{"_id":"599c800e4f1c1b09158b469b","slug":"15034286466-yamuna-nagar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"ऑक्सीजन रिकार्ड नहीं दिखा पाने पर राज्य बाल संरक्षण आयोग की टीम ने डॉक्टरों को लताड़ा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ऑक्सीजन रिकार्ड नहीं दिखा पाने पर राज्य बाल संरक्षण आयोग की टीम ने डॉक्टरों को लताड़ा
Updated Wed, 23 Aug 2017 12:59 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
यमुनानगर अस्पताल में ऑक्सीजन का नहीं मिला कोई रिकार्ड, डॉक्टरों को लगाई फटकार
अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर। जिले में स्वास्थ्य सुविधाएं रामभरोसे ही हैं। हरियाणा राज्य बाल संरक्षण आयोग की टीम ने यमुनागर और जगाधरी सिविल अस्पताल का निरीक्षण किया तो सच्चाई सामने आ गई। दरअसल, गोरखपुर और छत्तीसगढ़ के अस्पतालों में ऑक्सीजन खत्म होने से बच्चों की मौत का मामला सामने आने के बाद मंगलवार को टीम यहां पहुंची थी। इस दरम्यान आयोग के सदस्य परमजीत बड़ौला की टीम जब सिविल अस्पताल यमुनानगर के बच्चों के वार्ड में ऑक्सीजन की जांच करने पहुंची तो डॉक्टर ऑक्सीजन का रिकार्ड ही नहीं दिखा पाए। इस पर भड़के बड़ौला ने डॉक्टरों को खूब खरी-खरी सुनाई। ऑक्सीजन का रिकार्ड अपडेट रखने के निर्देश दिए। भविष्य में इस तरह की लापरवाही मिलने पर कार्रवाई की भी चेतावनी दी। टीम को अस्पताल में कई अन्य कमियां भी मिलीं। इसके बाद उन्होंने जगाधरी सिविल अस्पताल का औचक निरीक्षण किया।
राज्य बाल अधिकार सरंक्षण आयोग के सदस्य परमजीत बड़ौला ने मंगलवार सुबह अपनी टीम के साथ मुकंद लाल सिविल अस्पताल यमुनानगर में पहुंचे। उनके साथ जगाधरी के नायब तहसीलदार कृष्ण कुमार, जिला बाल संरक्षण अधिकारी ऋचा बुद्धिराजा, बाल संरक्षण इकाई के लीगल ऑफिसर रंजन शर्मा, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विजय दहिया, सिविल अस्पताल जगाधरी की चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुमीता, लाली संधू, रणबीर सिंह फतेहपुर, परविंद्र सिंह कूलचंदु आदि थे। उनकी टीम ने कुछ स्थानों पर पीने के पानी की कमी पाई तो कई अन्य खामियां भी पाईं। इसके बाद बड़ौली बच्चों के वार्ड में ऑक्सीजन की जांच करने गए। यहां उन्होंने ऑक्सीजन रिकार्ड दिखाने को कहा। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विजय दहिया ने स्टाफ को रिकॉर्ड दिखाने को कहा, लेकिन स्टाफ टालमटोल करता रहा। काफी देर के बाद एक कर्मचारी ने ऑक्सीजन रजिस्टर दिखाया, लेकिन इसमें रूटीन रिकॉर्ड नहीं मिल पाया। इस पर बड़ौला ने डॉक्टरों और कर्मचारियों को फटकार लगाई। इसके बाद टीम ने जगाधरी सिविल अस्पताल का औचक निरीक्षण किया। स्टाफ कम होने पर उन्होंने डॉक्टरों के प्रति नाराजगी जाहिर की। वहीं सफाई व्यवस्था ठीक नहीं होने पर डॉक्टरों को निर्देश दिए।
बच्चों के इलाज में कोई खिलवाड़ सहन नहीं
निरीक्षण के दौरान बड़ौला ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों, डाक्टरों और स्टाफ के अन्य लोगों को चेताया कि अस्पतालों में बच्चों के इलाज में कोई कमी न रहने दी जाए। उन्होंने आदेश दिए कि बच्चों के इलाज के संबंध में कोई खिलवाड़ सहन नहीं किया जाएगा।
विज्ञापन
सफाई व्यवस्था में कोताही बर्दाश्त नहीं
उन्होंने सिविल अस्पताल जगाधरी में बाल वार्ड, जन कल्याण परिषद के कार्यालय आदि का निरीक्षण किया। दोनों अस्पताल में सफाई व्यवस्था ठीक नहीं पाई गई। उन्होंने निर्देश दिए कि अस्पताल में सफाई व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जाए। सफाई व्यवस्था में कोई कोताही बर्दाशत नहीं की जाएगी।
बाल चिकित्सा केंद्र की भी जांच की
