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रायपुर डेयरी कॉम्पलैक्स में संचालकों के साथ नगर निगम का धोखा
Updated Sun, 10 Jun 2018 12:24 AM IST
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रायपुर डेयरी कॉम्पलेक्स में डेयरी संचालकों के साथ नगर निगम का धोखा
अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर। शहर की विभिन्न कॉलोनियों में चल रही डेयरियों को बाहर शिफ्ट करने के लिए साल 2004 में डेयरी कांप्लेक्स बनाए गए थे। 14 साल में भी सरकार और प्रशासन की तरफ से यहां डेयरी संचालकों को सुविधाएं उपलब्ध नहीं करवाई गई। मुख्य शहर से 8 किमी दूर रायपुर के डेयरी कॉम्पलेक्स व्यापारियों के साथ धोखा है। अमर उजाला टीम ने रियल्टी चेक किया तो वहां के हालात खुद की स्थिति बयां कर रहे थे। यहां कुल नौ एकड़ पांच कनाल 11 मरला जमीन में 115 प्लॉट काटे गए हैं।
गलियों का बुरा हाल : यहां गलियां बनने से पहले ही टूट चुकी हैं। निकासी के लिए नालियां बनाने के नाम पर औपचारिकता की जा रही है। यहां कराए जा रहे कार्यों में अनियमितताओं का भी आरोप लगाया जा रहा है। मुख्य गली को छोड़ दे तो एक भी गली नहीं बनाई गई।
ट्यूबवेल व अस्पताल बना कर भूला निगम : ट्यूबवेल व पशु अस्पताल जब से बने हैं तब से ताले लटक रहे हैं। नगर निगम इनको बना कर भूल गया है। यहां न तो पेयजल की सप्लाई की जाती और न ही डॉक्टर की तैनाती की गई। अस्पताल की खिड़की तोड़कर नशेड़ी बैठे रहते हैं। जो दिनभर जुआ खेलते हैं और नशा करते हैं।
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पानी की निकासी नहीं : निकासी के लिए जो नालियां बनाई गई हैं, उनकी चौड़ाई भी कम है। ऐसे में पानी गलियों में बहता है। थ्री-पौंड सिस्टम गंदे पानी से लबालब है। मोटर जरूर लगाई गई है, लेकिन यह भी बंद पड़ी है।
दो घंटे बिजली, स्ट्रीट लाइन नहीं : यह क्षेत्र जठलाना रूरल फीडर से जुड़ा हुआ है। लिहाजा दिन में केवल दो घंटे बिजली ही आती है। रात को कुछ आराम मिलता है, लेकिन कई बार उसमें भी लंबे-लंबे कट लगते हैं। किसी भी खंभे पर स्ट्रीट लाइट नहीं है। शाम होते ही अंधेरा छा जाता है।
हमें यहां भेजने के लिए दबाव तो बनाया जा रहा है और कई डेयरियां शिफ्ट भी हो चुकी हैं, लेकिन पीने के पानी की भी
व्यवस्था यहां नहीं की गई है। -त्रिलोक कपूर
सुविधाओं के नाम पर हमारे साथ धोखा किया जा रहा है। नाले अभी से गंदगी से अट गए हैं। सफाई की व्यवस्था नहीं है। मक्खी मच्छरों की भरमार है। ऐसे में यहां रहना मुश्किल हो गया है। - नरेंद्र कुमार
आठ साल पहले यहां शिफ्ट किया था, लेकिन सारा धंधा चौपट हो गया। अब तो मैं ये धंधा ही छोडू़ंगा। यहां दो घंटे बिजली आती है। न चिकित्सा सुविधा और न ही नालियां और गलियां पक्की हैं। गायें बीमारी के कारण मर रही हैं। नगर निगम अधिकारियों से कई बार गुहार लगा चुके हैं, लेकिन आज तक किसी ने नहीं सुनी। - मिलकेश फौजी
डेयरी कॉम्प्लेक्स में चल रहे कार्यों का जायजा लिया जाएगा। यदि कहीं खामी है तो उसे दूर करवा दिया जाएगा। काम अभी पूरा नहीं हुआ है। यहां सभी आवश्यक सुविधाएं मुहैया करवाई जाएंगी।
