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बिन ठोस कारण की चेन पुलिंग, तो मिल नहीं पाएगी सरकारी नौकरी
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अगर अब किसी ने बिन ठोस कारण के ट्रेन की चेन खींची तो उसका करेक्टर खराब हो जाएगा। ऐसा करने वाला कोई विद्यार्थी या नौकरी का आवेदक होगा, तो उसे सरकारी नौकरी नहीं मिल पाएगी। यही इतना नहीं रेलवे के अन्य मामूली समझे जाने वाले अपराधों में भी अगर किसी का नाम आता है तो उसका करेक्टर भी खराब हो सकता है। जी हां, रेलवे सुरक्षा बल ने ऐसे अपराधों में कमी लाने के लिए एक नया तरीका अपनाया है। इसके लिए रेलवे सुरक्षा बल के सभी थाने आनलाइन किए जा रहे हैं। आनलाइन होने के साथ ही इसे उस जिले के सभी थानों से लिंक किया जा रहा है। जिसके बाद आरपीएफ थाने में दर्ज होने वाले मुकदमों के आरोपियों की जानकारी उनके गृह क्षेत्र के थाने में पहुंच जाएगी। ऐसे में विद्यार्थी या नौकरी आवेदन बिना ठोस कारण के चेन पुलिंग, लाइन क्रॉसिंग, ट्रेन के गेट पर सफर करने जैसे अपराध में पकड़ा जाता है तो सरकारी नौकरी के लिए उनके गृह क्षेत्र थाने से बनने वाला उनका चरित्र प्रमाण पत्र पर इसका असर पड़ेगा। जिससे सरकारी नौकरी पाने में अड़चन आएंगी।
क्या है जंजीर खींचना
रेलवे ने ट्रेन में सफर करने वालों को आपातकाल में रेलगाड़ी रोकने के लिए जंजीर की सुविधा दी गई है। पैसेंजर से लेकर राजधानी ट्रेनों में यह चेन हर बोगी में दो स्थानों पर दी गई होती है। आपातकाल में यात्री यह चेन खींच कर ट्रेन रोक सकते हैं। चेन एक इमरजेंसी ब्रेक की तरह काम करती है, जिससे दस से पंद्रह सेकेंड में ट्रेन रुक जाती है।
जंजीर खींचना पर यह है प्रावधान
आपातकाल में चेन पुलिंग करना अपराध की श्रेणी में नहीं आता है। लेकिन बिना किसी ठोस कारण के या सिर्फ अपने निजी स्वार्थ के लिए किया जाए तो यह अपराध माना जाता है। जिस पर आरपीएफ रेलवे एक्ट की धारा 141 के तहत केस दर्ज करती है। इसमें दोषी को अधिकतम एक हजार रुपये जुर्माना या एक साल की कैद का प्रावधान है। लेकिन अधिकांश मामलों में मजिस्ट्रेट दोषी को पांच रुपये का जुर्माना कर छोड़ देते हैं। सिर्फ एक प्रतिशत ऐसे चांस होते है, जब दोषी जुर्माना न दे सके। ऐसे में उसे ज्यादा से एक माह की जेल हो जाती है।
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जंजीर खींचने से पटरी से उतर सकती है ट्रेन
रेलगाड़ी में जंजीर की सुविधा ट्रेन रोकने के लिए ही दी गई है। लेकिन यह सिर्फ इमरजेंसी में ही प्रयोग की जा सकती है। मेडिकल इमरजेंसी, सहयात्री छूटने पर, लूट, डकैती व ट्रेन में आग, सामान छूटने पर या ऐसा कोई कारण जिससे किसी भी यात्री के जान माल का नुकसान हो रहा हो। ऐसी परिस्थिति में जंजीर खींची जा सकती है। इसे अपराध की श्रेणी में इसलिए रखा गया है, चूंकि यह इमरजेंसी ब्रेक चेन होती है। जिसके खींचने से चंद सेकेंड में ट्रेन रुक जाती है। इसे आर्थिक हानि तो होती ही, साथ रेलगाड़ी के पटरी से उतरने का भी खतरा होता है।
पांच माह में 38 केस दर्ज, गए साल हुए 206
