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अमर उजाला लाइव-बसों के लिए दिनभर मारामारी, मुश्किलों भरें सफर में फंसी पब्लिक बनी बेचारी
Updated Mon, 22 Oct 2018 11:35 PM IST
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बसों के लिए दिनभर मारामारी, मुश्किल भरे सफर में फंसी पब्लिक बनी बेचारी
नए ड्राइवर कंडक्टर भर्ती कर करीब 40 बसों को विभिन्न रूटों पर निकाला गया, फिर भी इंतजाम नाकाफी
अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर। लगातार सात दिन से चल रही रोडवेज हड़ताल से पब्लिक परेशान है। सोमवार को नए ड्राइवर कंडक्टर भर्ती कर यमुनानगर से करीब 40 बसों को विभिन्न रूटों पर निकाला गया। जो न केवल नाकाफी साबित हुई, बल्कि इन बसों ने यात्रियों की परेशानी और बढ़ा दी। बसों के इंतजार में कई कई घंटे बैठा रहना पड़ा, जो बसें आई वह फुल थीं या फिर उनमें नए ड्राइवर थे, जो खतरनाक ड्राइविंग कर रहे थे। अमर उजाला टीम ने महत्वपूर्ण रूटों पर सफर कर यात्रियों की परेशानी का जायजा लिया तो स्थिति भयंकर नजर आई।
रूट नंबर एक-दिल्ली
रविवार को दोपहर दो बजे बहादुरगढ़ से सफर शुरू किया। यहां प्राइवेट बस में जीटी करनाल बाईपास तक दो घंटे लगे। बाईपास पर सैकड़ों की संख्या में यात्री बसों का इंतजार करने नजर आए। आधा घंटे इंतजार के बाद पंजाब रोडवेज की बस आई, लेकिन अधिकतर यात्री उसमें चढ़ ही नहीं सके। पंद्रह मिनट बाद अक्सर खाली चलने वाली हिमाचल रोडवेज की बस में भी स्थिति ऐसी ही थी। कंडक्टर ने आवाज लगाकर कहा कि अंबाला से पहले कोई सवारी बस में न चढ़े। आवाज सुनकर अधिकतर यात्री पीछे हट गए। दो बच्चों के साथ करनाल जाने के लिए इंतजार कर रही पूजा ने बताया कि वह दो घंटे से खड़ी है, लेकिन बस में चढ़ ही नहीं पा रही। यहां एक सुखद करने वाला सीन जरूर दिखाई दिया। पुलिस का एक हेडकांस्टेबल प्राइवेट वाहनों को रुकवा कर उनमें सवारियों को बैठाते दिखाई दिया।
पानीपत तक इको मैक्सी कैब
एक इको मैक्सी कैब वहां रुकी और पानीपत तक 100 रुपये प्रति सवारी लेकर जाने को राजी हुआ। किसी तरह वैन में बैठ तो गए, लेकिन अमूमन एक घंटे का यह सफर तकलीफ भरा साबित हुआ और दो घंटे में पानीपत बस स्टैंड पहुंचे। यहां करनाल और अंबाला की प्राइवेट बसें सवारियों को हाथ पकड़-पकड़ तक बैठा रहे थे। यमुनानगर की बस के बारे में पूछा तो जवाब मिला-पीपली चौक से मिलेगी। बसें करनाल नए बस स्टैंड भी नहीं जा रही थी। लिहाजा पीपली चौक उतरना ही ठीक समझा।
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कुरुक्षेत्र से कोई बस नहीं
करीब सवा सात बजे पीपली चौक पर पहुंचे तो वहां केवल लाडवा तक की मैक्सी कैब दिखाई दी। इनके ड्राइवरों ने बताया कि यहां से कुछ नहीं मिलेगा। मैक्सी कैब के जरिये लाडवा पहुंचने पर फिर से नए साधन की तलाश में खड़े हो गए। यहां लोग ट्रकों के सहारे यमुनानगर पहुंचने की जद्दोजहद करते मिले। आधा घंटा इंतजार के बाद एक टैक्सी वाले ने यमुनानगर तक लिफ्ट दे दी। बातचीत में उसने बताया कि रास्ते में लेडीज सवारियां ज्यादा परेशान मिलीं। पांच घंटे का यह सफर तमाम परेशानियों के साथ आठ घंटे यानि रात दस बजे खत्म हुआ।
रूट नंबर दो-चंडीगढ़
