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11 लाख से संवारे जाएंगे पश्चिमी यमुना नहर के घाट

Sun, 04 Mar 2018 11:49 PM IST
Updated Sun, 04 Mar 2018 11:49 PM IST
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11 लाख से संवारे जाएंगे पश्चिमी यमुना नहर के घाट
11 लाख से संवारे गए पश्चिमी यमुना नहर के घाट
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अमर उजाला ब्यूरो
रादौर। लगभग 183 वर्ष पहले 1835 में रादौर निवासी लाला शोभाराम अग्रवाल ने पश्चिमी यमुना नहर का पक्का व कच्चा घाट हजारों रुपये खर्च करके बनवाया था। इसके बाद पक्का घाट पुरुषों व कच्चा घाट महिलाओं के लिए आरक्षित किया गया था। तब से लेकर आज तक दोनों घाटों की स्थानीय लोग पूजा करते आ रहे हैं। लेकिन लंबे समय से दोनों ऐतिहासिक घाटों की किसी ने सुध नहीं ली। इस कारण दोनों घाट अपना महत्व खोते चले गए। अब लंबे समय के बाद नगरपालिका रादौर ने पक्का घाट की सुध लेते हुए लगभग 11 लाख रुपये की ग्रांट राशि से घाटों को नया रूप दिया गया है। इससे स्थानीय लोग घाट बनने पर खुश नजर आ रहे हैं।
रादौर निवासी सुशील अग्रवाल ने बताया कि 1835 में उनकी पीढ़ी के सातवें बुजुर्ग लाला शोभाराम अग्रवाल ने पश्चिमी यमुना नहर रादौर में पक्का व कच्चा घाट बनवाया था। उस समय पक्के व कच्चे घाट पर लोग नहाते थे। नहाने के बाद लोग अपने बर्तनों में नहर का शुद्ध जल भरकर ले जाया करते थे। रादौर में उस समय नलके नहीं थे। नहर में आने वाले पहाड़ों के पानी को लोग पीते थे। उस समय उनके पूर्वज लाला शोभाराम ने छोटी ईंटों से पक्का व कच्चा घाट बनवाया था। पश्चिमी यमुना नहर उस समय रादौर के लोगों की जीवनरेखा हुआ करती थी। सभी लोगों के पास केवल नहर का पानी ही पीने के लिए हुआ करता था। नहर में 12 महीने शुद्ध पानी रहता था। उस समय बनाए गए दोनों घाटों को महिलाओं व पुरुषों के लिए अलग अलग आरक्षित किया गया था। जिससे कोई विवाद न हो। तब से लेकर आज तक रादौर के कच्चे व पक्के घाट पर धार्मिक अनुष्ठान होते आ रहे हैं। शहर में कोई भी त्योहार हो तो आज भी लोग कच्चे व पक्के घाट पर ही पूजा आराधना करने जाते हैं। दोनों घाटों का महत्व आज भी स्थानीय लोगों में बना हुआ है।
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कच्चे व पक्के घाट पर नपा ने खर्च किए 11 लाख रुपये
रादौर के ऐतिहासिक कच्चे व पक्के घाट पर नगरपालिका रादौर ने लगभग 11 लाख रुपये खर्च किए हैं। एमई विकास धीमान ने बताया कि कच्चे व पक्के घाट के ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए दोनों घाटों को दोबारा से बनाया गया है। इस पर 11 लाख रुपये से अधिक का खर्च आया है। कच्चे व पक्के घाट के बीच पश्चिमी यमुना नहर किनारे दीवारें बनाई गई हैं। पक्के घाट को लाखों रुपये खर्च कर सुंदर बनाया गया है। जल्द ही घाट का विधायक श्यामसिंह राणा शुभारंभ करेंगे।
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घाट बन गए लेकिन नहर पड़ी है महीनों से सूखी
नगरपालिका रादौर ने लाखों रुपये खर्च कर पश्चिमी यमुना नहर रादौर के घाट तो बनवा दिए हैं, लेकिन नहर महीनों से सूखी पड़ी है। इससे स्थानीय लोगों में रोष है। पक्का घाट मंदिर के महंत स्वामी महेशाश्रम जी महाराज ने बताया कि प्राचीन घाटों को बनवाकर नगरपालिका ने सराहनीय कार्य किया है। लेकिन पश्चिमी यमुना नहर तो महीनों से सूखी पड़ी है। पिछले कई वर्षों से नहर में केवल बरसात के सीजन में ही पानी आता है। इसके अलावा वर्ष भर नहर खाली रहती है। इस समय नहर में केवल रादौर शहर का गंदा पानी ही खड़ा हुआ है। इससे घाटों का महत्व कम हो गया है। लोग घाटों पर आते हैं और सूखी नहर की पूजा करके चले जाते हैं।
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