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Yamuna Nagar News: पथराला की पटरी टूटने से 250 एकड़ फसल डूबी
Sun, 17 Aug 2025 01:47 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Sun, 17 Aug 2025 01:47 AM IST
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बरौली माजरा गांव में टूट पथराला नदी की पटरी। संवाद
- फोटो : mathura
संवाद न्यूज एजेंसी
छछरौली। बरौली माजरा में पथराला नदी की पटरी टूटने से माजरा गांव में पानी घुस गया है। बाढ़ से गांव में गलियों व घरों में जलभराव हो गया। बाढ़ से गांव में करीब 250 एकड़ फसल पानी में डूब गई। पटरी टूटने से ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। गलियों में पानी भरने से लोगों का कहीं आना-जाना मुश्किल हो गया। लोगों का कहना है कि काफी पहले अधिकारियों को पटरी को बांधने की गुहार लगाई गई थी, लेकिन किसी ने एक नहीं सुनी।
ग्रामीण इकराम खान, उदय सिंह, मुमताज, सुरेंद्र ने बताया कि करीब दो महीने पहले गांव के पास से गुजर रही पथराला नदी की पटरी टूट गई थी। जिसको लेकर प्रशासन को पटरी बनाने के लिए गुहार लगाई थी। सिंचाई विभाग की लापरवाही से पहले भी गांव में बाढ़ आई थी और उसके बाद भी विभाग ने पटरी ठीक नहीं की गई।
इस कारण से शनिवार को पथराला नदी में आई बाढ़ का पानी गांव में घुस गया। गांव के साथ लगती करीब 250 एकड़ फसल पूरी तरह से पानी में डूब गई है। ग्रामीणों ने कहा कि गांव से लगती पटरी बनवाने के लिए कई बार-बार प्रशासन से गुहार लगा रहे हैं पर उनकी कहीं पर भी कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
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बरौली माजरा के किसान बताते हैं कि करीब एक महीने पहले अचानक पटरी टूट गई थी। तब ग्रामीणों ने मिलकर अस्थायी रूप से मिट्टी डालकर पानी रोकने की कोशिश की, लेकिन बारिश और लगातार रिसाव के कारण यह टिक नहीं पाई। हालत यह है कि गांव की गलियों से खेतों तक पानी है। किसान सुरेंद्र सिंह ने बताया कि हमने फसल पर हजारों रुपये खर्च किए हैं। बीज, खाद व मजदूरी में जो खर्च किया है वह सब डूब गईं, पटरी जल्द नहीं बनी तो हमारा साल भर का मेहनताना बर्बाद हो जाएगा।
समय से पानी न निकला तो किसानों को होगा नुकसान
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार समय रहते खेतों तक पानी नहीं पहुंचा तो किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा। एक एकड़ धान की खेती में लगभग 20 से 25 हजार रुपये का खर्च आता है। पानी की कमी के चलते उत्पादन आधा रह जाए तो किसानों को प्रति एकड़ 15 हजार रुपये तक का घाटा उठाना पड़ सकता है। बरौली माजरा और आसपास के करीब सौ किसानों पर यह संकट मंडरा रहा है।
पथराला नदी की टूटी पटरी की मरम्मत के लिए स्थानीय सहित जिला प्रशासन तक गुहार लगाई जा चुकी है। इसके बाद भी पटरी की मरम्मत नहीं करवाई गई। - इसरार, सरपंच प्रतिनिधि माजरा गांव छछरौली।
जिस जगह पर पटरी टूटी है वहां किसानों व पंचायत का विवाद है। कार्य शुरू करने के लिए मजदूरों को भेजा गया था। विवाद के चलते उन्हें वापस बुलाना पड़ा था। प्रशासन के सहयोग से मरम्मत करवा दी जाएगी। - विनोद छाछिया, एक्सईएन, सिंचाई विभाग।
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छछरौली। बरौली माजरा में पथराला नदी की पटरी टूटने से माजरा गांव में पानी घुस गया है। बाढ़ से गांव में गलियों व घरों में जलभराव हो गया। बाढ़ से गांव में करीब 250 एकड़ फसल पानी में डूब गई। पटरी टूटने से ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। गलियों में पानी भरने से लोगों का कहीं आना-जाना मुश्किल हो गया। लोगों का कहना है कि काफी पहले अधिकारियों को पटरी को बांधने की गुहार लगाई गई थी, लेकिन किसी ने एक नहीं सुनी।
ग्रामीण इकराम खान, उदय सिंह, मुमताज, सुरेंद्र ने बताया कि करीब दो महीने पहले गांव के पास से गुजर रही पथराला नदी की पटरी टूट गई थी। जिसको लेकर प्रशासन को पटरी बनाने के लिए गुहार लगाई थी। सिंचाई विभाग की लापरवाही से पहले भी गांव में बाढ़ आई थी और उसके बाद भी विभाग ने पटरी ठीक नहीं की गई।
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इस कारण से शनिवार को पथराला नदी में आई बाढ़ का पानी गांव में घुस गया। गांव के साथ लगती करीब 250 एकड़ फसल पूरी तरह से पानी में डूब गई है। ग्रामीणों ने कहा कि गांव से लगती पटरी बनवाने के लिए कई बार-बार प्रशासन से गुहार लगा रहे हैं पर उनकी कहीं पर भी कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
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बरौली माजरा के किसान बताते हैं कि करीब एक महीने पहले अचानक पटरी टूट गई थी। तब ग्रामीणों ने मिलकर अस्थायी रूप से मिट्टी डालकर पानी रोकने की कोशिश की, लेकिन बारिश और लगातार रिसाव के कारण यह टिक नहीं पाई। हालत यह है कि गांव की गलियों से खेतों तक पानी है। किसान सुरेंद्र सिंह ने बताया कि हमने फसल पर हजारों रुपये खर्च किए हैं। बीज, खाद व मजदूरी में जो खर्च किया है वह सब डूब गईं, पटरी जल्द नहीं बनी तो हमारा साल भर का मेहनताना बर्बाद हो जाएगा।
समय से पानी न निकला तो किसानों को होगा नुकसान
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार समय रहते खेतों तक पानी नहीं पहुंचा तो किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा। एक एकड़ धान की खेती में लगभग 20 से 25 हजार रुपये का खर्च आता है। पानी की कमी के चलते उत्पादन आधा रह जाए तो किसानों को प्रति एकड़ 15 हजार रुपये तक का घाटा उठाना पड़ सकता है। बरौली माजरा और आसपास के करीब सौ किसानों पर यह संकट मंडरा रहा है।
पथराला नदी की टूटी पटरी की मरम्मत के लिए स्थानीय सहित जिला प्रशासन तक गुहार लगाई जा चुकी है। इसके बाद भी पटरी की मरम्मत नहीं करवाई गई। - इसरार, सरपंच प्रतिनिधि माजरा गांव छछरौली।
जिस जगह पर पटरी टूटी है वहां किसानों व पंचायत का विवाद है। कार्य शुरू करने के लिए मजदूरों को भेजा गया था। विवाद के चलते उन्हें वापस बुलाना पड़ा था। प्रशासन के सहयोग से मरम्मत करवा दी जाएगी। - विनोद छाछिया, एक्सईएन, सिंचाई विभाग।

बरौली माजरा गांव में टूट पथराला नदी की पटरी। संवाद- फोटो : mathura

बरौली माजरा गांव में टूट पथराला नदी की पटरी। संवाद- फोटो : mathura