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कनाडा की पीआर दिलवाने व वर्क परमिट लगवाने के नाम पर ठगे 18 लाख रुपये
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जगाधरी। जगाधरी के आत्मनगर निवासी दिलबाग सिंह व परिवार को कनाडा की पीआर दिलाने व उसकी साली का वर्क परमिट लगवाने नाम पर साढ़े 18 लाख रुपये ठग लिए। पीड़ित ने आरोप चंडीगढ़ निवासी गुरप्रीत सहोता व उसके परिवार के सदस्यों पर लगाया है। दिलबाग सिंह ने अपना घर बेचकर रुपये जुटाकर आरोपियों को दिए थे। आरोपी ने खुद को कनाडा एंबेसी का एजेंट बताकर उसे यकीन में लिया था, लेकिन रुपये लेने के बाद आरोपियों ने न तो कनाडा की पीआर दिलवाई और न ही उन्हें कनाडा भेजा। अब आरोपी अपनी पत्नी के साथ आस्ट्रेलिया फरार हो गए हैं। पीड़ित ने इसकी शिकायत पुलिस को दी। शहर जगाधरी पुलिस ने आरोपी, उसके पिता, पत्नी व भाई के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्जकर जांच शुरू कर दी है।
आत्मनगर निवासी दिलबाग सिंह ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि साल 2015 में उसकी मुलाकात एक मित्र के जरिए चंडीगढ़ सेक्टर 19सी निवासी गुरप्रीत सहोता से हुई थी। आरोपी गुरप्रीत सहोता ने बताया था कि वह कनाडा एंबेसी का प्रतिनिधि है। लोगों को विदेश भेजने का काम करता है। वह उसे व उसके परिवार को कनाडा भेजकर वहां की पीआर दिलवा देगा। तब आरोपी ने उसे चंडीगढ़ आने के लिए कहा था। अगस्त 2015 में वह अपनी साली अमनप्रीत कौर के साथ आरोपी गुरप्रीत के घर पहुंचा। जहां उसकी मुलाकात गुरप्रीत सहोता, उसके पिता तीर्थ सिंह, भाई रमन सिंह, पत्नी मनदीप कौर सहोता से हुई। जहां आरोपियों ने उसे, उसकी पत्नी व बच्चों को कनाडा की पीआर लेने का खर्च 13 लाख रुपये बताया। वहीं, उसकी साली के वर्क परमिट का खर्च साढ़े सात लाख रुपये बताया। उन्होंने इतनी बड़ी रकम नहीं होने की बात कही। तब आरोपी तीर्थ सिंह ने कहा था कि वह पंजाब अर्बन डेवलेपमेंट अथॉरिटी मोहाली में नौकरी करता है। वे अपना घर बेचकर रकम अदा कर सकते हैं। आरोपियों की बातों में आकर उन्होंने अपना घर बेचकर रकम अदा करने की बात कही। तब उनकी अंतिम बात साढ़े 18 लाख रुपये में हो गई। तब आरोपी गुरप्रीत सिंह के भाई रमन सहोता ने साढ़े छह लाख रुपये अग्रिम राशि के रूप में देने की मांग की। दो सितंबर 2015 को आरोपी रमन सहोता उसके घर रूपनगर कॉलोनी में आया। जहां उसने आरोपी रमन को 6 लाख रुपये अपने दस्तावेजों की फोटो प्रतियां व असली पासपोर्ट दिए। आरोपी ने उनसे कुछ फार्मों पर हस्ताक्षर करवाए। इसके बाद रकम तय अनुसार 11 सितंबर 2015 को 2.50 लाख रुपये, 19 सितंबर 2015 को 1.15 लाख रुपये, दो नवंबर 2015 को एक लाख रुपये, 24 नवंबर 2015 को 2.50 लाख रुपये, एक दिसंबर 2015 को 2.50 लाख रुपये, 20 फरवरी 2016 को फिर 2.50 लाख रुपये आरोपियों को खाते में जमा करवाए थे। यह रकम उसने अपना घर बेचकर जुटाई थी। इसके बाद आरोपी ने पहली टिकट आठ अगस्त 2016 को उसकी साली अमनप्रीत कौर की बुक करवाई। लेकिन आरोपी ने यह कहकर उसकी टिकट रद्द करवा दी कि दस्तावेजों में कुछ कमी है। इसके बाद 16 अगस्त को फिर टिकट बुक करवाकर दस्तावेजों में कमी होने की बात कहकर रद्द करवा दी। आरोपी पर शक होने पर उन्होंने जब कनाडा एंबेसी जाकर दस्तावेजों की जांच करवाई तो वह फर्जी निकले। आरोपियों ने उनके दस्तावेज फर्जी तैयार करके दिए थे। जांच में पता चला कि गुरप्रीत सहोता कनाडा एंबेसी का एजेंट भी नहीं है, उसने फर्जी आईडी दिखाई थी। इसके बाद आरोपी गुरप्रीत सहोता व उसकी पत्नी मनदीप कौर ऑस्ट्रेलिया फरार हो गए। जब उन्होंने आरोपियों से अपने रुपये वापस मांगे तो आरोपियों ने उन्हें साढ़े 18 लाख रुपये का चैक दिया। शहर जगाधरी पुलिस ने सभी आरोपियों पर धोखाधड़ी, आपराधिक षड्यंत्र, जान से मारने की धमकी देने सहित अन्य धाराओं में केस दर्ज कर लिया है। जांच अधिकारी एसआई समेश पाल का कहना है कि मामले की जांच कर रहे हैं।
