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रादौर भूतपूर्व सरपंच से मिलीभगत कर रिटायर्ड लिपिक ने बैकडेट में दिखाया था एतराज, दोनों फंसे
Updated Sun, 03 Sep 2017 12:40 AM IST
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कमेटी गठन पर बैकडेट में एतराज जताने पर रिटायर्ड लिपिक, पूर्व सरपंच फंसे
अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर। 2015 में ग्राम पंचायत रादौर में कमेटी का पुनर्गठन करने के दौरान रादौर के भूतपूर्व सरपंच से मिलीभगत कर डीपीआरओ से रिटायर्ड लिपिक की ओर से बैकडेट में एतराज दिखाने पर दोनों के खिलाफ धोखाधड़ी सहित विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया गया है। मामले का खुलासा सीटीएम द्वारा कराई गई जांच में हुआ। जांच में पता चला कि तब के पूर्व सरपंच ने कमेटी का गठन न करने के बारे में 31 जुलाई एतराज दिया, जबकि रिटायर्ड लिपिक ने आरकेई शाखा में रहते हुए 1 दिन बाद प्राप्त एतराज को अंतिम दिन यानी 30 जुलाई दिखा दिया। इस संबंध में डीसी कार्यालय के अधीक्षक ने हुडा पुलिस चौकी में शिकायत दी। इस पर पुलिस ने धारा-166 ए, 167, 420 व 120 आईपीसीज के तहत दोनों पर केस दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी।
पुलिस को दी शिकायत में बताया गया कि डीपीआरओ से रिटायर्ड लिपिक प्रेमचंद अटवाल आउट सोर्सिंग पालिसी के तहत लिपिक नियुक्त किया गया था, जो डीसी कार्यालय में एक फरवरी 2015 से 16 मई 2016 तक कार्यरत रहा। इस बीच ग्राम पंचायत रादौर में कमेटी का पुनर्गठन करने के लिए सरकार ने अधिसूचना जारी की थी। इसमें कहा गया था कि यदि किसी को कोई एतराज है तो वह छह सप्ताह के भीतर उसे प्रस्तुत करे। जुलाई-2015 तक कमेटी का गठन न करने के लिए चार एतराज प्रस्तुत हुए। उस दौरान आरकेई शाखा में कार्यरत प्रेमचंद अटवाल से मिलीभगत कर तब के पूर्व सरपंच ने रादौर कमेटी का गठन न करने के बारे में अपना एतराज 31 जुलाई 2015 को प्रस्तुत कर दिया। प्रेमचंद अटवाल ने इसकी प्राप्ति 30 जुलाई को दे दी यानी 1 दिन बाद प्राप्त हुए एतराज को अंतिम दिन 30 जुलाई में दिखा दिया। जबकि तीन अगस्त को डायरी कर संबंधित शाखा व अधिकारी को भेज दिया। निश्चित अवधि के भीतर एतराज प्राप्त न होने के कारण उस पर विचार नहीं हुआ और प्रदेश सरकार द्वारा नौ फरवरी 2016 को रादौर कमेटी का पुनर्गठन कर दिया गया।
अपने ही जाल में फंस गए आरोपी
मामले का खुलासा तब हुआ जब मामले को लेकर दो मार्च 2016 को पूर्व सरपंच द्वारा हाईकोर्ट में याचिका डालने पर रिकार्ड का पूर्ण अवलोकन कर सत्यता जानने के लिए सीटीएम ने जांच कराई। जांच अधिकारी की रिपोर्ट में पाया गया कि भूतपूर्व सरपंच विनोद वर्मा व कर्मी प्रेमचंद अटवाल की मिलीभगत है। इसी के चलते उस वक्त पूर्व सरपंच को हाईकोर्ट में जाने का मौका मिला और सरकार को परेशानी हुई।
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धारा-166 ए, 167, 420 व 120 आईपीसी के तहत केस दर्ज कर लिया है। पुलिस मामले की जांच में जुटी है। तथ्यों के आधार पर जल्द से जल्द दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी की जाएगी। पृथ्वी सिंह, इंचार्ज, हुडा चौकी।
