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Yamuna Nagar News: दुकानों से मिठाइयों व डेयरी उत्पादों के 50 नमूने भरे, नहीं आई रिपोर्ट
Thu, 16 Oct 2025 01:05 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Thu, 16 Oct 2025 01:05 AM IST
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अभय सिंह
जगाधरी। खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से इस बार भी मिठाइयों के नमूने देरी से लेने शुरू किए गए है। अब तक विभाग की ओर से जिलेभर के विभिन्न मिष्ठान दुकानों व डेयरी शॉप से 50 नमूने लेकर जांच के लिए चंडीगढ़ भेजे गए हैं। अक्तूबर माह में लिए गए किसी नमूने की रिपोर्ट अभी तक नहीं आई है। विभाग की कार्रवाई से दुकानदारों में तो हड़कंप है, लेकिन इसका लाभ लोगों को नहीं मिल पाएगा। चूंकि इन नमूनों की रिपोर्ट त्योहार बीतने के बाद नवंबर में आएगी। तक तक लोग यह मिठाइयां त्योहारों में इस्तेमाल कर चुके होंगे।
जानकारी के अनुसार पांच साल में विभाग की ओर से लिए गए नमूनों में से करीब 25 प्रतिशत नमूने मानकों पर खरे नहीं उतरे हैं। वहीं, जिन दुकानों, मिष्ठान व डेयरी उत्पाद विक्रेताओं के सैंपल सही नहीं थे, उनके नाम तक सार्वजनिक नहीं किए।
वहीं, पिछली बार जिनके सैंपल खरे नहीं थे, उनमें से इस बार कुछेक दुकानों पर ही सैंपलिंग की गई है। जबकि यहां पर सैंपलिंग करना प्राथमिकता बनती थी। परंतु विभाग की कार्रवाई बेहद देरी से होती है। जबकि यह सैंपलिंग त्योहारों से दो महीने पहले शुरू हो जानी चाहिए थी। अनसेफ और सब स्टैंडर्ड आने वाले नमूनों की दुकानों का नाम भी सार्वजनिक करना चाहिए था, ताकि लोग इनसे मिठाइयां खरीदते समय सतर्क रहें। इसका सबसे बड़ा कारण लैब चंडीगढ़ में होना है, जहां से प्रदेश के अन्य जिलों से भी सैंपल जांच के लिए भेजे जाते पहुंचते हैं। सीजन में चंडीगढ़ से रिपोर्ट आने में करीब एक महीना तक लग जाता है।
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जगाधरी। खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से इस बार भी मिठाइयों के नमूने देरी से लेने शुरू किए गए है। अब तक विभाग की ओर से जिलेभर के विभिन्न मिष्ठान दुकानों व डेयरी शॉप से 50 नमूने लेकर जांच के लिए चंडीगढ़ भेजे गए हैं। अक्तूबर माह में लिए गए किसी नमूने की रिपोर्ट अभी तक नहीं आई है। विभाग की कार्रवाई से दुकानदारों में तो हड़कंप है, लेकिन इसका लाभ लोगों को नहीं मिल पाएगा। चूंकि इन नमूनों की रिपोर्ट त्योहार बीतने के बाद नवंबर में आएगी। तक तक लोग यह मिठाइयां त्योहारों में इस्तेमाल कर चुके होंगे।
जानकारी के अनुसार पांच साल में विभाग की ओर से लिए गए नमूनों में से करीब 25 प्रतिशत नमूने मानकों पर खरे नहीं उतरे हैं। वहीं, जिन दुकानों, मिष्ठान व डेयरी उत्पाद विक्रेताओं के सैंपल सही नहीं थे, उनके नाम तक सार्वजनिक नहीं किए।
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वहीं, पिछली बार जिनके सैंपल खरे नहीं थे, उनमें से इस बार कुछेक दुकानों पर ही सैंपलिंग की गई है। जबकि यहां पर सैंपलिंग करना प्राथमिकता बनती थी। परंतु विभाग की कार्रवाई बेहद देरी से होती है। जबकि यह सैंपलिंग त्योहारों से दो महीने पहले शुरू हो जानी चाहिए थी। अनसेफ और सब स्टैंडर्ड आने वाले नमूनों की दुकानों का नाम भी सार्वजनिक करना चाहिए था, ताकि लोग इनसे मिठाइयां खरीदते समय सतर्क रहें। इसका सबसे बड़ा कारण लैब चंडीगढ़ में होना है, जहां से प्रदेश के अन्य जिलों से भी सैंपल जांच के लिए भेजे जाते पहुंचते हैं। सीजन में चंडीगढ़ से रिपोर्ट आने में करीब एक महीना तक लग जाता है।
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