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ट्विन सिटी ने धुएं में उड़ाए तीन करोड़
Yamuna Nagar
Updated Thu, 15 Nov 2012 12:00 PM IST
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जगाधरी। दीपावली की रात को ट्विन सिटी के लोगों ने तीन करोड़ रुपये के पटाखे बजाए। इतना ही नहीं देर रात तक पटाखे बजाकर नियमों की धज्जियां भी उड़ाई। यही वजह है कि ट्विन सिटी का प्रदूषण डेंजर जोन को भी क्रास कर गया। जगाधरी में पटाखों की बिक्री के लिए मिल्ट्री ग्राउंड में दुकानें सजाई गईं। जहां से दीवाली की रात को देर तक खरीदारी का सिलसिला जारी रहा।
शहर में पटाखे फोड़ने का सिलसिला देर रात तक जारी रहा। हालांकि प्रशासन की ओर से सभी को हिदायत दी गई थी कि वे रात को 10 बजे तक ही पटाखे चलाएं, लेकिन यह नियम दीवाली के जश्न में हवा हो गए। पटाखों के होलसेल विक्रेता राजेश कुमार ने बताया दीपावली की रात को शहर में करीब एक करोड़ रुपये के पटाखे बिके हैं। इसके अलावा लोगों ने सहारनपुर, अंबाला, करनाल व कुरुक्षेत्र से भी पटाखों की खरीददारी की है। ट्विन सिटी के लोगों ने दीपावली की रात को करीब तीन करोड़ रुपये धुएं में उड़ा दिए। डिप्टी सिविल सर्जन डा. वीपी मान का कहना है कि पटाखों से निकलने वाले धुएं में हानिकारक गैसिज होती है, जो स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक है। उन्होंने बताया कि पटाखों से जो धुआं निकलता है, उसमें सल्फर डाई आक्सीजन, कार्बन डाई आक्साइड, लेड, कॉपर, जिंक इत्यादि गैसिज होती है। जब पटाखे में विस्फोट होता है, उस समय मैटल आक्सीजन के साथ क्रिया कर आक्साइड बनाकर रिएक्ट करता है।
डेंजर जोन क्रास कर गया प्रदूषण
दीपावली की रात को ध्वनि व वायु प्रदूषण डेंजर जोन को क्रास कर गया। विशेषज्ञों का कहना है कि जब पटाखा बजता है, तो उसमें से निकलने वाली ध्वनि का स्तर 100 डेसीबल से ज्यादा तक पहुंच जाता है, जबकि ज्यादा देर तक पटाखे बजाने से हवा में पटाखों से निकलने वाली गैसिज घुल जाती है, जो सांस के जरिए हमारे शरीर में प्रवेश कर जाती है। प्रदूषण बोर्ड के एसडीओ शैलेंद्र कुमार अरोड़ा के मुताबिक दीवाली की रात को बोर्ड की टीम ने शहर में कई जगहों पर ध्वनि प्रदूषण की जांच की, जबकि एक जगह पर वायु प्रदूषण जांचा। उन्होंने बताया कि रिपोर्ट को कंपाइल करके हेड ऑफिस भेजा जाएगा, जहां पर रिपोर्ट तैयार की जाएगी। उन्होंने बताया कि पिछले साल दीपावली पर शहर में प्रदूषण का स्तर दोगुणा हो गया था। शहर में रात को 10 बजे तक एसपीएम की मात्रा 403 थी, जबकि शुद्ध हवा में यह मात्रा 200 एसपीएम होती है।
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शहर में पटाखे फोड़ने का सिलसिला देर रात तक जारी रहा। हालांकि प्रशासन की ओर से सभी को हिदायत दी गई थी कि वे रात को 10 बजे तक ही पटाखे चलाएं, लेकिन यह नियम दीवाली के जश्न में हवा हो गए। पटाखों के होलसेल विक्रेता राजेश कुमार ने बताया दीपावली की रात को शहर में करीब एक करोड़ रुपये के पटाखे बिके हैं। इसके अलावा लोगों ने सहारनपुर, अंबाला, करनाल व कुरुक्षेत्र से भी पटाखों की खरीददारी की है। ट्विन सिटी के लोगों ने दीपावली की रात को करीब तीन करोड़ रुपये धुएं में उड़ा दिए। डिप्टी सिविल सर्जन डा. वीपी मान का कहना है कि पटाखों से निकलने वाले धुएं में हानिकारक गैसिज होती है, जो स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक है। उन्होंने बताया कि पटाखों से जो धुआं निकलता है, उसमें सल्फर डाई आक्सीजन, कार्बन डाई आक्साइड, लेड, कॉपर, जिंक इत्यादि गैसिज होती है। जब पटाखे में विस्फोट होता है, उस समय मैटल आक्सीजन के साथ क्रिया कर आक्साइड बनाकर रिएक्ट करता है।
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डेंजर जोन क्रास कर गया प्रदूषण
दीपावली की रात को ध्वनि व वायु प्रदूषण डेंजर जोन को क्रास कर गया। विशेषज्ञों का कहना है कि जब पटाखा बजता है, तो उसमें से निकलने वाली ध्वनि का स्तर 100 डेसीबल से ज्यादा तक पहुंच जाता है, जबकि ज्यादा देर तक पटाखे बजाने से हवा में पटाखों से निकलने वाली गैसिज घुल जाती है, जो सांस के जरिए हमारे शरीर में प्रवेश कर जाती है। प्रदूषण बोर्ड के एसडीओ शैलेंद्र कुमार अरोड़ा के मुताबिक दीवाली की रात को बोर्ड की टीम ने शहर में कई जगहों पर ध्वनि प्रदूषण की जांच की, जबकि एक जगह पर वायु प्रदूषण जांचा। उन्होंने बताया कि रिपोर्ट को कंपाइल करके हेड ऑफिस भेजा जाएगा, जहां पर रिपोर्ट तैयार की जाएगी। उन्होंने बताया कि पिछले साल दीपावली पर शहर में प्रदूषण का स्तर दोगुणा हो गया था। शहर में रात को 10 बजे तक एसपीएम की मात्रा 403 थी, जबकि शुद्ध हवा में यह मात्रा 200 एसपीएम होती है।
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