-अनिल नैन, सीएसआई
फोटो नंबर 14 से 19
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अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर। शहर की विभिन्न कॉलोनियों में चल रही डेयरियों को बाहर शिफ्ट करने के लिए साल 2004 में डेयरी कांप्लेक्स बनाए गए थे। 14 साल में भी सरकार और प्रशासन की तरफ से यहां डेयरी संचालकों को सुविधाएं उपलब्ध नहीं करवाई गई। मुख्य शहर से 8 किमी दूर रायपुर के डेयरी कॉम्पलेक्स व्यापारियों के साथ धोखा है। अमर उजाला टीम ने रियल्टी चेक किया तो वहां के हालात खुद की स्थिति बयां कर रहे थे। यहां कुल नौ एकड़ पांच कनाल 11 मरला जमीन में 115 प्लॉट काटे गए हैं।
गलियों का बुरा हाल : यहां गलियां बनने से पहले ही टूट चुकी हैं। निकासी के लिए नालियां बनाने के नाम पर औपचारिकता की जा रही है। यहां कराए जा रहे कार्यों में अनियमितताओं का भी आरोप लगाया जा रहा है। मुख्य गली को छोड़ दे तो एक भी गली नहीं बनाई गई।
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ट्यूबवेल व अस्पताल बना कर भूला निगम : ट्यूबवेल व पशु अस्पताल जब से बने हैं तब से ताले लटक रहे हैं। नगर निगम इनको बना कर भूल गया है। यहां न तो पेयजल की सप्लाई की जाती और न ही डॉक्टर की तैनाती की गई। अस्पताल की खिड़की तोड़कर नशेड़ी बैठे रहते हैं। जो दिनभर जुआ खेलते हैं और नशा करते हैं।
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पानी की निकासी नहीं : निकासी के लिए जो नालियां बनाई गई हैं, उनकी चौड़ाई भी कम है। ऐसे में पानी गलियों में बहता है। थ्री-पौंड सिस्टम गंदे पानी से लबालब है। मोटर जरूर लगाई गई है, लेकिन यह भी बंद पड़ी है।
दो घंटे बिजली, स्ट्रीट लाइन नहीं : यह क्षेत्र जठलाना रूरल फीडर से जुड़ा हुआ है। लिहाजा दिन में केवल दो घंटे बिजली ही आती है। रात को कुछ आराम मिलता है, लेकिन कई बार उसमें भी लंबे-लंबे कट लगते हैं। किसी भी खंभे पर स्ट्रीट लाइट नहीं है। शाम होते ही अंधेरा छा जाता है।
हमें यहां भेजने के लिए दबाव तो बनाया जा रहा है और कई डेयरियां शिफ्ट भी हो चुकी हैं, लेकिन पीने के पानी की भी
व्यवस्था यहां नहीं की गई है। -त्रिलोक कपूर
सुविधाओं के नाम पर हमारे साथ धोखा किया जा रहा है। नाले अभी से गंदगी से अट गए हैं। सफाई की व्यवस्था नहीं है। मक्खी मच्छरों की भरमार है। ऐसे में यहां रहना मुश्किल हो गया है। - नरेंद्र कुमार
आठ साल पहले यहां शिफ्ट किया था, लेकिन सारा धंधा चौपट हो गया। अब तो मैं ये धंधा ही छोडू़ंगा। यहां दो घंटे बिजली आती है। न चिकित्सा सुविधा और न ही नालियां और गलियां पक्की हैं। गायें बीमारी के कारण मर रही हैं। नगर निगम अधिकारियों से कई बार गुहार लगा चुके हैं, लेकिन आज तक किसी ने नहीं सुनी। - मिलकेश फौजी
डेयरी कॉम्प्लेक्स में चल रहे कार्यों का जायजा लिया जाएगा। यदि कहीं खामी है तो उसे दूर करवा दिया जाएगा। काम अभी पूरा नहीं हुआ है। यहां सभी आवश्यक सुविधाएं मुहैया करवाई जाएंगी।
-अनिल नैन, सीएसआई
फोटो नंबर 14 से 19