सोमवार सुबह नौ बजे बस स्टैंड पहुंचे तो वहां डायरेक्ट चंडीगढ़ की कोई बस नहीं मिली। अंबाला तक जा रही रोडवेज में सवार हुए। नया चालक डरते-डरते बस चला रहा था। जगाधरी तक पहुंचने में ही पांच किमी के सफर में आधा घंटा लग गया। कई बार ऐसे मौके आएं, जब लगा कि ड्राइवर बस को ठोक देगा, लेकिन जैसे तैसे करके दो घंटे में अंबाला पहुंचे। अंबाला में भी हालात यमुनानगर जैसे ही मिले। आधा घंटा इंतजार के बाद रोडवेज की बस में फिर ऐसा ही सफर करने को मिला और दो घंटे में चंडीगढ़ पहुंचे। यानि तीन घंटे का सफर पांच घंटे में तय किया गया।
रूट नंबर तीन
सहारनपुर से जगाधरी- दो घंटे में 30 किमी
हड़ताल के चलते यूपी की ओर जाने वाले यात्रियों को यूपी रोडवेज बसों का सहारा तो मिला लेकिन यह सफर भी तकलीफ भरा रहा। यमुनानगर से मात्र तीस किलोमीटर के सफर में यात्रियों को दो से ढाई घंटे लग रहे हैं। सड़क खराब व हाइवे के चौड़ीकरण का कार्य होने से यहां जाम भी लगा रहा है। सोमवार सुबह से सरसावा एयरफोर्स से लेकर यमुनानगर तक गाड़ियों की लंबी कतारें लगी थीं। इस रूट पर हरियाणा रोडवेज की अच्छी सर्विस होती है, अब हड़ताल के चलते यूपी रोडवेज पर लोग निर्भर हैं।
रूट नंबर चार
करनाल से यमुनानगर के रूट पर दोनों डिपो की बसें दौड़ती नजर आई। एक बस निकलने के बाद आधा से एक घंटे का इंतजार करना पड़ रहा है। यहां पुलिसकर्मी बस चालक के रूप में ड्यूटी पर हैं। पुराने बस स्टैंड से चली रोडवेज नया बस अड्डा, इंद्री, लाडवा, रादौर होते हुए यमुनानगर पहुंची। सिंगल रोड और भारी यातायात होने की वजह से ड्राइवर असहज थे। डेढ़ घंटे का सफर ढाई घंटे में पूरा हुआ।
ग्रामीण रूट बंद
वहीं गुमथला, खिजराबाद, बिलासपुर, साढौरा समेत अन्य ग्रामीणों रूटों पर कोई बस नहीं निकली। पोंटा साहिब जाने वाली बसों में छछरौली व खिजराबाद के यात्रियों को बैठाया गया। जबकि अन्य रूटों पर यात्रियों को बेहद परेशानी उठानी पड़ी।
फोटो
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नए ड्राइवर कंडक्टर भर्ती कर करीब 40 बसों को विभिन्न रूटों पर निकाला गया, फिर भी इंतजाम नाकाफी
अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर। लगातार सात दिन से चल रही रोडवेज हड़ताल से पब्लिक परेशान है। सोमवार को नए ड्राइवर कंडक्टर भर्ती कर यमुनानगर से करीब 40 बसों को विभिन्न रूटों पर निकाला गया। जो न केवल नाकाफी साबित हुई, बल्कि इन बसों ने यात्रियों की परेशानी और बढ़ा दी। बसों के इंतजार में कई कई घंटे बैठा रहना पड़ा, जो बसें आई वह फुल थीं या फिर उनमें नए ड्राइवर थे, जो खतरनाक ड्राइविंग कर रहे थे। अमर उजाला टीम ने महत्वपूर्ण रूटों पर सफर कर यात्रियों की परेशानी का जायजा लिया तो स्थिति भयंकर नजर आई।
रूट नंबर एक-दिल्ली
रविवार को दोपहर दो बजे बहादुरगढ़ से सफर शुरू किया। यहां प्राइवेट बस में जीटी करनाल बाईपास तक दो घंटे लगे। बाईपास पर सैकड़ों की संख्या में यात्री बसों का इंतजार करने नजर आए। आधा घंटे इंतजार के बाद पंजाब रोडवेज की बस आई, लेकिन अधिकतर यात्री उसमें चढ़ ही नहीं सके। पंद्रह मिनट बाद अक्सर खाली चलने वाली हिमाचल रोडवेज की बस में भी स्थिति ऐसी ही थी। कंडक्टर ने आवाज लगाकर कहा कि अंबाला से पहले कोई सवारी बस में न चढ़े। आवाज सुनकर अधिकतर यात्री पीछे हट गए। दो बच्चों के साथ करनाल जाने के लिए इंतजार कर रही पूजा ने बताया कि वह दो घंटे से खड़ी है, लेकिन बस में चढ़ ही नहीं पा रही। यहां एक सुखद करने वाला सीन जरूर दिखाई दिया। पुलिस का एक हेडकांस्टेबल प्राइवेट वाहनों को रुकवा कर उनमें सवारियों को बैठाते दिखाई दिया।
