ. पूनम चौधरी का यमुनानगर तबादला कर दिया था।
वहीं, यमुनानगर सिविल सर्जन डॉ. मंजीत सिंह को करनाल स्थित बायो लेबोरेट्री का इंचार्ज बना दिया गया था। अब एक बार फिर डॉ. पूनम चौधरी का तबादला करनाल करके डॉ. मंजीत को सिविल सर्जन यमुनानगर का अतिरिक्त कार्यभार सौंप दिया गया है।
डॉक्टर मंजीत सिंह शुक्रवार को जैसे ही सिविल सर्जन कार्यालय में पहुंचे तो उनके समर्थकों ने गुलदस्ते देकर उनका स्वागत किया। जबकि डॉ. पूनम चौधरी ने करनाल में बतौर सिविल सर्जन ज्वाइन किया है। सिविल सर्जन की कुर्सी के संबंध में चल रही लड़ाई का ये मामला हाई कोर्ट तक पहुंच गया था।
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यही वजह रही कि डेढ़ माह तक सिविल सर्जन की कुर्सी डॉक्टर पूनम चौधरी के पास रही। तबादले के खिलाफ डॉ. पूनम चौधरी हाई कोर्ट से स्टे ले आई और दोबारा सिविल सर्जन पद पर ज्वाइन कर लिया। दो दिन पहले ही हाई कोर्ट की डबल बैंच ने पूनम चौधरी की स्टे को हटा दिया। स्टे हटते ही एक बार फिर मंजीत सिंह ने यमुनानगर में ज्वाइन किया है। डॉ. पूनम चौधरी जब हाई कोर्ट से स्टे ऑर्डर लेकर आई थी तब भी कुर्सी को लेकर काफी ड्रामा हुआ था। क्योंकि कुर्सी एक थी और सिविल सर्जन दो।
जिस पर डीसी ने दोनों को अपने कार्यालय में बुलाया। जिस पर डीसी ने पूनम चौधरी को सिविल सर्जन की कुर्सी पर बैठने को कहा था। इसके बाद पूनम चौधरी एक बार फिर हाई कोर्ट चली गईं।
उन्होंने शिकायत में आरोप लगाया कि वह कोर्ट के आदेश लेकर वह नौ अप्रैल को ज्वाइन करने गई तो डॉ. मंजीत सिंह ने कुर्सी नहीं छोड़ी। हालांकि प्रतिवादी पक्ष ने अपना पक्ष रखते हुए कहा था कि अदालत के आदेश की प्रति प्राप्त होते ही उन्होंने अपना पद छोड़ दिया था। अदालत ने पूनम चौधरी पर 20 हजार रुपये जुर्माना लगाया था। संवाद
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वहीं, यमुनानगर सिविल सर्जन डॉ. मंजीत सिंह को करनाल स्थित बायो लेबोरेट्री का इंचार्ज बना दिया गया था। अब एक बार फिर डॉ. पूनम चौधरी का तबादला करनाल करके डॉ. मंजीत को सिविल सर्जन यमुनानगर का अतिरिक्त कार्यभार सौंप दिया गया है।
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डॉक्टर मंजीत सिंह शुक्रवार को जैसे ही सिविल सर्जन कार्यालय में पहुंचे तो उनके समर्थकों ने गुलदस्ते देकर उनका स्वागत किया। जबकि डॉ. पूनम चौधरी ने करनाल में बतौर सिविल सर्जन ज्वाइन किया है। सिविल सर्जन की कुर्सी के संबंध में चल रही लड़ाई का ये मामला हाई कोर्ट तक पहुंच गया था।
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यही वजह रही कि डेढ़ माह तक सिविल सर्जन की कुर्सी डॉक्टर पूनम चौधरी के पास रही। तबादले के खिलाफ डॉ. पूनम चौधरी हाई कोर्ट से स्टे ले आई और दोबारा सिविल सर्जन पद पर ज्वाइन कर लिया। दो दिन पहले ही हाई कोर्ट की डबल बैंच ने पूनम चौधरी की स्टे को हटा दिया। स्टे हटते ही एक बार फिर मंजीत सिंह ने यमुनानगर में ज्वाइन किया है। डॉ. पूनम चौधरी जब हाई कोर्ट से स्टे ऑर्डर लेकर आई थी तब भी कुर्सी को लेकर काफी ड्रामा हुआ था। क्योंकि कुर्सी एक थी और सिविल सर्जन दो।
जिस पर डीसी ने दोनों को अपने कार्यालय में बुलाया। जिस पर डीसी ने पूनम चौधरी को सिविल सर्जन की कुर्सी पर बैठने को कहा था। इसके बाद पूनम चौधरी एक बार फिर हाई कोर्ट चली गईं।
उन्होंने शिकायत में आरोप लगाया कि वह कोर्ट के आदेश लेकर वह नौ अप्रैल को ज्वाइन करने गई तो डॉ. मंजीत सिंह ने कुर्सी नहीं छोड़ी। हालांकि प्रतिवादी पक्ष ने अपना पक्ष रखते हुए कहा था कि अदालत के आदेश की प्रति प्राप्त होते ही उन्होंने अपना पद छोड़ दिया था। अदालत ने पूनम चौधरी पर 20 हजार रुपये जुर्माना लगाया था। संवाद