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आत्मनगर निवासी दिलबाग सिंह ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि साल 2015 में उसकी मुलाकात एक मित्र के जरिए चंडीगढ़ सेक्टर 19सी निवासी गुरप्रीत सहोता से हुई थी। आरोपी गुरप्रीत सहोता ने बताया था कि वह कनाडा एंबेसी का प्रतिनिधि है। लोगों को विदेश भेजने का काम करता है। वह उसे व उसके परिवार को कनाडा भेजकर वहां की पीआर दिलवा देगा। तब आरोपी ने उसे चंडीगढ़ आने के लिए कहा था। अगस्त 2015 में वह अपनी साली अमनप्रीत कौर के साथ आरोपी गुरप्रीत के घर पहुंचा। जहां उसकी मुलाकात गुरप्रीत सहोता, उसके पिता तीर्थ सिंह, भाई रमन सिंह, पत्नी मनदीप कौर सहोता से हुई। जहां आरोपियों ने उसे, उसकी पत्नी व बच्चों को कनाडा की पीआर लेने का खर्च 13 लाख रुपये बताया। वहीं, उसकी साली के वर्क परमिट का खर्च साढ़े सात लाख रुपये बताया। उन्होंने इतनी बड़ी रकम नहीं होने की बात कही। तब आरोपी तीर्थ सिंह ने कहा था कि वह पंजाब अर्बन डेवलेपमेंट अथॉरिटी मोहाली में नौकरी करता है। वे अपना घर बेचकर रकम अदा कर सकते हैं। आरोपियों की बातों में आकर उन्होंने अपना घर बेचकर रकम अदा करने की बात कही। तब उनकी अंतिम बात साढ़े 18 लाख रुपये में हो गई। तब आरोपी गुरप्रीत सिंह के भाई रमन सहोता ने साढ़े छह लाख रुपये अग्रिम राशि के रूप में देने की मांग की। दो सितंबर 2015 को आरोपी रमन सहोता उसके घर रूपनगर कॉलोनी में आया। जहां उसने आरोपी रमन को 6 लाख रुपये अपने दस्तावेजों की फोटो प्रतियां व असली पासपोर्ट दिए। आरोपी ने उनसे कुछ फार्मों पर हस्ताक्षर करवाए। इसके बाद रकम तय अनुसार 11 सितंबर 2015 को 2.50 लाख रुपये, 19 सितंबर 2015 को 1.15 लाख रुपये, दो नवंबर 2015 को एक लाख रुपये, 24 नवंबर 2015 को 2.50 लाख रुपये, एक दिसंबर 2015 को 2.50 लाख रुपये, 20 फरवरी 2016 को फिर 2.50 लाख रुपये आरोपियों को खाते में जमा करवाए थे। यह रकम उसने अपना घर बेचकर जुटाई थी। इसके बाद आरोपी ने पहली टिकट आठ अगस्त 2016 को उसकी साली अमनप्रीत कौर की बुक करवाई। लेकिन आरोपी ने यह कहकर उसकी टिकट रद्द करवा दी कि दस्तावेजों में कुछ कमी है। इसके बाद 16 अगस्त को फिर टिकट बुक करवाकर दस्तावेजों में कमी होने की बात कहकर रद्द करवा दी। आरोपी पर शक होने पर उन्होंने जब कनाडा एंबेसी जाकर दस्तावेजों की जांच करवाई तो वह फर्जी निकले। आरोपियों ने उनके दस्तावेज फर्जी तैयार करके दिए थे। जांच में पता चला कि गुरप्रीत सहोता कनाडा एंबेसी का एजेंट भी नहीं है, उसने फर्जी आईडी दिखाई थी। इसके बाद आरोपी गुरप्रीत सहोता व उसकी पत्नी मनदीप कौर ऑस्ट्रेलिया फरार हो गए। जब उन्होंने आरोपियों से अपने रुपये वापस मांगे तो आरोपियों ने उन्हें साढ़े 18 लाख रुपये का चैक दिया। शहर जगाधरी पुलिस ने सभी आरोपियों पर धोखाधड़ी, आपराधिक षड्यंत्र, जान से मारने की धमकी देने सहित अन्य धाराओं में केस दर्ज कर लिया है। जांच अधिकारी एसआई समेश पाल का कहना है कि मामले की जांच कर रहे हैं।
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