{"_id":"5ccf3986bdec22073073d0f4","slug":"155708461119-yamuna-nagar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"बाढ़ बचाव कार्य में छोटे पत्थर व जंग लगी तार इस्तेमाल करने का आरोप","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बाढ़ बचाव कार्य में छोटे पत्थर व जंग लगी तार इस्तेमाल करने का आरोप
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जठलाना। जंग लगे तार व छोटे आकार के पत्थर से यमुना किनारे स्टड बनाकर भूमि कटाव व बाढ़ के खतरे को रोकने का प्रयास किया जा रहा है। जंग लगे तार जहां कुछ दिनों में खराब हो जाएंगे, वहीं हल्के पत्थर तेज बहाव में बह जाएंगे। हर साल इस काम में लापरवाही बरती जाती है, जिसका खामियाजा यहां के लोगों को भुगतना पड़ता है। ये आरोप लगाते हुए ग्रामीणों ने डीसी से यमुनानदी के किनारों पर हो रहे कार्यों की जांच करवाने की मांग की है।
क्षेत्रवासी अमरजीत सिंह, शुभम, शिव कुमार, विकास, सतनाम सिंह, सर्वजीत सिंह व प्रगट सिंह आदि ने बताया कि प्रशासन की ओर से हर वर्ष यमुना नदी के किनारों पर ठोकर लगाने व पैचिंग का कार्य किया जाता है। जिस पर काफी मोटी रकम खर्च की जाती है। ठोकर लगाने के लिए जिस तार का प्रयोग ठेकेदार कर रहा है, उसपर अभी से जंग लगना शुरू हो गया है। वहीं पत्थर का आकार को लेकर भी ग्रामीण संतुष्ट नहीं हैं। पत्थर का आकार काफी छोटा है, ठोकर में उनके बह जाने से एक बार फिर से भूमि कटाव की समस्या पैदा होगी और ग्रामीणों को इसका नुकसान उठाना पड़ेगा। लोगों ने कहा कि इस कार्य की जांच होनी चाहिए। मामले को लेकर जब सिंचाई विभाग के एक्सईएन विनोद कुमार से बात करनी चाही तो उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया।
यह है नियम
आरटीआई एक्टिविस्ट अधिवक्ता वरयाम सिंह ने बताया कि स्टड व पैंचिंग करने के लिए प्रशासन ने नियम निर्धारित किए हैं। पैचिंग कार्य में जंगरोधक तार का प्रयोग होना चाहिए। घाट की भौगोलिक स्थिति का मुआयना करने के बाद स्टड बनाने के लिए मैप भी तैयार किया जाता है। इसमें स्टड की लंबाई, चौड़ाई, ऊंचाई व स्थान निर्धारित किया जाता है। यहां तक कि पत्थर के वजन को लेकर भी नियम निर्धारित है, जिसके अनुसार कम से कम पत्थर 18 किलोग्राम का होना चाहिए।
विज्ञापन
-मेरे पास इस तरह की कोई शिकायत नहीं आई है। अगर ऐसा कुछ मामला है तो घाट का दौरा करेंगे। काम में किसी तरह की कोताही बर्दास्त नहीं की जाएगी। -कंवर सिंह, एसडीएम
विज्ञापन
क्षेत्रवासी अमरजीत सिंह, शुभम, शिव कुमार, विकास, सतनाम सिंह, सर्वजीत सिंह व प्रगट सिंह आदि ने बताया कि प्रशासन की ओर से हर वर्ष यमुना नदी के किनारों पर ठोकर लगाने व पैचिंग का कार्य किया जाता है। जिस पर काफी मोटी रकम खर्च की जाती है। ठोकर लगाने के लिए जिस तार का प्रयोग ठेकेदार कर रहा है, उसपर अभी से जंग लगना शुरू हो गया है। वहीं पत्थर का आकार को लेकर भी ग्रामीण संतुष्ट नहीं हैं। पत्थर का आकार काफी छोटा है, ठोकर में उनके बह जाने से एक बार फिर से भूमि कटाव की समस्या पैदा होगी और ग्रामीणों को इसका नुकसान उठाना पड़ेगा। लोगों ने कहा कि इस कार्य की जांच होनी चाहिए। मामले को लेकर जब सिंचाई विभाग के एक्सईएन विनोद कुमार से बात करनी चाही तो उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया।
विज्ञापन
यह है नियम
आरटीआई एक्टिविस्ट अधिवक्ता वरयाम सिंह ने बताया कि स्टड व पैंचिंग करने के लिए प्रशासन ने नियम निर्धारित किए हैं। पैचिंग कार्य में जंगरोधक तार का प्रयोग होना चाहिए। घाट की भौगोलिक स्थिति का मुआयना करने के बाद स्टड बनाने के लिए मैप भी तैयार किया जाता है। इसमें स्टड की लंबाई, चौड़ाई, ऊंचाई व स्थान निर्धारित किया जाता है। यहां तक कि पत्थर के वजन को लेकर भी नियम निर्धारित है, जिसके अनुसार कम से कम पत्थर 18 किलोग्राम का होना चाहिए।
विज्ञापन
-मेरे पास इस तरह की कोई शिकायत नहीं आई है। अगर ऐसा कुछ मामला है तो घाट का दौरा करेंगे। काम में किसी तरह की कोताही बर्दास्त नहीं की जाएगी। -कंवर सिंह, एसडीएम