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पानीपत तक इको मैक्सी कैब
एक इको मैक्सी कैब वहां रुकी और पानीपत तक 100 रुपये प्रति सवारी लेकर जाने को राजी हुआ। किसी तरह वैन में बैठ तो गए, लेकिन अमूमन एक घंटे का यह सफर तकलीफ भरा साबित हुआ और दो घंटे में पानीपत बस स्टैंड पहुंचे। यहां करनाल और अंबाला की प्राइवेट बसें सवारियों को हाथ पकड़-पकड़ तक बैठा रहे थे। यमुनानगर की बस के बारे में पूछा तो जवाब मिला-पीपली चौक से मिलेगी। बसें करनाल नए बस स्टैंड भी नहीं जा रही थी। लिहाजा पीपली चौक उतरना ही ठीक समझा।
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कुरुक्षेत्र से कोई बस नहीं
करीब सवा सात बजे पीपली चौक पर पहुंचे तो वहां केवल लाडवा तक की मैक्सी कैब दिखाई दी। इनके ड्राइवरों ने बताया कि यहां से कुछ नहीं मिलेगा। मैक्सी कैब के जरिये लाडवा पहुंचने पर फिर से नए साधन की तलाश में खड़े हो गए। यहां लोग ट्रकों के सहारे यमुनानगर पहुंचने की जद्दोजहद करते मिले। आधा घंटा इंतजार के बाद एक टैक्सी वाले ने यमुनानगर तक लिफ्ट दे दी। बातचीत में उसने बताया कि रास्ते में लेडीज सवारियां ज्यादा परेशान मिलीं। पांच घंटे का यह सफर तमाम परेशानियों के साथ आठ घंटे यानि रात दस बजे खत्म हुआ।
रूट नंबर दो-चंडीगढ़
सोमवार सुबह नौ बजे बस स्टैंड पहुंचे तो वहां डायरेक्ट चंडीगढ़ की कोई बस नहीं मिली। अंबाला तक जा रही रोडवेज में सवार हुए। नया चालक डरते-डरते बस चला रहा था। जगाधरी तक पहुंचने में ही पांच किमी के सफर में आधा घंटा लग गया। कई बार ऐसे मौके आएं, जब लगा कि ड्राइवर बस को ठोक देगा, लेकिन जैसे तैसे करके दो घंटे में अंबाला पहुंचे। अंबाला में भी हालात यमुनानगर जैसे ही मिले। आधा घंटा इंतजार के बाद रोडवेज की बस में फिर ऐसा ही सफर करने को मिला और दो घंटे में चंडीगढ़ पहुंचे। यानि तीन घंटे का सफर पांच घंटे में तय किया गया।
रूट नंबर तीन
सहारनपुर से जगाधरी- दो घंटे में 30 किमी
हड़ताल के चलते यूपी की ओर जाने वाले यात्रियों को यूपी रोडवेज बसों का सहारा तो मिला लेकिन यह सफर भी तकलीफ भरा रहा। यमुनानगर से मात्र तीस किलोमीटर के सफर में यात्रियों को दो से ढाई घंटे लग रहे हैं। सड़क खराब व हाइवे के चौड़ीकरण का कार्य होने से यहां जाम भी लगा रहा है। सोमवार सुबह से सरसावा एयरफोर्स से लेकर यमुनानगर तक गाड़ियों की लंबी कतारें लगी थीं। इस रूट पर हरियाणा रोडवेज की अच्छी सर्विस होती है, अब हड़ताल के चलते यूपी रोडवेज पर लोग निर्भर हैं।
रूट नंबर चार
करनाल से यमुनानगर के रूट पर दोनों डिपो की बसें दौड़ती नजर आई। एक बस निकलने के बाद आधा से एक घंटे का इंतजार करना पड़ रहा है। यहां पुलिसकर्मी बस चालक के रूप में ड्यूटी पर हैं। पुराने बस स्टैंड से चली रोडवेज नया बस अड्डा, इंद्री, लाडवा, रादौर होते हुए यमुनानगर पहुंची। सिंगल रोड और भारी यातायात होने की वजह से ड्राइवर असहज थे। डेढ़ घंटे का सफर ढाई घंटे में पूरा हुआ।
ग्रामीण रूट बंद
वहीं गुमथला, खिजराबाद, बिलासपुर, साढौरा समेत अन्य ग्रामीणों रूटों पर कोई बस नहीं निकली। पोंटा साहिब जाने वाली बसों में छछरौली व खिजराबाद के यात्रियों को बैठाया गया। जबकि अन्य रूटों पर यात्रियों को बेहद परेशानी उठानी पड़ी।
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