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Yamuna Nagar News: 500 वर्ष पुराना शिव मंदिर आस्था संग इतिहास का साक्षी

Tue, 04 Aug 2026 11:52 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर Updated Tue, 04 Aug 2026 11:52 PM IST
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A 500-Year-Old Shiva Temple: A Witness to Both Faith and History
नर्मदेश्वर शिवलिंग पर नजर आ रही सर्प की आकृति। संवाद
साहिल घई
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साढौरा। कस्बे के तोरांवाला तालाब के तट पर स्थित प्राचीन शिव मंदिर श्रद्धालुओं की अटूट आस्था के साथ-साथ ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर का भी महत्वपूर्ण केंद्र बना हुआ है। मंदिर में स्थापित भूरे रंग का नर्मदेश्वर शिवलिंग अपनी विशेष धार्मिक मान्यताओं के कारण श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र है।
मंदिर की दीवारों और छतों पर बनी पंद्रहवीं सदी की भित्ति कला ऐतिहासिक विरासत को आज भी जीवंत बनाए हुए है। मंदिर जीर्णोद्धार समिति के सदस्य अवध बिहारी अग्रवाल ने बताया कि उनके पूर्वज लाला अयोध्या प्रसाद ने करीब 500 वर्ष पूर्व इस मंदिर का निर्माण कराया था।
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उनका कहना है कि जिस तोरांवाला तालाब के किनारे यह मंदिर स्थित है, उसकी खोदाई भी पांडव काल में होने की मान्यता प्रचलित है। प्राचीन लक्ष्मीनारायण मंदिर परिसर में स्थित इस शिव मंदिर का वर्ष 2007 में मौलिक भित्ति चित्रों को सुरक्षित रखते हुए जीर्णोद्धार कराया गया था।
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मंदिर के पुजारी पंडित नीरज काला ने बताया कि यहां स्थापित भूरे रंग का नर्मदेश्वर शिवलिंग नर्मदा नदी के प्राकृतिक पत्थर से निर्मित है और इसे भगवान शिव का साक्षात स्वरूप माना जाता है। मान्यताओं के अनुसार यह शिवलिंग शांति, सकारात्मक ऊर्जा और उत्तम स्वास्थ्य का प्रतीक है। इसकी उपस्थिति से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
शिवलिंग पर प्राकृतिक रूप से बनी लाल-भूरी धारियां सर्प की आकृति का आभास कराती हैं। इसकी जलधारी पूर्व दिशा की ओर है, जिसे शुभ और ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। हालांकि वर्षों से जल, दूध, शहद और बेलपत्र के अभिषेक तथा लगातार स्पर्श के कारण शिवलिंग पर कुछ स्थानों पर छोटे गड्ढे बन गए हैं।
मंदिर जीर्णोद्धार समिति के अध्यक्ष मुनीष गर्ग ने बताया कि यहां स्थापित देवी-देवताओं की भव्य प्रतिमाओं के साथ-साथ प्राचीन भित्ति चित्रों के दर्शन के लिए भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं। नगरपालिका द्वारा तोरांवाला तालाब के सुंदरीकरण का कार्य भी कराया जा रहा है, जिससे भविष्य में यह धार्मिक स्थल पर्यटन की दृष्टि से भी नई पहचान हासिल करेगा। संवाद

सांस्कृतिक पुनर्जागरण काल की धरोहर
कुरुक्षेत्र के इतिहासकार प्रो. योगेश्वर जोशी के अनुसार मंदिर में सुरक्षित भित्ति चित्रकला 15वीं-16वीं सदी के सांस्कृतिक पुनर्जागरण काल की महत्वपूर्ण धरोहर है। इन चित्रों में भगवान श्रीकृष्ण की विभिन्न लीलाएं, भगवान गणेश, ब्रह्मा, विष्णु, भक्त प्रह्लाद सहित अनेक देवी-देवताओं के मनोहारी चित्र अंकित हैं। मंदिर की ऊपरी दीवारों पर घोड़े पर सवार योद्धाओं के भित्ति चित्र भी उस दौर की उत्कृष्ट कलात्मक परंपरा की झलक प्रस्तुत करते हैं, जो इस मंदिर को धार्मिक महत्व के साथ-साथ ऐतिहासिक दृष्टि से भी विशिष्ट बनाते हैं।

नर्मदेश्वर शिवलिंग पर नजर आ रही सर्प की आकृति। संवाद

नर्मदेश्वर शिवलिंग पर नजर आ रही सर्प की आकृति। संवाद

नर्मदेश्वर शिवलिंग पर नजर आ रही सर्प की आकृति। संवाद

नर्मदेश्वर शिवलिंग पर नजर आ रही सर्प की आकृति। संवाद

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