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लोकल पुल आउट लीड
Updated Fri, 07 Sep 2018 01:08 AM IST
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-खनन माफिया की ज्यादती की दो तस्वीर।
न खनन रूक रहा, न पुलिस कार्रवाई करती, विरोध करने वालों की खैर नहीं।
उधर, यमुना की बाढ़ से नहीं, अधिकारियों के कारनामों से रो रहे है किसान
यमुनानगर/खिजराबाद
हथनीकुंड से लेकर गुमथला राव तक खनन माफिया की ज्यादती के आतंक से लोग परेशान हैं। राजनीतिक संरक्षण में चल रहे अवैध खनन पर पुलिस, माइनिंग व सिंचाई तीनों विभाग चुप हैं। जब आमजन इनके विरोध में खड़े होते हैं तो खनन माफिया के दबाव में इन विभागों के अधिकारी चुप करवा देते हैं। तमाम दबाव के मद्देनजर जिला खनन अधिकारी ने अब बेलगढ में हो रहे अवैध खनन को लेकर हाथ खड़े कर लिए हैं। उन्होंने यहां नाका व निशानदेही करवाने के लिए डीसी यमुनानगर को पत्र लिखा है। पत्र में उन्होंने कहा है कि बेलगढ क्षेत्र में यमुना नदी के साथ लगते क्षेत्र में अवैध खनन किया जा रहा है। यहां दर्जनों स्क्रीनिंग प्लांट लगे हुए हैं और वे लोग वहीं पर खनन कर रहे हैं। जैसे ही उनकी गाड़ी क्रशर जोन में जाती है तो वहां माफिया उनकी लोकेशन पर नजर रखते हैं। इसलिए अनुरोध है कि वहां स्थाई नाका लगवाया जाए। जिसमें खनन विभाग, पुलिस और एक अन्य विभाग के कर्मचारी नियुक्त किए जाएं। इसके साथ ही बेलगढ़ के खनन क्षेत्र में स्थाई निशानदेही भी करवाई जाए ताकि अवैध खनन कर रहे लोगों का पता लगाया जा सके।
बॉक्स:
चार बड़े केस, जिस पर हुआ बवाल
-मई में पूर्व मंत्री निर्मल सिंह का भी खनन माफियाओं से विवाद हुआ था। पूर्व मंत्री ने भी खुले तौर पर स्पीकर पर खनन माफिया का साथ देने का आरोप लगाया था। विवाद के चलते निर्मल सिंह को जेल जाना पड़ा था।
-मई में ही बीबीपुर गांव में ओवरलोड का विरोध करने पर पहले घर के बाहर बैठे ग्रामीणों पर हमला किया गया। बाद में उन्हीं के खिलाफ एफआइआर दर्ज करवा दी गई। रोशनलाल कंबोज अभी तक लड़ाई लड़ रहे हैं।
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-अगस्त में खनन माफियाओं ने स्पीकर के गांव में पंचायती रास्ते की जमीन को ही खोद डाला। ग्रामीण व सरपंच ने शिकायत दी तो उनके साथ अधिकारियों की मौजूदगी में मारपीट की गई। यहां तक की खनन इंस्पेक्टर को भाग कर अपनी जान बचानी पड़ी। इससे पहले भी अधिकारियों पर हमले के कई मामले हुए हैं।
-सितंबर में पूर्व जिप चेयरमैन श्याम सुंदर बत्रा के बेटे पर हमला और जमीन पर खाई खोद दी गई। इस मामले में भी स्पीकर पर खनन करने वालों को संरक्षण व उनका साथ देने के गंभीर आरोप लगाएं गए हैं।
बॉक्स
दोनों पक्षों ने की एसपी से मुलाकात
-बेलगढ़ क्षेत्र में खाई खोदकर रास्ता बंद करने को लेकर हुए विवाद के दूसरे दिन दोनों पक्ष एसपी से मिले। लोगों की मांग पर एसपी ने पहले से गठित की गई एसआईटी के द्वारा वहां हो रहे खनन की स्वतंत्र रूप से जांच कराने व स्पेशल गिरदावरी कराने कि उनकी मांग को स्वीकार कर लिया।
एक पक्ष
