{"_id":"b32158b15df85936f7ad3b0297de9f28","slug":"what-pco-in-jail","type":"story","status":"publish","title_hn":"क्या! जेल में पीसीओ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
क्या! जेल में पीसीओ
मयंक तिवारी, गुड़गांव
Updated Sun, 29 Dec 2013 08:05 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
माडर्न जेल भोंडसी में बंद कैदी पहले बाहरी लोगों से बात करने के लिए तरसते थे लेकिन आजकल जेल में खुलेआम पीसीओ चलाया जा रहा है। जेल प्रशासन को जेल में पीसीओ की जानकारी मिली तो पूरा स्टाफ आश्चर्यचकित हो गया। मामले का खुलासा होने पर इसकी जांच अपराध शाखा को सौंप दी है।
विज्ञापन
माडर्न जेल भोंडसी में कैदियों के पास से पुलिस व जेल प्रशासन लगातार छापेमारी करके 49 मोबाइल फोन व 63 सिमकार्ड बरामद कर चुकी है। साउथ जोन की पुलिस की ओर से जेल अधीक्षक के बयान पर मामला दर्ज होने के बाद जांच अपराध शाखा को सौंप दी गई है। पहले चरण में हुई छापेमारी के बाद पुलिस को सिम कार्ड डिटेल से पता चला है कि एक-एक सिमकार्ड पर बैरक में रहने वाले 40-50 विचारधीन कैदियों ने लोगों से बात हुई है। डीसीपी साउथ राहुल शर्मा के अनुसार ज्यादातर मोबाइल व सिम कार्ड सजायाफ्ता कैदियों के हैं। जो अपने मोबाइल रखने का राज छुपाने के लिए बैरक में मौजूद अन्य कैदियों की भी बात करा कर उनको बराबर का आरोपी बना देते हैं। बदले में उनसे मोटी रकम बसूली जाती है। अपराध शाखा व साइबर सेल की टीम पूरे मामले की बारीकी से जांच में जुटी हैं।
विज्ञापन
जेल में बंद कैदी को अपने परिजनों तथा दोस्तों से मोबाइल पर बात करने के लिए पैसा देने में कभी गुरेज नहीं करते। जेल में पीसीओ चलाने वाले कैदी प्रति काल का 25 से 50 रुपये बसूलते हैं। इसके अलावा जितनी लंबी कॉल होगी उतना अधिक पैसा होगा। जेल में कैदी के पास मोबाइल पाए जाने पर छह माह की सजा का प्रावधान है। सजायाफ्ता कैदी की सजा में अगर छह माह और जुड़ जाता है तो उन पर कोई असर नहीं पड़ता है।
विज्ञापन
कैसे पहुंचता जेल में मोबाइल
मोबाइल का अलग-अलग पार्ट बारी-बारी से पेशी पर आने के दौरान भीतर पहुंचता है। दीवार के किनारे फेंक कर भीतर पहुंचाने का प्रयास किया जाता है। घी, तेल व फल, चप्पल के माध्यम से कैदियों तक पहुंचती है सिम।
अब तक की छानबीन में इस बात का खुलासा हुआ है कि सिम कार्ड धारक बैरक में अन्य लोगों से भी पीसीओ की तर्ज पर बात करा कर अपराध छुपाने का प्रयास करता है। पुलिस इस समस्या से निपटने का उपाय तलाश रही है।
राहुल शर्मा, डीसीपी साउथ