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Yamuna Nagar News: सिविल सर्जन पर लगाया 20 हजार रुपये जुर्माना
Wed, 07 May 2025 12:05 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Wed, 07 May 2025 12:05 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने यमुनानगर की सिविल सर्जन पर 20 हजार रुपये जुर्माना लगाया है। सीएमओ की याचिका को निराधार और कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग मानते हुए खारिज भी कर दिया गया। जुर्माना राशि उन्हें दो सप्ताह में पीजीआई चंडीगढ़ के गरीब मरीज सहायता कोष में जमा करानी होगी। समय पर भुगतान न करने की स्थिति में यह राशि उनके वेतन से काट कर जमा की जाएगी।
सिविल सर्जन ने यमुनानगर के तत्कालीन सिविल सर्जन (वर्तमान में स्टेट बैक्टीरियोलॉजिस्ट, पब्लिक हेल्थ लैब करनाल) डॉ. मनजीत सिंह के खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ता ने अदालत से अनुरोध किया कि डॉ. मनजीत सिंह के खिलाफ अदालत के आदेश सात अप्रैल 2025 की जानबूझ कर अवहेलना करने के लिए अवमानना की कार्यवाही शुरू की जाए।
उनका आरोप था कि नौ अप्रैल को सुबह नौ बजे जब वह सिविल सर्जन का कार्यभार संभालने पहुंचीं तो डॉ. मंजीत सिंह उनके पद पर बैठे हुए थे, जबकि उन्हें पद खाली कर देना चाहिए था। इस पर डॉ. मंजीत सिंह ने कोर्ट में अपना पक्ष रखते हुए बताया कि अदालत के आदेश की प्रति प्राप्त होते ही उन्होंने पद छोड़ दिया और उच्च अधिकारियों को ईमेल के माध्यम से सूचित भी कर दिया था।
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न्यायालय ने याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता ने नौ अप्रैल 2025 को कार्यभार संभाल लिया था और प्रतिवादी ने आदेश के अनुसार कार्य किया, इसलिए कोई अवमानना नहीं बनती। इसलिए न्यायालय ने याचिकाकर्ता पर 20,000 रुपये का जुर्माना लगाया है।
यह था मामला
स्वास्थ्य विभाग ने 20 मार्च अंबाला की सिविल सर्जन डॉ. पूनम चौधरी का ट्रांसफर यमुनानगर करते हुए उन्हें सिविल सर्जन बनाया था। यमुनानगर के सिविल सर्जन डॉ. मंजीत सिंह का ट्रांसफर स्टेट बैक्टीरियोलॉजिस्ट, पब्लिक हेल्थ लैब करनाल के पद पर किया था। कुछ दिन के बाद स्वास्थ्य विभाग ने डॉ. पूनम चौधरी का यमुनानगर से ट्रांसफर कर दिया और डॉ. मंजीत सिंह को यमुनानगर सिविल सर्जन का अतिरिक्त कार्यभार सौंप दिया। इस ट्रांसफर के खिलाफ डॉ. पूनम चौधरी उच्चतम न्यायालय से स्थगन आदेश ले आईं। डॉ. पूनम ने आरोप लगाया कि अदालत के आदेश लेकर जब वह सिविल सर्जन पद पर ज्वाइन करने पहुंचीं तो डॉ. मंजीत सिंह ने आदेशों की अवहेलना की।
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यमुनानगर। पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने यमुनानगर की सिविल सर्जन पर 20 हजार रुपये जुर्माना लगाया है। सीएमओ की याचिका को निराधार और कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग मानते हुए खारिज भी कर दिया गया। जुर्माना राशि उन्हें दो सप्ताह में पीजीआई चंडीगढ़ के गरीब मरीज सहायता कोष में जमा करानी होगी। समय पर भुगतान न करने की स्थिति में यह राशि उनके वेतन से काट कर जमा की जाएगी।
सिविल सर्जन ने यमुनानगर के तत्कालीन सिविल सर्जन (वर्तमान में स्टेट बैक्टीरियोलॉजिस्ट, पब्लिक हेल्थ लैब करनाल) डॉ. मनजीत सिंह के खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ता ने अदालत से अनुरोध किया कि डॉ. मनजीत सिंह के खिलाफ अदालत के आदेश सात अप्रैल 2025 की जानबूझ कर अवहेलना करने के लिए अवमानना की कार्यवाही शुरू की जाए।
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उनका आरोप था कि नौ अप्रैल को सुबह नौ बजे जब वह सिविल सर्जन का कार्यभार संभालने पहुंचीं तो डॉ. मंजीत सिंह उनके पद पर बैठे हुए थे, जबकि उन्हें पद खाली कर देना चाहिए था। इस पर डॉ. मंजीत सिंह ने कोर्ट में अपना पक्ष रखते हुए बताया कि अदालत के आदेश की प्रति प्राप्त होते ही उन्होंने पद छोड़ दिया और उच्च अधिकारियों को ईमेल के माध्यम से सूचित भी कर दिया था।
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न्यायालय ने याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता ने नौ अप्रैल 2025 को कार्यभार संभाल लिया था और प्रतिवादी ने आदेश के अनुसार कार्य किया, इसलिए कोई अवमानना नहीं बनती। इसलिए न्यायालय ने याचिकाकर्ता पर 20,000 रुपये का जुर्माना लगाया है।
यह था मामला
स्वास्थ्य विभाग ने 20 मार्च अंबाला की सिविल सर्जन डॉ. पूनम चौधरी का ट्रांसफर यमुनानगर करते हुए उन्हें सिविल सर्जन बनाया था। यमुनानगर के सिविल सर्जन डॉ. मंजीत सिंह का ट्रांसफर स्टेट बैक्टीरियोलॉजिस्ट, पब्लिक हेल्थ लैब करनाल के पद पर किया था। कुछ दिन के बाद स्वास्थ्य विभाग ने डॉ. पूनम चौधरी का यमुनानगर से ट्रांसफर कर दिया और डॉ. मंजीत सिंह को यमुनानगर सिविल सर्जन का अतिरिक्त कार्यभार सौंप दिया। इस ट्रांसफर के खिलाफ डॉ. पूनम चौधरी उच्चतम न्यायालय से स्थगन आदेश ले आईं। डॉ. पूनम ने आरोप लगाया कि अदालत के आदेश लेकर जब वह सिविल सर्जन पद पर ज्वाइन करने पहुंचीं तो डॉ. मंजीत सिंह ने आदेशों की अवहेलना की।