-देवधर के पूर्व सरपंच ओमकार का आरोप है कि कुछ लोग यहां अवैध खनन कर रहे हैं। उनकी मांग है कि निशानदेही के बाद ही अपनी जमीन में किसी प्रकार प्रकार की गतिविधि शुरू करें। उन्होंने एसपी से निवेदन किया कि निशानदेही करवा कर यह सुनिश्चित किया जाए कि यह नंबर किसके हैं। उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाये।
दूसरा पक्ष
-कांग्रेस नेता श्यामसुंदर बत्रा का कहना है कि अवैध खनन को रोकने पर उनके बेटे के साथ हुई घटना के मामले में जांच करने की मांग की। अगर जल्द ही आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई तो वे धरना प्रदर्शन करेंगे। अगर फिर भी कोई एक्शन नहीं हुआ तो तमाम प्रभावित लोगों को साथ लेकर जिले में इंट्री पूरी तरह से बंद कर दी जाएगी। अवैध खनन के मामले को पार्टी स्तर पर विधानसभा में उठाया जाएगा।
बॉक्स
इनका क्या कसूर
इस विवाद के चलते खनन सामग्री लेकर जा रही सौ से ज्यादा गाड़ियां फंसी हुई हैं। क्योंकि खाई खोदे जाने से रास्ता बंद हो गया है। शुक्रवार शाम को इन ट्रकों को निकालने का काम शुरू किया गया।
किसानों का दर्द
उधर, यमुना की बाढ़ से नहीं, अधिकारियों के कारनामों से रो रहे है किसान
यमुनानगर
उधर, जठलाना क्षेत्र में अवैध माइनिंग ने सैकड़ों किसानों को जिंदगी भर का जख्म दे दिया है। यमुना से भारी मात्रा में खनिज निकाले जाने की वजह से पानी ने आसपास की दो सौ से ज्यादा एकड़ जमीन को यमुना में शामिल कर लिया है। पानी उतरने पर यहां ठेकेदार खनन करेंगे और किसानों को इसकी रायल्टी तक नहीं मिलेगी। एडवोकेट वरयाम सिंह का कहना है कि यमुना का अपना कोई रकबा नहीं है और यह किसानों की जमीन में से बहती है। इस बार सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है और धान व गन्ने की फसल समेत उपजाऊ जमीन यमुना में समा गई है। इसके लिए यमुना का पानी नहीं बल्कि पूरी तरह से खनन माफिया जिम्मेदार है। जिसका खनन, सिंचाई व पुलिस विभाग के अधिकारियों ने सहयोग देकर अपनी जेब गर्म की। जब किसानों ने खनन का विरोध किया तो उनके साथ मारपीट की जाती है और मुकदमे तक दर्ज करवाएं गए हैं।
बॉक्स
किसान लड़ेंगे हक की लड़ाई
सैंकडों किसानों की भूमि फसलों सहित यमुनानदी में समा चुकी है। जिसको लेकर वीरवार को भारतीय किसान यूनियन जिला प्रधान संजू गुंदयाना व अन्य किसान नेताओं ने बाढ प्रभावित गांव का यमुनानदी पार जाकर दौरा किया। दौरे के बाद जिला प्रधान संजू गुंदयाना ने बताया कि यमुनानदी में खनन विभाग व सिंचाई विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत के कारण बाढ़ आने पर किसानों को अपनी करोडों रुपये की भूमि से हाथ धोना पडा है। जिसके लिए दोनों विभागों के अधिकारी जिम्मेवार है। जिन्हें सरकारी तुरंत सस्पेंड कर उनके विरुद्ध मामला दर्ज करें। यदि अधिकारी समय रहते अवैध खनन की शिकायत पर कार्रवाई करते तो आज प्रभावित किसानों को बाढ आने पर अपनी भूमि से हाथ नहीं धोना पडता।