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अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर। 2015 में ग्राम पंचायत रादौर में कमेटी का पुनर्गठन करने के दौरान रादौर के भूतपूर्व सरपंच से मिलीभगत कर डीपीआरओ से रिटायर्ड लिपिक की ओर से बैकडेट में एतराज दिखाने पर दोनों के खिलाफ धोखाधड़ी सहित विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया गया है। मामले का खुलासा सीटीएम द्वारा कराई गई जांच में हुआ। जांच में पता चला कि तब के पूर्व सरपंच ने कमेटी का गठन न करने के बारे में 31 जुलाई एतराज दिया, जबकि रिटायर्ड लिपिक ने आरकेई शाखा में रहते हुए 1 दिन बाद प्राप्त एतराज को अंतिम दिन यानी 30 जुलाई दिखा दिया। इस संबंध में डीसी कार्यालय के अधीक्षक ने हुडा पुलिस चौकी में शिकायत दी। इस पर पुलिस ने धारा-166 ए, 167, 420 व 120 आईपीसीज के तहत दोनों पर केस दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी।
पुलिस को दी शिकायत में बताया गया कि डीपीआरओ से रिटायर्ड लिपिक प्रेमचंद अटवाल आउट सोर्सिंग पालिसी के तहत लिपिक नियुक्त किया गया था, जो डीसी कार्यालय में एक फरवरी 2015 से 16 मई 2016 तक कार्यरत रहा। इस बीच ग्राम पंचायत रादौर में कमेटी का पुनर्गठन करने के लिए सरकार ने अधिसूचना जारी की थी। इसमें कहा गया था कि यदि किसी को कोई एतराज है तो वह छह सप्ताह के भीतर उसे प्रस्तुत करे। जुलाई-2015 तक कमेटी का गठन न करने के लिए चार एतराज प्रस्तुत हुए। उस दौरान आरकेई शाखा में कार्यरत प्रेमचंद अटवाल से मिलीभगत कर तब के पूर्व सरपंच ने रादौर कमेटी का गठन न करने के बारे में अपना एतराज 31 जुलाई 2015 को प्रस्तुत कर दिया। प्रेमचंद अटवाल ने इसकी प्राप्ति 30 जुलाई को दे दी यानी 1 दिन बाद प्राप्त हुए एतराज को अंतिम दिन 30 जुलाई में दिखा दिया। जबकि तीन अगस्त को डायरी कर संबंधित शाखा व अधिकारी को भेज दिया। निश्चित अवधि के भीतर एतराज प्राप्त न होने के कारण उस पर विचार नहीं हुआ और प्रदेश सरकार द्वारा नौ फरवरी 2016 को रादौर कमेटी का पुनर्गठन कर दिया गया।
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अपने ही जाल में फंस गए आरोपी
मामले का खुलासा तब हुआ जब मामले को लेकर दो मार्च 2016 को पूर्व सरपंच द्वारा हाईकोर्ट में याचिका डालने पर रिकार्ड का पूर्ण अवलोकन कर सत्यता जानने के लिए सीटीएम ने जांच कराई। जांच अधिकारी की रिपोर्ट में पाया गया कि भूतपूर्व सरपंच विनोद वर्मा व कर्मी प्रेमचंद अटवाल की मिलीभगत है। इसी के चलते उस वक्त पूर्व सरपंच को हाईकोर्ट में जाने का मौका मिला और सरकार को परेशानी हुई।
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धारा-166 ए, 167, 420 व 120 आईपीसी के तहत केस दर्ज कर लिया है। पुलिस मामले की जांच में जुटी है। तथ्यों के आधार पर जल्द से जल्द दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी की जाएगी। पृथ्वी सिंह, इंचार्ज, हुडा चौकी।