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ना कोई नियम, ना कोई कायदा, बच्चों की जान से हो रहा खिलवाड़
Updated Thu, 02 Aug 2018 12:41 AM IST
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न कोई नियम, न कोई कायदा, बच्चों की जान से हो रहा खिलवाड़
- कई वाहन न तो विभाग में पंजीकृत और न ही कोई कागजात
अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर। शहर से लेकर देहात तक चारों तरफ नियम-कायदे ताक पर रखकर दौड़ लगातीं स्कूल वैन और ऐसे तमाम वाहनों की तादाद दिनोंदिन बढ़ रही है, जिनमें बच्चे ही नहीं, मौत भी हर रोज सवार होती है। लेकिन, न मासूम इससे वाकिफ होते हैं और न अभिभावकों को कोई खबर। जिससे कोई बड़ा हादसा होने की आशंका बनी रहती है।
ऐसे वाहनों की पड़ताल तो दूर, उनके आंकड़े अपडेट करने के प्रति भी परिवहन विभाग कतई संजीदा नहीं है। यही कारण है कि वैन से लेकर जुगाड़ तक का इस्तेमाल स्कूली बच्चों को आवागमन कराने के लिए धड़ल्ले से किया जा रहा है। साथ ही सवारियां ढोने के लिए छोटा हाथी से लेकर अन्य वाहनों का प्रयोग भी धड़ल्ले से किया जा रहा है। इतना हीं नहीं वाहन तो खटारा हैं ही, लेकिन उनको चलाने वाला चालक ज्यादा लापरवाह है। चालक लोगों की जान की परवाह किए बिना धड़ल्ले से खटारा वाहन चला रहे हैं और वाहन क्षमता से अधिक सवारी ले जा रहे है। जो वाहन हर रोज स्कूली बच्चों के लिए इस्तेमाल किए जा रहे हैं, उनमें अधिकांश न तो परिवहन विभाग में पंजीकृत हैं और न ही इनमें उन मानकों पर ध्यान दिया जाता है। जो सवारियों की सुरक्षा की दृष्टि से सबसे अहम पहलू है।
डीसी के आदेश हवा हवाई : कुछ दिन पहले डीसी गिरीश अरोड़ा ने सभी स्कूली वाहनों को चेकिंग करने के निर्देश दिए है, लेकिन परिवहन अधिकारी कार्रवाई अमल में नहीं लाते। उन्हें केवल खनन से निकलने वाले ओवरलोड वाहन दिखाई देते हैं। जिनसे मिलीभगत करके अपनी जेब गर्म करते हैं। जबकि मासूमों की जिंदगी की कोई कीमत नहीं समझ रहे।
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मोटी फीस, ट्रांसपोर्ट पर लापरवाही : निजी स्कूल अभिभावकों से मोटी रकम वसूलते हैं, लेकिन बच्चों की जान की कोई परवाह नहीं। स्कूल प्रबंधन बच्चों की जान से खिलवाड़ कर प्रतिदिन बिना फिटनेस वाले व खटारा वाहनों में छोटे-छोटे मासूम को स्कूल लाने व ले जाने का कार्य कर रहे है। यदि स्कूलों की फीस पर नजर डाली जाए तो फीस की अनुरूप स्कूल प्रबंधक अभिभावकों व बच्चों को सुविधा नहीं देते।
क्या हैं स्कूल वाहनों के मानक : स्कूल वाहन 15 साल से अधिक पुराना नहीं होना चाहिए। उनकी फिटनेस की जांच नियमित रूप से होनी चाहिए और आग बुझाने के संयंत्र जरूरी हैं। इसके अलावा, वाहन में बच्चों के बैग व पानी की बोतलें रखने की जगह, खिड़कियों पर लोहे की रॉड, इंजन में डीजल या पेट्रोल इंधन का प्रयोग भी मानकों में शामिल है। यही नहीं, वाहन की पूरी बॉडी कवर्ड होनी चाहिए और चालक के साथ परिचालक होना भी आवश्यक है। वाहन का रंग पीला होना और इस पर स्कूल का नाम व चालक का मोबाइल नंबर अंकित किया जाना जरूरी है। वाहन में स्पीड गवर्नर होना चाहिए और इनकी रफ्तार 40 किमी. प्रति घंटा निर्धारित की गई है। सीसीटीवी और गर्ल्स की बस में महिला अटेंडेट होनी जरूरी है।
