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सात साल में विज्ञापन फीस शून्य, करोड़ों का नुकसान

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 22 Jun 2022 02:27 AM IST
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Advertising fee zero in seven years, loss of crores
निगम की विज्ञापन साइट्स सहित पूरे शहर में सड़कों व गलियों में पोल व पेड़ों पर अवैध तरीके से हो रहे - फोटो : Yamuna Nagar
यमुनानगर। शहर के विकास कार्यों के लिए बजट की कमी आड़े आ रही है। यही कारण है कि तीन साल में नगर निगम की सदन बैठकों में मंजूर विकास संबंधी प्रस्तावों से लेकर अन्य जरूरी काम सिरे नहीं चढ़ पाए हैं। ऐसे में निगम की आय का एक बड़ा स्त्रोत विज्ञापन फीस से होने वाली रिकवरी गत सात वर्षों से शून्य है। इससे निगम को राजस्व नुकसान हो रहा है। उधर, निगम अफसर के अनुसार शहरी स्थानी निकाय निदेशालय (यूएलबी) ने अब नए प्रपोजल पर टेंडर के आदेश दिए हैं। दूसरी ओर, पार्षदों में भी इस बात का रोष है कि विज्ञापन फीस से निगम पिछले कई वर्षों में कुछ भी नहीं कमा पा रहा है।
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एक दशक से शहर में निगम की विज्ञापन साइट्स के टेंडर बार-बार लगने और रद होने का खेल चल रहा है। वर्ष 2021 में भी अक्तूबर को लगे टेंडर में कोई ठेकेदार न मिलने पर नवंबर व दिसंबर में दो बार साइट फीस कम करने पर भी टेंडर सिरे नहीं चढ़े। अब पुराने टेंडर को रद कर यूएलबी (अर्बन लॉकल बॉडी) ने नए प्रपोजल पर टेंडर करने के निर्देश दिए हैं। यानी विज्ञापन फीस से होने वाली आय टेंडर सिरे न चढ़ने तक फिर लटक गई है। इससे शहर में हो रहे अवैध विज्ञापनों से लगातार राजस्व को भी नुकसान हो रहा है।
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सात साल में 5.27 करोड़ का था लक्ष्य, आय शून्य
बजट लक्ष्य इनकम
2015-16 2 करोड़ 0
2016-17 50 लाख 0
2017-18 50 लाख 0
2018-19 1 करोड़ 0
2019-20 50 लाख 0
2020-21 27 लाख 0
2021-22 50 लाख 0
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बिना अनुमति विज्ञापन से 47 करोड़ का नुकसान
शहर की विज्ञापन साइट्स के टेंडर न होने से गत सात वर्षों में हर साल निगम के बजट में तय लक्ष्य के मुताबिक करीब पांच करोड़ आय और बिना परमिशन शहर में हुए विज्ञापन से नगर निगम को करीब 47 करोड़ नुकसान का अनुमान है। यह मामला गत वर्ष निकाय मंत्री तक भी पहुंचा, तब जाकर बिना परमिशन विज्ञापन करने वाली फर्मों पर नगर निगम ने नोटिस व जुर्माना की कार्रवाई की। साथ ही शहर में निगम की विज्ञापन साइट्स के टेंडर की प्रक्रिया शुरू की।
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दो बार साइट फीस घटा किए टेंडर
अक्टूबर-2021 में नगर निगम ने शहर में अपनी 100 विज्ञापन साइट्स (30100 वर्ग फुट एरिया) के 7.55 करोड़ वार्षिक रिजर्व लाइसेंस फीस पर टेंडर किए, जिसमें किसी ठेकेदार से बिड नहीं आई। एक नवंबर को साइट्स 100 से कम कर 75 की और वार्षिक रिजर्व लाइसेंस फीस घटाकर 3.61 करोड़ की, पर इस टेंडर में भी ठेकेदार नहीं मिला। 14 दिसंबर में साइट्स 75 से कम कर 60 की और रिजर्व लाइसेंस फीस घटाकर 96 लाख वार्षिक की, लेकिन इस तीसरे बार लगे टेंडर के बाद यूएलबी ने प्रक्रिया रद कर दी।
पार्षदों का तर्क
वार्ड-4 से पार्षद देवेंद्र सिंह, वार्ड-8 से विनोद मरवाह, वार्ड-13 से निर्मल चौहान ने कहा कि तीन साल में हुई निगम की सदन बैठकों में मंजूर वार्डों के अधिकांश प्रस्तावों पर काम नहीं लग पाया है या उनका काम अधूरा पड़ा है। इसके साथ सड़कों, पानी निकासी, स्ट्रीट लाइट अन्य जरूरी कामों में अफसर फंड की कमी गिना देते हैं, पर अगर निगम के आय के विज्ञापन जैसे बड़े स्रोतों से पूरी रिकवरी की जाए तो विकास कार्यों के लिए फंड की कमी नहीं रहेगी।

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शहर में नगर निगम की विज्ञापन साइट्स के अक्टूबर से दिसंबर के बीच टेंडर किए थे। दो बार ठेकेदार न मिलने पर साइट व फीस कम कर तीसरी बार टेंडर लगाया, जिसकी प्रक्रिया रोक दी गई थी क्योंकि अब यूएलबी से नए प्रपोजल पर टेंडर के आदेश हैं, जिस पर अब नए सिरे से टेंडर किए जा रहे हैं।
- अशोक कुमार, संयुक्त आयुक्त, नगर निगम।
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