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निराकार से नाता जुडने पर ही अज्ञानता से बाहर निकलती है आत्मा : हंस

Mon, 31 Jul 2017 12:35 AM IST
Updated Mon, 31 Jul 2017 12:35 AM IST
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निराकार से नाता जुडने पर ही अज्ञानता से बाहर निकलती है आत्मा : हंस
मानव जीवन में ही प्रभु की जानकारी संभव : हंस
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अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर। जिस तरह से जल का वस्त्रों के साथ या शरीर के साथ नाता जुड़ता है तो मैल दूर होती है और स्वच्छता आती है। उसी प्रकार से निराकार परमात्मा के साथ जब तक नाता नहीं जुड़ता, तब तक आत्मा अज्ञानता से घिरी रहती है। इंसान को इस निरंकार प्रभु परमात्मा के साथ नाता जोड़ना है। इसके साथ नाता जोड़ कर अपने जीवन को सफल बनाना है। यह बात करनाल के संयोजक और जोनल इंचार्ज महात्मा सतीश हंस रविवार को संत निरंकारी भवन में आयोजित सत्संग में अपने प्रवचन में कही।

सत्संग की शुरुआत पावन अवतार वाणी के शब्द गायन से हुई। जोनल इंचार्ज टेक चंद ने करनाल से आए महात्मा सतीश हंस का स्वागत मिशन का प्रतीक सफेद दुपट्टा डाल कर किया। महात्मा सतीश हंस ने कहा कि प्रभु परमात्मा की पहचान जरूरी है। मानव जीवन में ही इस प्रभु की जानकारी संभव है। कहा कि आत्मा परमात्मा का ही अंश है, लेकिन इस संसार में आकर अज्ञानता के कारण अलग पहचान रखती है। इस अवसर पर अनेक वक्ताओं ने अपने विचारों, गीतों और कविताओं के माध्यम से मिशन का सत्य संदेश दिया।मंच संचालन महात्मा जेके नारंग ने किया।
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