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बागवानी विभाग के एमडी के गिरफ्तारी वारंट, अग्रिम जमानत भी हुई
Updated Fri, 08 Jun 2018 12:45 AM IST
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बागवानी विभाग के एमडी को मिली जमानत
जगाधरी। दस साल पहले धोखाधड़ी के एक मामले में सीजेएम अनुदीप कौर भाटी की अदालत ने बागवानी विभाग के एमडी बीएस सहरावत के गिरफ्तारी वारंट जारी किए थे। कोर्ट ने आदेश दिया था कि उन्हें 8 जून को कोर्ट में पेश किया जाए। इस गिरफ्तारी वारंट के खिलाफ उन्होंने कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका लगाई। जिस पर सुनवाई करते हुए एडीजे डॉ. नरेश कुमार सिंघल की अदालत ने उन्हें 50 हजार रुपये के पर्सनल बांड और लोकल स्योरिटी पर जमानत दे दी।
शिकायतकर्ता सर्वानंद ने बताया कि उसकी गोबिंदपुरा में एक नर्सरी है। जिसका उसके पास लाइसेंस भी था। साल 2005 में उसने अपनी नर्सरी को लोकेंद्र नाम के शख्स को दे दी थी। उसके नाम से पावर ऑफ अटार्नी भी बनवाई गई थी। इस नर्सरी से बागवानी विभाग को पौधे सप्लाई किए जाते थे और विभाग के पास उसकी 50 हजार रुपये की सिक्योरिटी मनी भी जमा थी। बाद में नर्सरी की जमीन के कुछ हिस्से को लेकर लोकेंद्र से उनका विवाद बन गया था। जिसके बाद पावर ऑफ अटार्नी कैंसल कर दी गई। इस संबंध में जिला बागवानी विभाग को जानकारी दे दी गई थी। इसके बावजूद तत्कालीन जिला बागवानी अधिकारी बीएस सहरावत ने उनकी सिक्योरिटी मनी के रूप में विभाग के पास जमा 50 हजार रुपये की धनराशि मिलीभगत करके लोकेंद्र को दे दी। इसकी शिकायत भी की गई, लेकिन उन्होंने कोई एक्शन नहीं लिया। इस संबंध में पुलिस 2009 में सिटी थाना यमुनानगर में मामला दर्ज करवाया गया था।
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जगाधरी। दस साल पहले धोखाधड़ी के एक मामले में सीजेएम अनुदीप कौर भाटी की अदालत ने बागवानी विभाग के एमडी बीएस सहरावत के गिरफ्तारी वारंट जारी किए थे। कोर्ट ने आदेश दिया था कि उन्हें 8 जून को कोर्ट में पेश किया जाए। इस गिरफ्तारी वारंट के खिलाफ उन्होंने कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका लगाई। जिस पर सुनवाई करते हुए एडीजे डॉ. नरेश कुमार सिंघल की अदालत ने उन्हें 50 हजार रुपये के पर्सनल बांड और लोकल स्योरिटी पर जमानत दे दी।
शिकायतकर्ता सर्वानंद ने बताया कि उसकी गोबिंदपुरा में एक नर्सरी है। जिसका उसके पास लाइसेंस भी था। साल 2005 में उसने अपनी नर्सरी को लोकेंद्र नाम के शख्स को दे दी थी। उसके नाम से पावर ऑफ अटार्नी भी बनवाई गई थी। इस नर्सरी से बागवानी विभाग को पौधे सप्लाई किए जाते थे और विभाग के पास उसकी 50 हजार रुपये की सिक्योरिटी मनी भी जमा थी। बाद में नर्सरी की जमीन के कुछ हिस्से को लेकर लोकेंद्र से उनका विवाद बन गया था। जिसके बाद पावर ऑफ अटार्नी कैंसल कर दी गई। इस संबंध में जिला बागवानी विभाग को जानकारी दे दी गई थी। इसके बावजूद तत्कालीन जिला बागवानी अधिकारी बीएस सहरावत ने उनकी सिक्योरिटी मनी के रूप में विभाग के पास जमा 50 हजार रुपये की धनराशि मिलीभगत करके लोकेंद्र को दे दी। इसकी शिकायत भी की गई, लेकिन उन्होंने कोई एक्शन नहीं लिया। इस संबंध में पुलिस 2009 में सिटी थाना यमुनानगर में मामला दर्ज करवाया गया था।
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