आयोग की टीम ने सिविल अस्पताल यमुनानगर में स्थापित आधुनिक बाल चिकित्सा केंद्र व सघन बाल चिकित्सा केंद्र का दौरा भी किया। यहां छोटे-छोटे बच्चों की माताओं से प्रदान की जा रही स्वास्थ्य सुविधाओं की जानकारी हासिल की। इसके बाद राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सदस्य परमजीत बड़ौला ने शहर के दो प्राइवेट अस्पतालों का दौरा भी किया। उन्होंने रवि अस्पताल और आर्शीवाद अस्पताल में पहुंच कर यहां बच्चों को प्रदान की जा रही स्वास्थ्य सेवाओं का जायजा लिया।
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर। जिले में स्वास्थ्य सुविधाएं रामभरोसे ही हैं। हरियाणा राज्य बाल संरक्षण आयोग की टीम ने यमुनागर और जगाधरी सिविल अस्पताल का निरीक्षण किया तो सच्चाई सामने आ गई। दरअसल, गोरखपुर और छत्तीसगढ़ के अस्पतालों में ऑक्सीजन खत्म होने से बच्चों की मौत का मामला सामने आने के बाद मंगलवार को टीम यहां पहुंची थी। इस दरम्यान आयोग के सदस्य परमजीत बड़ौला की टीम जब सिविल अस्पताल यमुनानगर के बच्चों के वार्ड में ऑक्सीजन की जांच करने पहुंची तो डॉक्टर ऑक्सीजन का रिकार्ड ही नहीं दिखा पाए। इस पर भड़के बड़ौला ने डॉक्टरों को खूब खरी-खरी सुनाई। ऑक्सीजन का रिकार्ड अपडेट रखने के निर्देश दिए। भविष्य में इस तरह की लापरवाही मिलने पर कार्रवाई की भी चेतावनी दी। टीम को अस्पताल में कई अन्य कमियां भी मिलीं। इसके बाद उन्होंने जगाधरी सिविल अस्पताल का औचक निरीक्षण किया।
राज्य बाल अधिकार सरंक्षण आयोग के सदस्य परमजीत बड़ौला ने मंगलवार सुबह अपनी टीम के साथ मुकंद लाल सिविल अस्पताल यमुनानगर में पहुंचे। उनके साथ जगाधरी के नायब तहसीलदार कृष्ण कुमार, जिला बाल संरक्षण अधिकारी ऋचा बुद्धिराजा, बाल संरक्षण इकाई के लीगल ऑफिसर रंजन शर्मा, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विजय दहिया, सिविल अस्पताल जगाधरी की चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुमीता, लाली संधू, रणबीर सिंह फतेहपुर, परविंद्र सिंह कूलचंदु आदि थे। उनकी टीम ने कुछ स्थानों पर पीने के पानी की कमी पाई तो कई अन्य खामियां भी पाईं। इसके बाद बड़ौली बच्चों के वार्ड में ऑक्सीजन की जांच करने गए। यहां उन्होंने ऑक्सीजन रिकार्ड दिखाने को कहा। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विजय दहिया ने स्टाफ को रिकॉर्ड दिखाने को कहा, लेकिन स्टाफ टालमटोल करता रहा। काफी देर के बाद एक कर्मचारी ने ऑक्सीजन रजिस्टर दिखाया, लेकिन इसमें रूटीन रिकॉर्ड नहीं मिल पाया। इस पर बड़ौला ने डॉक्टरों और कर्मचारियों को फटकार लगाई। इसके बाद टीम ने जगाधरी सिविल अस्पताल का औचक निरीक्षण किया। स्टाफ कम होने पर उन्होंने डॉक्टरों के प्रति नाराजगी जाहिर की। वहीं सफाई व्यवस्था ठीक नहीं होने पर डॉक्टरों को निर्देश दिए।
विज्ञापन
बच्चों के इलाज में कोई खिलवाड़ सहन नहीं
निरीक्षण के दौरान बड़ौला ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों, डाक्टरों और स्टाफ के अन्य लोगों को चेताया कि अस्पतालों में बच्चों के इलाज में कोई कमी न रहने दी जाए। उन्होंने आदेश दिए कि बच्चों के इलाज के संबंध में कोई खिलवाड़ सहन नहीं किया जाएगा।
विज्ञापन
सफाई व्यवस्था में कोताही बर्दाश्त नहीं
उन्होंने सिविल अस्पताल जगाधरी में बाल वार्ड, जन कल्याण परिषद के कार्यालय आदि का निरीक्षण किया। दोनों अस्पताल में सफाई व्यवस्था ठीक नहीं पाई गई। उन्होंने निर्देश दिए कि अस्पताल में सफाई व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जाए। सफाई व्यवस्था में कोई कोताही बर्दाशत नहीं की जाएगी।
बाल चिकित्सा केंद्र की भी जांच की
आयोग की टीम ने सिविल अस्पताल यमुनानगर में स्थापित आधुनिक बाल चिकित्सा केंद्र व सघन बाल चिकित्सा केंद्र का दौरा भी किया। यहां छोटे-छोटे बच्चों की माताओं से प्रदान की जा रही स्वास्थ्य सुविधाओं की जानकारी हासिल की। इसके बाद राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सदस्य परमजीत बड़ौला ने शहर के दो प्राइवेट अस्पतालों का दौरा भी किया। उन्होंने रवि अस्पताल और आर्शीवाद अस्पताल में पहुंच कर यहां बच्चों को प्रदान की जा रही स्वास्थ्य सेवाओं का जायजा लिया।