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किसानों को योजनाओं का लाभ उठाने हेतू किया प्रेरित
Updated Thu, 07 Jun 2018 01:04 AM IST
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शिविर में किसानों को दी गई जानकारी
यमुनानगर। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा खंड रादौर के गांव बकाना में जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। जिसमें कृषि विभाग के सहायक कृषि अभियंता विनीत कुमार जैन ने कहा कि किसान गेहूं व धान की कटाई के बाद बचे हुए फसल अवशेषों में आग लगा देते हैं। जिससे वातावरण तो दूषित होता है बल्कि जमीन की उर्वरा शक्ति भी नष्ट होती है।
उन्होंने कहा कि यदि किसान उन्नत फसल अवशेष प्रबंधन कृषि यंत्रों के उपयोग से फसल अवशेषों को मिट्टी में ही मिला दे तो जमीन की उपजाऊ शक्ति को बढ़ाया जा सकता है। इन फसल अवशेष प्रबंधन कृषि यंत्रों को जिले के किसानों को कम दर पर उपलब्ध करवाने हेतू कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, हरियाणा द्वारा वर्ष 2018-19 के दौरान केंद्र सरकार की नई इन-सीटू क्रोप रेजीड्यू मैनेजमेंट स्कीम के तहत कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित किए जाएंगे। योजना के तहत कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित करने के इच्छुक किसानों के समूह, सहकारी सोसायटियों, एफपीओ, स्वयं सहायता समूह, रजिस्टर्ड किसान सोसायटी, प्राईवेट उद्यमी, महिला किसान समूह, स्वयं सहायता समूह एवं प्रगतिशील किसानों से आवेदन आमंत्रित किए जा रहे है। इस स्कीम के तत कम से कम दस लाख तथा अधिकतम 75 लाख की परियोजना लागत के कस्टम हायरिंग सेंटर बनाए जा सकते है। कस्टम हायरिंग सेंटर के कुल परियोजना लागत की कम से कम 35 प्रतिशत राशि में केंद्र सरकार द्वारा स्वीकृत आठ प्रकार के फसल अवशेष प्रबंधन कृषि यंत्र सुपर स्ट्रा मेनेजमेंट सिस्टम, हेप्पी सीडर, पैडी स्ट्रा चोपर, शर्ब मास्टर, कटर-कम-स्प्रेडर, रिवर्सिबल एमबीप्लो, रोटरी स्लेशर, जीरो टिल ड्रील मशीन, रोटावेटर में से कोई भी का लेना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक कृषि यंत्र पर उपलब्ध अनुदान भारत सरकार द्वारा निर्धारित किए गए अधिकतम मूल्य का 50 प्रतिशत व भारत सरकार द्वारा निर्धारित अधिकतम अनुदान राशि देय होगी। इस मौके पर एसडीओ जगाधरी सतबीर लोहिया, कृषि विकास अधिकारी मौजी कांबोज व अरविंद मौजूद रहे।
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यमुनानगर। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा खंड रादौर के गांव बकाना में जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। जिसमें कृषि विभाग के सहायक कृषि अभियंता विनीत कुमार जैन ने कहा कि किसान गेहूं व धान की कटाई के बाद बचे हुए फसल अवशेषों में आग लगा देते हैं। जिससे वातावरण तो दूषित होता है बल्कि जमीन की उर्वरा शक्ति भी नष्ट होती है।
उन्होंने कहा कि यदि किसान उन्नत फसल अवशेष प्रबंधन कृषि यंत्रों के उपयोग से फसल अवशेषों को मिट्टी में ही मिला दे तो जमीन की उपजाऊ शक्ति को बढ़ाया जा सकता है। इन फसल अवशेष प्रबंधन कृषि यंत्रों को जिले के किसानों को कम दर पर उपलब्ध करवाने हेतू कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, हरियाणा द्वारा वर्ष 2018-19 के दौरान केंद्र सरकार की नई इन-सीटू क्रोप रेजीड्यू मैनेजमेंट स्कीम के तहत कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित किए जाएंगे। योजना के तहत कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित करने के इच्छुक किसानों के समूह, सहकारी सोसायटियों, एफपीओ, स्वयं सहायता समूह, रजिस्टर्ड किसान सोसायटी, प्राईवेट उद्यमी, महिला किसान समूह, स्वयं सहायता समूह एवं प्रगतिशील किसानों से आवेदन आमंत्रित किए जा रहे है। इस स्कीम के तत कम से कम दस लाख तथा अधिकतम 75 लाख की परियोजना लागत के कस्टम हायरिंग सेंटर बनाए जा सकते है। कस्टम हायरिंग सेंटर के कुल परियोजना लागत की कम से कम 35 प्रतिशत राशि में केंद्र सरकार द्वारा स्वीकृत आठ प्रकार के फसल अवशेष प्रबंधन कृषि यंत्र सुपर स्ट्रा मेनेजमेंट सिस्टम, हेप्पी सीडर, पैडी स्ट्रा चोपर, शर्ब मास्टर, कटर-कम-स्प्रेडर, रिवर्सिबल एमबीप्लो, रोटरी स्लेशर, जीरो टिल ड्रील मशीन, रोटावेटर में से कोई भी का लेना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक कृषि यंत्र पर उपलब्ध अनुदान भारत सरकार द्वारा निर्धारित किए गए अधिकतम मूल्य का 50 प्रतिशत व भारत सरकार द्वारा निर्धारित अधिकतम अनुदान राशि देय होगी। इस मौके पर एसडीओ जगाधरी सतबीर लोहिया, कृषि विकास अधिकारी मौजी कांबोज व अरविंद मौजूद रहे।
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