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आठ दिन से धरने पर बैठे किसानों की बिगड़ने लगी तबीयत, छह को महापंचायत

Tue, 04 Jun 2019 12:29 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Tue, 04 Jun 2019 12:29 AM IST
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आठ दिन से धरने पर बैठे किसानों की बिगड़ने लगी तबीयत, छह को महापंचायत
44 डिग्री के तापमान के बीच हाईवे पर आठ दिन से धरने पर बैठे किसानों की अब तबीयत बिगड़ने लगी है। लू और गर्मी ने किसानों को चपेट में लेना शुरू कर दिया है। गांव गधौला निवासी 65 वर्षीय बलदेव सिंह रोजाना की तरह सोमवार को धरने में शामिल हुएा। इसी दौरान उसकी अचानक तबीयत बिगड़ने लगी और वह बेसुध होकर गिर पड़े। उनकी ये हालत देखकर दूसरे किसानों में हड़कंप मच गया। किसानों ने तुरंत डीसी ऑफिस फोन कर एंबुलेंस मंगवाई और उन्हें जगाधरी अस्पताल में भर्ती करवाया, जहां उनका इलाज चल रहा है। बताया गया है कि किसान बलदेव की भी चार एकड़ भूमि हाईवे के दौरान अधिग्रहित की गई थी। वह भी अपने बढ़े हुए मुआवजे की मांग कर रहे हैं।
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महापंचायत में तीन दिन शेष
बता दें 27 मई को किसान अपना बढ़ा हुआ मुआवजा देने की मांग को लेकर एनएच-344 के कैल कलानौर बाईपास पर धरने पर बैठ गए थे। इस दौरान भाकियू प्रदेशाध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी भी मौजूद रहे। उन्होंने मौके पर प्रशासनिक अधिकारियों को मसले को हल करवाने के लिए छह जून तक समय दिया। इसके बाद महापंचायत का फैसला लिया गया। वहीं महापंचायत में तीन दिन शेष हैं, परंतु अभी तक सरकार व प्रशासन की तरफ से कोई जवाब नहीं आया है। किसानों ने भी महापंचायत को लेकर पूरी रणनीति तैयार कर ली है।
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यह है पूरा मामला
भाकियू प्रदेशाध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी व प्रदेश सचिव हरपाल सुढल, बलकार सिंह व जसविंद्र सिंह आदि ने बताया कि कैल बाइपास के निर्माण के लिए जिले के करीब 250 किसानों की 427 एकड़ जमीन अधिग्रहित की गई थी। साल 2013 में सरकान ने जमीन के हिसाब से किसानों को प्रति एकड़ 25 लाख, 30 लाख तथा 35 लाख रुपए का मुआवजा दिया था। लेकिन यह मुआवजा किसानों को नाकाफी लगा। जिस पर उन्होंने उचित मुआवजे की मांग की। इसके बाद आर्बिट्रेशन ने 16 अक्तूबर 2018 को किसानों को बढ़ा हुआ देने का फैसला किया। इसके तहत प्रति एकड़ 42 लाख रुपये मुआवजा देने का निर्णय था। कानूनी तौर पर सात दिन में पैसे देने का नियम है। परंतु फैसले के छह माह बाद भी किसानों को उनका बढ़ा हुआ मुआवजा नहीं दिया गया है।
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