यमुनानगर-जगाधरी रेलवे स्टेशन पर इस वर्ष मई के अंत तक चेन पुलिंग के 38 केस दर्ज किए जा चुके हैं। जिनमें से 26 ट्रेस कर लिए गए हैं और 12 में जांच चल रही है। जबकि पिछले साल 206 केस दर्ज किए गए थे। जिसमें से 188 केस ट्रेस हो गए हैं। जबकि 18 की जांच जारी है। वहीं अब तक लाइन क्रॉसिंग के 307 केस दर्ज किए जा चुके हैं।
आरपीएफ के बड़े थाने ऑन लाइन हो चुके हैं। जबकि अन्य थानों पर काम किया जा रहा है। यमुनानगर-जगाधरी पहले चौकी थी। हाल ही में इसे थाने का दर्जा प्राप्त हुआ है। चौकी को थाना बनाने में कई बदलाव करवाने होते हैं, उन पर काम चल रहा है। थाना का ढ़ांचा पूरा होती ही या भी आनलाइन हो जाएगा।
रमेश कुमार, प्रभारी, थाना रेलवे सुरक्षा बल।
क्या है जंजीर खींचना
रेलवे ने ट्रेन में सफर करने वालों को आपातकाल में रेलगाड़ी रोकने के लिए जंजीर की सुविधा दी गई है। पैसेंजर से लेकर राजधानी ट्रेनों में यह चेन हर बोगी में दो स्थानों पर दी गई होती है। आपातकाल में यात्री यह चेन खींच कर ट्रेन रोक सकते हैं। चेन एक इमरजेंसी ब्रेक की तरह काम करती है, जिससे दस से पंद्रह सेकेंड में ट्रेन रुक जाती है।
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जंजीर खींचना पर यह है प्रावधान
आपातकाल में चेन पुलिंग करना अपराध की श्रेणी में नहीं आता है। लेकिन बिना किसी ठोस कारण के या सिर्फ अपने निजी स्वार्थ के लिए किया जाए तो यह अपराध माना जाता है। जिस पर आरपीएफ रेलवे एक्ट की धारा 141 के तहत केस दर्ज करती है। इसमें दोषी को अधिकतम एक हजार रुपये जुर्माना या एक साल की कैद का प्रावधान है। लेकिन अधिकांश मामलों में मजिस्ट्रेट दोषी को पांच रुपये का जुर्माना कर छोड़ देते हैं। सिर्फ एक प्रतिशत ऐसे चांस होते है, जब दोषी जुर्माना न दे सके। ऐसे में उसे ज्यादा से एक माह की जेल हो जाती है।
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जंजीर खींचने से पटरी से उतर सकती है ट्रेन
रेलगाड़ी में जंजीर की सुविधा ट्रेन रोकने के लिए ही दी गई है। लेकिन यह सिर्फ इमरजेंसी में ही प्रयोग की जा सकती है। मेडिकल इमरजेंसी, सहयात्री छूटने पर, लूट, डकैती व ट्रेन में आग, सामान छूटने पर या ऐसा कोई कारण जिससे किसी भी यात्री के जान माल का नुकसान हो रहा हो। ऐसी परिस्थिति में जंजीर खींची जा सकती है। इसे अपराध की श्रेणी में इसलिए रखा गया है, चूंकि यह इमरजेंसी ब्रेक चेन होती है। जिसके खींचने से चंद सेकेंड में ट्रेन रुक जाती है। इसे आर्थिक हानि तो होती ही, साथ रेलगाड़ी के पटरी से उतरने का भी खतरा होता है।
पांच माह में 38 केस दर्ज, गए साल हुए 206
यमुनानगर-जगाधरी रेलवे स्टेशन पर इस वर्ष मई के अंत तक चेन पुलिंग के 38 केस दर्ज किए जा चुके हैं। जिनमें से 26 ट्रेस कर लिए गए हैं और 12 में जांच चल रही है। जबकि पिछले साल 206 केस दर्ज किए गए थे। जिसमें से 188 केस ट्रेस हो गए हैं। जबकि 18 की जांच जारी है। वहीं अब तक लाइन क्रॉसिंग के 307 केस दर्ज किए जा चुके हैं।
आरपीएफ के बड़े थाने ऑन लाइन हो चुके हैं। जबकि अन्य थानों पर काम किया जा रहा है। यमुनानगर-जगाधरी पहले चौकी थी। हाल ही में इसे थाने का दर्जा प्राप्त हुआ है। चौकी को थाना बनाने में कई बदलाव करवाने होते हैं, उन पर काम चल रहा है। थाना का ढ़ांचा पूरा होती ही या भी आनलाइन हो जाएगा।
रमेश कुमार, प्रभारी, थाना रेलवे सुरक्षा बल।