खनन माफिया ने तटबंधों को भारी नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने सरकार से मांग की कि सरकार प्रभावित किसानों को उनकी भूमि व फसलों का उचित मुआवजा देते हुए परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी प्रदान करें। ताकि प्रभावित किसानों के परिवारों का गुजारा हो सके। वहीं अवैध खनन माफिया के विरुद्ध सरकार सख्त से सख्त कार्रवाई करे।
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न खनन रूक रहा, न पुलिस कार्रवाई करती, विरोध करने वालों की खैर नहीं।
उधर, यमुना की बाढ़ से नहीं, अधिकारियों के कारनामों से रो रहे है किसान
यमुनानगर/खिजराबाद
हथनीकुंड से लेकर गुमथला राव तक खनन माफिया की ज्यादती के आतंक से लोग परेशान हैं। राजनीतिक संरक्षण में चल रहे अवैध खनन पर पुलिस, माइनिंग व सिंचाई तीनों विभाग चुप हैं। जब आमजन इनके विरोध में खड़े होते हैं तो खनन माफिया के दबाव में इन विभागों के अधिकारी चुप करवा देते हैं। तमाम दबाव के मद्देनजर जिला खनन अधिकारी ने अब बेलगढ में हो रहे अवैध खनन को लेकर हाथ खड़े कर लिए हैं। उन्होंने यहां नाका व निशानदेही करवाने के लिए डीसी यमुनानगर को पत्र लिखा है। पत्र में उन्होंने कहा है कि बेलगढ क्षेत्र में यमुना नदी के साथ लगते क्षेत्र में अवैध खनन किया जा रहा है। यहां दर्जनों स्क्रीनिंग प्लांट लगे हुए हैं और वे लोग वहीं पर खनन कर रहे हैं। जैसे ही उनकी गाड़ी क्रशर जोन में जाती है तो वहां माफिया उनकी लोकेशन पर नजर रखते हैं। इसलिए अनुरोध है कि वहां स्थाई नाका लगवाया जाए। जिसमें खनन विभाग, पुलिस और एक अन्य विभाग के कर्मचारी नियुक्त किए जाएं। इसके साथ ही बेलगढ़ के खनन क्षेत्र में स्थाई निशानदेही भी करवाई जाए ताकि अवैध खनन कर रहे लोगों का पता लगाया जा सके।
बॉक्स:
चार बड़े केस, जिस पर हुआ बवाल
-मई में पूर्व मंत्री निर्मल सिंह का भी खनन माफियाओं से विवाद हुआ था। पूर्व मंत्री ने भी खुले तौर पर स्पीकर पर खनन माफिया का साथ देने का आरोप लगाया था। विवाद के चलते निर्मल सिंह को जेल जाना पड़ा था।
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-सितंबर में पूर्व जिप चेयरमैन श्याम सुंदर बत्रा के बेटे पर हमला और जमीन पर खाई खोद दी गई। इस मामले में भी स्पीकर पर खनन करने वालों को संरक्षण व उनका साथ देने के गंभीर आरोप लगाएं गए हैं।
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दोनों पक्षों ने की एसपी से मुलाकात
-बेलगढ़ क्षेत्र में खाई खोदकर रास्ता बंद करने को लेकर हुए विवाद के दूसरे दिन दोनों पक्ष एसपी से मिले। लोगों की मांग पर एसपी ने पहले से गठित की गई एसआईटी के द्वारा वहां हो रहे खनन की स्वतंत्र रूप से जांच कराने व स्पेशल गिरदावरी कराने कि उनकी मांग को स्वीकार कर लिया।
एक पक्ष
-देवधर के पूर्व सरपंच ओमकार का आरोप है कि कुछ लोग यहां अवैध खनन कर रहे हैं। उनकी मांग है कि निशानदेही के बाद ही अपनी जमीन में किसी प्रकार प्रकार की गतिविधि शुरू करें। उन्होंने एसपी से निवेदन किया कि निशानदेही करवा कर यह सुनिश्चित किया जाए कि यह नंबर किसके हैं। उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाये।