हो चुके हैं बड़े हादसे :
- अप्रैल 2011 को जगाधरी-पौंटा नेशनल हाइवे पर मानकपुर के पास कालेज बस ट्रक से टकराई। हादसे में 14 विद्यार्थियों की मौत, दर्जनों घायल।
- अप्रैल 2012 में छछरौली में लेदी गांव के निकट स्कूल बस पलटी, हादसे में एक बच्चे की मौत, 15 घायल।
- सितंबर 2014 को जगाधरी में नेशनल हाईवे पर तेज रफ्तार स्कूल बस ट्रक से टकराई। दो बच्चों सहित सात लोग घायल हो गए।
- दिसंबर 2015 में खुर्दी के पास प्राइवेट स्कूल बस ने बाइक सवार दो युवकों को टक्कर मारी। हादसे में दोनों युवकों की मौत।
- 2014 में बिलासपुर-साढौरा रोड पर स्कूल बस सड़क से नीचे उतरी, 3 बच्चे घायल।
- बिलासपुर-छछरौली रोड पर बसातियांवाला गांव के पास स्कूल बस का ब्रेक फेल हुआ। बस पेड़ से टकराई, 3 बच्चों को मामूली चोट आई।
- 2015 में बिलासपुर-जगाधरी स्टेट हाइवे पर स्कूल बस स्टेयरिंग फेल होने से पेड़ से टकराई। 2 बच्चों को मामूली चोट आई।
आरटीए विभाग की साथ मिलकर अभियान चलाया जा रहा है। रोजाना चालान किए जाएंगे और नियम तोड़कर चलने वाली स्कूल बसें जब्त भी की जाएंगी। इस बारे में सभी स्कूल प्रबंधकों को पहले ही बताया जा चुका है कि वे सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के अनुसार बसें आपरेट करें।
-राजीव मिगलानी, एसएचओ, ट्रैफिक थाना।
फोटो नंबर- 6,7,8
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- कई वाहन न तो विभाग में पंजीकृत और न ही कोई कागजात
अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर। शहर से लेकर देहात तक चारों तरफ नियम-कायदे ताक पर रखकर दौड़ लगातीं स्कूल वैन और ऐसे तमाम वाहनों की तादाद दिनोंदिन बढ़ रही है, जिनमें बच्चे ही नहीं, मौत भी हर रोज सवार होती है। लेकिन, न मासूम इससे वाकिफ होते हैं और न अभिभावकों को कोई खबर। जिससे कोई बड़ा हादसा होने की आशंका बनी रहती है।
ऐसे वाहनों की पड़ताल तो दूर, उनके आंकड़े अपडेट करने के प्रति भी परिवहन विभाग कतई संजीदा नहीं है। यही कारण है कि वैन से लेकर जुगाड़ तक का इस्तेमाल स्कूली बच्चों को आवागमन कराने के लिए धड़ल्ले से किया जा रहा है। साथ ही सवारियां ढोने के लिए छोटा हाथी से लेकर अन्य वाहनों का प्रयोग भी धड़ल्ले से किया जा रहा है। इतना हीं नहीं वाहन तो खटारा हैं ही, लेकिन उनको चलाने वाला चालक ज्यादा लापरवाह है। चालक लोगों की जान की परवाह किए बिना धड़ल्ले से खटारा वाहन चला रहे हैं और वाहन क्षमता से अधिक सवारी ले जा रहे है। जो वाहन हर रोज स्कूली बच्चों के लिए इस्तेमाल किए जा रहे हैं, उनमें अधिकांश न तो परिवहन विभाग में पंजीकृत हैं और न ही इनमें उन मानकों पर ध्यान दिया जाता है। जो सवारियों की सुरक्षा की दृष्टि से सबसे अहम पहलू है।
