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सीएम विंडो में पहुंचा सिविल अस्पताल में हुई तीन माह के बच्चे की मौत का मामला, डॉक्टरों पर कार्रवाई की रखी मांग
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सीएम विंडो में पहुंचा सिविल अस्पताल में हुई तीन माह के बच्चे की मौत का मामला, डॉक्टरों पर कार्रवाई की रखी मांग
आठ जनवरी को अस्पताल में बुखार से पीड़ित तीन माह के बच्चे की मौत का मामला
अधिकारी बोले, पांच डॉक्टरों का पैनल कर रहा जांच, पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने पर होगी कार्रवाई
अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर। सिविल अस्पताल में बुखार से पीड़ित तीन माह के मासूम की मौत होने में डॉक्टर व स्टाफ पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए परिजन मंगलवार को लघु सचिवालय पहुंचे। यहां उन्होंने सीएम विंडो पर सीएम मनोहर लाल के नाम शिकायत दी। जिसमें उन्होंने सिविल अस्पताल के नर्सरी वार्ड के डॉक्टर व स्टाफ पर कार्रवाई करने की मांग की। उधर, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार अस्पताल में हुए बच्चे की मौत के मामले में पांच डॉक्टरों का पैनल जांच कर रहा है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने पर पैनल अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा। जिसके बाद ही मामले में लापरवाही हुई या नहीं। यदि लापरवाही हुई तो किसने की। इसका खुलासा होगा। इसके बाद ही आगामी कार्रवाई की जाएगी।
बॉक्स
बच्चे की मां ने सीएम विंडो में ये दी शिकायत :
सीएम विंडो में दी शिकायत में महादेव कॉलोनी निवासी सुमन ने बताया कि उसके पास तीन महीने का एक लड़का शबी था। सात जनवरी को उसे बुखार हो गया था। जिसको वह सिविल अस्पताल यमुनानगर में लेकर आई थी। जहां पर उसके बच्चे को डॉ. ने दाखिल कर लिया था। रात को करीब दस बजे उसके बच्चे को बीमार हालत में ही उसे बाहर दे दिया। जिससे उसके बच्चे की हालत ज्यादा खराब हो गई। उसने पूरे स्टाफ के आगे बार बार हाथ जोड़े और कहा कि मेरे बच्चे की तबीयत और खराब हो गई है। डॉक्टर को तुरंत बुलाया जाए। लेकिन मौजूदा स्टाफ हीटर लगाकर सो रहा था और उसके धमका दिया कि डॉक्टर साहब कल आएंगे। सुबह हमसे बात करना। इसके बाद वह बच्चे को बरामदे में लेकर फर्श पर पड़ी रही। सुबह साढ़े छह बजे उसके बच्चे ने दम तोड़ दिया। आरोप है कि डॉक्टर व स्टाफ की लापरवाही के कारण उनके बच्चे की मौत हुई है। उन्होंने इस बारे में सीएमओ ऑफिस, सिटी यमुनानगर पुलिस में शिकायत दी। लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
बॉक्स
ये था मामला :
महादेव कॉलोनी निवासी नरेंद्र कुमार की पत्नी सुमन के बेटे शबी को दो दिन से बुखार आ रहा था। सात जनवरी सुबह बुखार ज्यादा होने पर वे उसे सिविल अस्पताल यमुनानगर लेकर आए। डॉक्टर की जांच में उसे 103 डिग्री बुखार आया। सुबह 11 बजे उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। बच्चे की मां सुमन के अनुसार उसके बच्चे को चाइल्ड केयर नर्सरी में रखा गया था। रात साढ़े दस बजे एक स्टाफ सदस्या बच्चे को बाहर लेकर आई। उसका बच्चा रो रहा था। सुमन का आरोप था कि नर्स ने उन्हें बच्चा थमाते हुए कहा कि आपका बच्चा रो रहा है, ना ये सो रहा है और ना ही हमें सोने दे रहा। बच्चे को उन्हें देकर नर्स अंदर चली गई और दरवाजा बंद कर दिया। उसने बच्चे को सीने से लगाया तो बुखार में उसका बेटा तड़प रहा था। उसने स्टाफ के सामने हाथ जोड़कर बच्चे को उपचार देने की गुहार लगाई। लेकिन किसी ने उसकी नहीं सुनी। इसके बाद वह रातभर बरामदे में बच्चे को लेकर फर्श पर लेटी रही। सुबह साढ़े छह बजे उसके बच्चे ने दम तोड़ दिया। परिजनों ने आरोप लगाया कि बच्चे की मौत होने के बाद नर्स आई और बच्चे को अंदर ले गई। उसकी मौत के बाद परिजनों ने सीएमओ ऑफिस के बाहर हंगामा किया था। सीएमओ डा. कुलदीप ने उन्हें डॉक्टरों के पैनल की जांच रिपोर्ट आने के बाद आगामी कार्रवाई करने का आश्वासन दिया था।
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वर्जन
