{"_id":"688fb41f60fd66009e0bc23d","slug":"after-the-mahabharata-war-the-pandavas-worshipped-here-yamuna-nagar-news-c-246-1-sknl1018-141739-2025-08-04","type":"story","status":"publish","title_hn":"Yamuna Nagar News: महाभारत के युद्ध के बाद यहां पांडवों ने की थी आराधना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Yamuna Nagar News: महाभारत के युद्ध के बाद यहां पांडवों ने की थी आराधना
Mon, 04 Aug 2025 12:40 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Mon, 04 Aug 2025 12:40 AM IST
विज्ञापन
मंदिर में विराजमान भगवान शिव-पार्वती की मूर्ति व स्वयंभू शिवलिंग। संवाद
- फोटो : स्रोत-विभाग
संवाद न्यूज एजेंसी
साढौरा। गांव झंडा की उत्तरी दिशा में शिवालिक की पहाड़ी पर स्थित शिव मंदिर का महाभारत से संबंध बताया जाता है। ऐसी मान्यता है कि मंदिर परिसर में मौजूद बरगद के पेड़ से ही बर्बरीक ने महाभारत का युद्ध देखा था। इसके अलावा महाभारत के युद्ध के बाद पांडवों द्वारा इस जगह पर भगवान शिव की आराधना करने की भी बात प्रचलित है।
यहां पर दर्शन करने के लिए वैसे तो रोजाना ही शिव भक्तों का तांता लगा रहता है। शिवरात्रि के मौके पर लगने वाले मेले में हजारों शिव भक्त पहुंचते हैं। गांव झंडा से इस मंदिर को जाने वाले दो किमी लंबे रास्ते की चढ़ाई एकदम सीधी है। इस रास्ते को कुछ समय पहले ही मंदिर कमेटी के प्रधान रमेश बिट्टू ने पक्का बनवाया है।
शिव मंदिर की देखरेख करने वाली साध्वी माता ने बताया कि इस मंदिर में स्वयंभू शिवलिंग स्थापित है। कुछ साल पहले इस शिवलिंग को गांव में स्थापित करवाने के लिए खोदाई करवाई गई तो इस शिवलिंग की गहराई अथाह पाए जाने पर ग्रामीणों को काम रोकना पड़ गया था। वहीं मंदिर को भव्य स्वरूप प्रदान करने के अलावा यहां आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए दानी सज्जनों के सहयोग से पार्किंग, विश्राम स्थल, पेयजल, शौचालयों व भंडारा गृह का निर्माण किया गया है।
विज्ञापन
वर्तमान में यहां यज्ञ शाला का निर्माण चल रहा है।मंदिर कमेटी के सदस्य रामकुमार नंबरदार ने बताया कि इस मंदिर का इतिहास बहुत की पुराना है। दूर-दूर से श्रद्धालु यहां माथा टेकने के लिए पहुंचते हैं। शिवरात्रि के मौके पर मंदिर परिसर में विशेष सजावट की जाती है। शिवलिंग का फूल, फलों व चंदन से विशेष शृंगार किया जाता है।
विज्ञापन
साढौरा। गांव झंडा की उत्तरी दिशा में शिवालिक की पहाड़ी पर स्थित शिव मंदिर का महाभारत से संबंध बताया जाता है। ऐसी मान्यता है कि मंदिर परिसर में मौजूद बरगद के पेड़ से ही बर्बरीक ने महाभारत का युद्ध देखा था। इसके अलावा महाभारत के युद्ध के बाद पांडवों द्वारा इस जगह पर भगवान शिव की आराधना करने की भी बात प्रचलित है।
यहां पर दर्शन करने के लिए वैसे तो रोजाना ही शिव भक्तों का तांता लगा रहता है। शिवरात्रि के मौके पर लगने वाले मेले में हजारों शिव भक्त पहुंचते हैं। गांव झंडा से इस मंदिर को जाने वाले दो किमी लंबे रास्ते की चढ़ाई एकदम सीधी है। इस रास्ते को कुछ समय पहले ही मंदिर कमेटी के प्रधान रमेश बिट्टू ने पक्का बनवाया है।
विज्ञापन
शिव मंदिर की देखरेख करने वाली साध्वी माता ने बताया कि इस मंदिर में स्वयंभू शिवलिंग स्थापित है। कुछ साल पहले इस शिवलिंग को गांव में स्थापित करवाने के लिए खोदाई करवाई गई तो इस शिवलिंग की गहराई अथाह पाए जाने पर ग्रामीणों को काम रोकना पड़ गया था। वहीं मंदिर को भव्य स्वरूप प्रदान करने के अलावा यहां आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए दानी सज्जनों के सहयोग से पार्किंग, विश्राम स्थल, पेयजल, शौचालयों व भंडारा गृह का निर्माण किया गया है।
विज्ञापन
वर्तमान में यहां यज्ञ शाला का निर्माण चल रहा है।मंदिर कमेटी के सदस्य रामकुमार नंबरदार ने बताया कि इस मंदिर का इतिहास बहुत की पुराना है। दूर-दूर से श्रद्धालु यहां माथा टेकने के लिए पहुंचते हैं। शिवरात्रि के मौके पर मंदिर परिसर में विशेष सजावट की जाती है। शिवलिंग का फूल, फलों व चंदन से विशेष शृंगार किया जाता है।

मंदिर में विराजमान भगवान शिव-पार्वती की मूर्ति व स्वयंभू शिवलिंग। संवाद- फोटो : स्रोत-विभाग