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डीसी के आदेश हवा हवाई : कुछ दिन पहले डीसी गिरीश अरोड़ा ने सभी स्कूली वाहनों को चेकिंग करने के निर्देश दिए है, लेकिन परिवहन अधिकारी कार्रवाई अमल में नहीं लाते। उन्हें केवल खनन से निकलने वाले ओवरलोड वाहन दिखाई देते हैं। जिनसे मिलीभगत करके अपनी जेब गर्म करते हैं। जबकि मासूमों की जिंदगी की कोई कीमत नहीं समझ रहे।
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मोटी फीस, ट्रांसपोर्ट पर लापरवाही : निजी स्कूल अभिभावकों से मोटी रकम वसूलते हैं, लेकिन बच्चों की जान की कोई परवाह नहीं। स्कूल प्रबंधन बच्चों की जान से खिलवाड़ कर प्रतिदिन बिना फिटनेस वाले व खटारा वाहनों में छोटे-छोटे मासूम को स्कूल लाने व ले जाने का कार्य कर रहे है। यदि स्कूलों की फीस पर नजर डाली जाए तो फीस की अनुरूप स्कूल प्रबंधक अभिभावकों व बच्चों को सुविधा नहीं देते।
क्या हैं स्कूल वाहनों के मानक : स्कूल वाहन 15 साल से अधिक पुराना नहीं होना चाहिए। उनकी फिटनेस की जांच नियमित रूप से होनी चाहिए और आग बुझाने के संयंत्र जरूरी हैं। इसके अलावा, वाहन में बच्चों के बैग व पानी की बोतलें रखने की जगह, खिड़कियों पर लोहे की रॉड, इंजन में डीजल या पेट्रोल इंधन का प्रयोग भी मानकों में शामिल है। यही नहीं, वाहन की पूरी बॉडी कवर्ड होनी चाहिए और चालक के साथ परिचालक होना भी आवश्यक है। वाहन का रंग पीला होना और इस पर स्कूल का नाम व चालक का मोबाइल नंबर अंकित किया जाना जरूरी है। वाहन में स्पीड गवर्नर होना चाहिए और इनकी रफ्तार 40 किमी. प्रति घंटा निर्धारित की गई है। सीसीटीवी और गर्ल्स की बस में महिला अटेंडेट होनी जरूरी है।
हो चुके हैं बड़े हादसे :
- अप्रैल 2011 को जगाधरी-पौंटा नेशनल हाइवे पर मानकपुर के पास कालेज बस ट्रक से टकराई। हादसे में 14 विद्यार्थियों की मौत, दर्जनों घायल।
- अप्रैल 2012 में छछरौली में लेदी गांव के निकट स्कूल बस पलटी, हादसे में एक बच्चे की मौत, 15 घायल।
- सितंबर 2014 को जगाधरी में नेशनल हाईवे पर तेज रफ्तार स्कूल बस ट्रक से टकराई। दो बच्चों सहित सात लोग घायल हो गए।
- दिसंबर 2015 में खुर्दी के पास प्राइवेट स्कूल बस ने बाइक सवार दो युवकों को टक्कर मारी। हादसे में दोनों युवकों की मौत।
- 2014 में बिलासपुर-साढौरा रोड पर स्कूल बस सड़क से नीचे उतरी, 3 बच्चे घायल।
- बिलासपुर-छछरौली रोड पर बसातियांवाला गांव के पास स्कूल बस का ब्रेक फेल हुआ। बस पेड़ से टकराई, 3 बच्चों को मामूली चोट आई।
- 2015 में बिलासपुर-जगाधरी स्टेट हाइवे पर स्कूल बस स्टेयरिंग फेल होने से पेड़ से टकराई। 2 बच्चों को मामूली चोट आई।
आरटीए विभाग की साथ मिलकर अभियान चलाया जा रहा है। रोजाना चालान किए जाएंगे और नियम तोड़कर चलने वाली स्कूल बसें जब्त भी की जाएंगी। इस बारे में सभी स्कूल प्रबंधकों को पहले ही बताया जा चुका है कि वे सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के अनुसार बसें आपरेट करें।
-राजीव मिगलानी, एसएचओ, ट्रैफिक थाना।
फोटो नंबर- 6,7,8