बच्चे की मौत के मामले में पांच डॉक्टरों का पैनल जांच कर रहा है। हर एंगल से मामले की जांच की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद पैनल अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा। इसके बाद आगामी कार्रवाई की जाएगी।
- डा. विजय दहिया, चिकित्सा अधीक्षक।
आठ जनवरी को अस्पताल में बुखार से पीड़ित तीन माह के बच्चे की मौत का मामला
अधिकारी बोले, पांच डॉक्टरों का पैनल कर रहा जांच, पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने पर होगी कार्रवाई
अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर। सिविल अस्पताल में बुखार से पीड़ित तीन माह के मासूम की मौत होने में डॉक्टर व स्टाफ पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए परिजन मंगलवार को लघु सचिवालय पहुंचे। यहां उन्होंने सीएम विंडो पर सीएम मनोहर लाल के नाम शिकायत दी। जिसमें उन्होंने सिविल अस्पताल के नर्सरी वार्ड के डॉक्टर व स्टाफ पर कार्रवाई करने की मांग की। उधर, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार अस्पताल में हुए बच्चे की मौत के मामले में पांच डॉक्टरों का पैनल जांच कर रहा है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने पर पैनल अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा। जिसके बाद ही मामले में लापरवाही हुई या नहीं। यदि लापरवाही हुई तो किसने की। इसका खुलासा होगा। इसके बाद ही आगामी कार्रवाई की जाएगी।
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बच्चे की मां ने सीएम विंडो में ये दी शिकायत :
सीएम विंडो में दी शिकायत में महादेव कॉलोनी निवासी सुमन ने बताया कि उसके पास तीन महीने का एक लड़का शबी था। सात जनवरी को उसे बुखार हो गया था। जिसको वह सिविल अस्पताल यमुनानगर में लेकर आई थी। जहां पर उसके बच्चे को डॉ. ने दाखिल कर लिया था। रात को करीब दस बजे उसके बच्चे को बीमार हालत में ही उसे बाहर दे दिया। जिससे उसके बच्चे की हालत ज्यादा खराब हो गई। उसने पूरे स्टाफ के आगे बार बार हाथ जोड़े और कहा कि मेरे बच्चे की तबीयत और खराब हो गई है। डॉक्टर को तुरंत बुलाया जाए। लेकिन मौजूदा स्टाफ हीटर लगाकर सो रहा था और उसके धमका दिया कि डॉक्टर साहब कल आएंगे। सुबह हमसे बात करना। इसके बाद वह बच्चे को बरामदे में लेकर फर्श पर पड़ी रही। सुबह साढ़े छह बजे उसके बच्चे ने दम तोड़ दिया। आरोप है कि डॉक्टर व स्टाफ की लापरवाही के कारण उनके बच्चे की मौत हुई है। उन्होंने इस बारे में सीएमओ ऑफिस, सिटी यमुनानगर पुलिस में शिकायत दी। लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
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ये था मामला :
महादेव कॉलोनी निवासी नरेंद्र कुमार की पत्नी सुमन के बेटे शबी को दो दिन से बुखार आ रहा था। सात जनवरी सुबह बुखार ज्यादा होने पर वे उसे सिविल अस्पताल यमुनानगर लेकर आए। डॉक्टर की जांच में उसे 103 डिग्री बुखार आया। सुबह 11 बजे उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। बच्चे की मां सुमन के अनुसार उसके बच्चे को चाइल्ड केयर नर्सरी में रखा गया था। रात साढ़े दस बजे एक स्टाफ सदस्या बच्चे को बाहर लेकर आई। उसका बच्चा रो रहा था। सुमन का आरोप था कि नर्स ने उन्हें बच्चा थमाते हुए कहा कि आपका बच्चा रो रहा है, ना ये सो रहा है और ना ही हमें सोने दे रहा। बच्चे को उन्हें देकर नर्स अंदर चली गई और दरवाजा बंद कर दिया। उसने बच्चे को सीने से लगाया तो बुखार में उसका बेटा तड़प रहा था। उसने स्टाफ के सामने हाथ जोड़कर बच्चे को उपचार देने की गुहार लगाई। लेकिन किसी ने उसकी नहीं सुनी। इसके बाद वह रातभर बरामदे में बच्चे को लेकर फर्श पर लेटी रही। सुबह साढ़े छह बजे उसके बच्चे ने दम तोड़ दिया। परिजनों ने आरोप लगाया कि बच्चे की मौत होने के बाद नर्स आई और बच्चे को अंदर ले गई। उसकी मौत के बाद परिजनों ने सीएमओ ऑफिस के बाहर हंगामा किया था। सीएमओ डा. कुलदीप ने उन्हें डॉक्टरों के पैनल की जांच रिपोर्ट आने के बाद आगामी कार्रवाई करने का आश्वासन दिया था।
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- डा. विजय दहिया, चिकित्सा अधीक्षक।