दूसरा पक्ष
-कांग्रेस नेता श्यामसुंदर बत्रा का कहना है कि अवैध खनन को रोकने पर उनके बेटे के साथ हुई घटना के मामले में जांच करने की मांग की। अगर जल्द ही आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई तो वे धरना प्रदर्शन करेंगे। अगर फिर भी कोई एक्शन नहीं हुआ तो तमाम प्रभावित लोगों को साथ लेकर जिले में इंट्री पूरी तरह से बंद कर दी जाएगी। अवैध खनन के मामले को पार्टी स्तर पर विधानसभा में उठाया जाएगा।
बॉक्स
इनका क्या कसूर
इस विवाद के चलते खनन सामग्री लेकर जा रही सौ से ज्यादा गाड़ियां फंसी हुई हैं। क्योंकि खाई खोदे जाने से रास्ता बंद हो गया है। शुक्रवार शाम को इन ट्रकों को निकालने का काम शुरू किया गया।
किसानों का दर्द
उधर, यमुना की बाढ़ से नहीं, अधिकारियों के कारनामों से रो रहे है किसान
यमुनानगर
उधर, जठलाना क्षेत्र में अवैध माइनिंग ने सैकड़ों किसानों को जिंदगी भर का जख्म दे दिया है। यमुना से भारी मात्रा में खनिज निकाले जाने की वजह से पानी ने आसपास की दो सौ से ज्यादा एकड़ जमीन को यमुना में शामिल कर लिया है। पानी उतरने पर यहां ठेकेदार खनन करेंगे और किसानों को इसकी रायल्टी तक नहीं मिलेगी। एडवोकेट वरयाम सिंह का कहना है कि यमुना का अपना कोई रकबा नहीं है और यह किसानों की जमीन में से बहती है। इस बार सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है और धान व गन्ने की फसल समेत उपजाऊ जमीन यमुना में समा गई है। इसके लिए यमुना का पानी नहीं बल्कि पूरी तरह से खनन माफिया जिम्मेदार है। जिसका खनन, सिंचाई व पुलिस विभाग के अधिकारियों ने सहयोग देकर अपनी जेब गर्म की। जब किसानों ने खनन का विरोध किया तो उनके साथ मारपीट की जाती है और मुकदमे तक दर्ज करवाएं गए हैं।
बॉक्स
किसान लड़ेंगे हक की लड़ाई
सैंकडों किसानों की भूमि फसलों सहित यमुनानदी में समा चुकी है। जिसको लेकर वीरवार को भारतीय किसान यूनियन जिला प्रधान संजू गुंदयाना व अन्य किसान नेताओं ने बाढ प्रभावित गांव का यमुनानदी पार जाकर दौरा किया। दौरे के बाद जिला प्रधान संजू गुंदयाना ने बताया कि यमुनानदी में खनन विभाग व सिंचाई विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत के कारण बाढ़ आने पर किसानों को अपनी करोडों रुपये की भूमि से हाथ धोना पडा है। जिसके लिए दोनों विभागों के अधिकारी जिम्मेवार है। जिन्हें सरकारी तुरंत सस्पेंड कर उनके विरुद्ध मामला दर्ज करें। यदि अधिकारी समय रहते अवैध खनन की शिकायत पर कार्रवाई करते तो आज प्रभावित किसानों को बाढ आने पर अपनी भूमि से हाथ नहीं धोना पडता।
खनन माफिया ने तटबंधों को भारी नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने सरकार से मांग की कि सरकार प्रभावित किसानों को उनकी भूमि व फसलों का उचित मुआवजा देते हुए परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी प्रदान करें। ताकि प्रभावित किसानों के परिवारों का गुजारा हो सके। वहीं अवैध खनन माफिया के विरुद्ध सरकार सख्त से सख्त कार्रवाई करे।