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Yamuna Nagar News: त्योहारी सीजन में मिठाइयों की भरमार, जिम्मेदार हैं बेपरवाह

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 05 Nov 2023 12:47 AM IST
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Abundance of sweets in the festive season, careless people are responsible
त्योहारी सीजन चल रहा है। करवाचौथ के बाद अब दिवाली नजदीक है। बाजार में मिठाइयों की नई-नई दुकानें सज गई हैं, लेकिन खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता के लिए जिम्मेदार विभाग बेखबर है। तभी तो अब तक एक भी मिठाई की दुकान या अन्य खाद्य पदार्थों के सैंपल नहीं लिए गए। ऐसे में गुणवत्ताहीन खाद्य पदार्थ आपकी सेहत खराब कर सकते हैं।
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विदित हो कि त्योहारों में सबसे ज्यादा मिठाइयां बिकती हैं। बाजार में बिकने वाली सारी मिठाई शुद्ध हो, यह मुमकिन नहीं। कारण कि त्योहारी सीजन में मांग के अनुरूप आपूर्ति संभव नहीं हो पाती। इस कारण मिलावट की आशंका अधिक रहती है। इस दौरान विभाग की ओर से भी खानापूर्ति कर दायित्यों की इतिश्री कर ली जाती है। इसके तहत त्योहारी सीजन में महज कुछ सैंपल ले लिए जाते हैं, उसकी भी रिपोर्ट तक आती है, जबकि खाद्य पदार्थों की खपत हो जाती है। जबकि सैंपलों की रिपोर्ट 14 दिन में जारी करने के प्रावधान है। ऐसे में विभागीय लापरवाही का खामियाजा उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ता है। कारण कि जिस दुकान से मिठाई का सैंपल लिया जाता है, उसे भी सील नहीं किया जाता। वह मिठाई ही लोगों को बेच दी जाती है।
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कई बार मिलावटी खाद्य पदार्थों के सेवन से लोग बीमार हो जाते हैं। इससे पहले नवरात्र के साथ ही त्योहारों की शुरुआत हो चुकी है। दशहरा पर्व के बाद करवा चौथ, धनतेरस, दिवाली, गोवर्धन पूजा, भाई दूज और फिर छठ पर्व है। त्योहारों में मिठाई की मांग काफी बढ़ जाती है। ऐसे में मांग के अनुरूप उपभोक्ताओं को आपूर्ति संभव नहीं हो पाती है और अधिक से अधिक मुनाफे के लिए मिलावटखोर सक्रिय हो जाते हैं। दूसरी ओर खाद्य और नागरिक आपूर्ति विभाग का दायित्व है कि उपभोक्ताओं को उचित मूल्य पर गुणवत्तापरक खाद्य पदार्थों की आपूति हो। वहीं मिलावटी वस्तुओं की निगरानी करना एवं प्रभावी शिकायत निवारण तंत्र स्थापित करना भी विभाग का कार्य है, लेकिन त्योहारी सीजन में भी जिम्मेदार बेपरवाह नजर आ रहे हैं।
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90 रुपये खरीदकर 150 से 180 रुपये तक बेचते हैं दुकानदारजिले में कुछ कारोबारी ऐसे हैं जो मिठाई को थोक में तैयार करते हैं। जैसे मिष्ठान भंडार पर इस वक्त रसगुल्ले का रेट 150 से 180 रुपये प्रति किलोग्राम है, जो लोग थोक में इन्हें तैयार करते हैं वह मिष्ठान भंडाराें को इसे 80 से 90 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बेचते हैं। 80 रुपये में खरीद कर दुकान संचालक 60 से 100 रुपये किलोग्राम कमा रहे हैं। ऐसे में जो कारोबारी 80 से 90 रुपये में थोक में बेच रहा है, वह भी मुनाफा जरूर निकालेगा। दूसरी ओर बाजार में दूध का रेट 60 रुपये किलोग्राम है, जिसकी डिमांड के अनुसार आपूर्ति संभव नहीं हो पाती है।



फूड इंस्पेक्टर प्रेम सिंह का कहना है कि विभाग लोगों के स्वास्थ्य को लेकर गंभीर है। जल्द ही मिठाइयों के सैंपल लिए जाएंगे। खराब हाेने के डर से ज्यादातर मिठाई करीब एक सप्ताह पहले ही बननी शुरू होती है। मिलावट करने वालों पर कार्रवाई की जाती है।
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