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Yamuna Nagar News: सैर में लिली और लक्ष्मी और अन्य हथिनियों को पछाड़ रही 82 वर्ष की चंचल

Thu, 12 Dec 2024 01:19 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर Updated Thu, 12 Dec 2024 01:19 PM IST
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82 year old Chanchal is beating Lily, Lakshmi and other elephants during the walk.
सुरेश सैनी
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यमुनानगर। जिले के खंड छछरौली में बने चौधरी सुरेंद्र सिंह हाथी पुनर्वास केंद्र में रखी बूढ़ी हथिनी 82 वर्षीय चंचल सभी के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।
ये हथिनी जितनी बूढ़ी हो चुकी, उतनी ही सक्रिय भी है। अमूमन इस उम्र में आकर हाथी ठीक से चल भी नहीं पाते, वहीं सुबह-शाम की सैर की बात करें तो बूढ़ी चंचल, लिली (49), लक्ष्मी वन (62) और लक्ष्मी टू (41) हथिनियों को पछाड़ रही है।
बन संतौर क्षेत्र के अंदर जंगल में सैर के लिए बने 10 किलोमीटर के ट्रैक पर हथिनी चंचल सबसे आगे रहती है, जबकि अन्य हथिनियां बीच-बीच में रुक जाती है। महावतों की मानें तो हथिनी चंचल का अन्य हथिनियों की अपेक्षा अधिक ख्याल रखा जा रहा है। इतना नहीं बन संतौर के अंदर बने चार बड़े टब (हौद) में भी चंचल पानी के साथ अठखेलियां करती है। उल्लेखनीय है वर्ष 2008 में लगभग एक करोड़ की लागत से 50 एकड़ जमीन पर बन संतौर एलिफेंट सेंटर का निर्माण किया गया है।
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इन हथिनियों की देखरेख का जिम्मा वाइल्डलाइफ एसओएस को सौंपा गया है। वहीं हथिनियों को ठंड से बचाने के लिए विशेष आहार और तिल के तेल से मालिश की व्यवस्था की जा रही है।
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चारों हथिनियों का दैनिक मैन्यू: बूढ़ी हथिनी चंचल को 100 किलो कटी हुई घास, 250 ग्राम देसी घी, 100 ग्राम च्यवनप्राश, 500 ग्राम उबले काले चने, 15-20 किग्रा पका हुआ सांद्र, 30 किलो सब्जियां व 20 किलो फल दिए जा रहे हैं।
इसी तरह अन्य लिली, लक्ष्मी वन और लक्ष्मी टू हथिनियों को भी सावधानीपूर्वक तैयार किया गया आहार दिया जाता है, जिसमें प्रत्येक हाथी के लिए प्रतिदिन 250 किलोग्राम हरा चारा, 5 किलोग्राम फल, 15 किलोग्राम सब्जियां और 6 किलोग्राम पका हुआ चारा शामिल है।
इन सभी की डाइट पर प्रति माह तीन लाख रुपये का खर्च आता है। बता दें हथिनी चंचल को वर्ष 2008 में घरौंडा से, लक्ष्मी वन को 2013, वर्ष 2014 में लिली को सिरसा से तथा 2019 में हथिनी लक्ष्मी टू को दिल्ली सरकार के माध्यम से बन संतौर में भेजा गया था।
इसलिए बनाया गया हाथी केंद्र
वाइल्डलाइफ एसओएस के प्रबंधक आशीष ने बताया कि चौ. सुरेंद्र सिंह हाथी पुनर्वास केंद्र वन्यजीव एसओएस के सहयोग से हरियाणा सरकार द्वारा शुरू की गई एक परियोजना है।

जिनके साथ मालिकों या संचालकों व महावतों द्वारा क्रूरतापूर्ण व्यवहार किया गया हो, और ऐसे हाथी जो अवैध हिरासत में हों या जिनके पास कानूनों का उल्लंघन करते हुए अनुचित व अधूरे स्वामित्व के कागजात हों। ऐसे हाथियों को रेस्क्यू कर बचाया और जब्त कर पुनर्वास के लिए हाथी पुनर्वास केंद्र में लाया जाता है।
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