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नेताओं को चाहिए छात्रों के वोट, कालेजों में चुनाव नहीं कराते
भिवानी/सुरेश मेहरा
Updated Sat, 07 Sep 2013 11:53 PM IST
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हरियाणा के छात्रों को अपनी हकों की आवाज उठाने के लिए 17 साल से छात्र संघ चुनावों का इंतजार है। तत्कालीन मुख्यमंत्री चौ. बंसीलाल ने 1996 में छात्र संघ चुनावों पर रोक लगा दी गई थी।
तब से छात्र संगठन लगातार उन्हें दोबारा शुरू करवाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। हविपा की सरकार के बाद इनेलो, कांग्रेस और भाजपा गठबंधन की सरकार भी आई, लेकिन किसी ने भी इस ओर ध्यान नहीं दिया।
अब एक बार फिर छात्र संघ चुनावों को कराने की मांग जोर पकड़ने लगी है। सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा भी यही कह रहे हैं कि इस पर विचार किया जा रहा है, लेकिन चुनावों को कराने की घोषणा नहीं की जा रही है।
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लाखों विद्यार्थी बिना नेतृत्व के बिखरे
प्रदेश में 20 सरकारी और प्राइवेट यूनिवर्सिटी हैं। वहीं 21 जिलों में 193 कॉलेज हैं, जिनमें चार लाख से अधिक स्टूडेंट पढ़ते हैं। जब भी इन्हें अपनी मांगों को उठाना होता है तो बिना नेतृत्व के ही ये आंदोलन शुरू कर देते हैं, जिनमें कई बार गलत कदम भी उठा लिए जाते हैं।
हिंसक घटनाओं की वजह से लगी थी रोक
छात्र राजनीति के दौरान कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी के प्रधान और एसएफआई नेता जसबीर सिंह की हत्या कर दी गई थी। वहीं, एमडीयू रोहतक के प्रधान रहे देवेंद्र कोच का मर्डर भी हुआ था। इसके बाद से इन्हें बंद कराने की भूमिका बांधी जाने लगी थी।
छात्र राजनीति ने दिए कई नेता
पूर्व छात्र नेता और हरियाणा की राजनीति में अच्छी खासी पैठ रखने वाले शांति सेना प्रमुख संपूर्ण सिंह ने बताया कि सीपीएस राव दान सिंह, प्रो. छत्रपाल सिंह, राव इंद्रजीत सिंह, पृथी सिंह गोरखपुरिया, फूल सिंह श्योकंद, देवेंद्र शर्मा, मुख्य संसदीय सचिव धर्मबीर सिंह, निर्मल सिंह आदि कई नेता छात्र राजनीति में सक्रिय रहे।
छात्र प्रतिनिधि करवा सकते हैं मांगें पूरी
हिसार कृषि विश्वविद्यालय में छात्र नेता रहे फूल सिंह श्योकंद ने कहा कि 1970 के दशक में छात्र राजनीति से बखूबी कॉलेज संबंधी मांगों को उठाया।
इसके बाद चौधराहट के लिए इन चुनावों में बेतहाशा पैसा फूंका जाने लगा और दंगे होने लगे। फिजूलखर्ची आदि पर रोक जैसी कड़ी शर्तों के साथ चुनावों को बहाल करवाना चाहिए।
हमने 1970 के दशक में बस किराया, हॉस्टल, फीस आदि कई मुद्दों पर छात्रों की लड़ाई लड़ी और जीत हासिल की। छात्रों के चुने हुए प्रतिनिधियों के माध्यम से उनकी मांगों को आसानी से उठाया जा सकता है। पड़ोसी राज्यों में स्थापित यूनिवर्सिटी में हर साल सफलतापूर्वक चुनाव हो रहे हैं तो हरियाणा में क्यों नहीं हो सकते।
वहीं, एसएफआई के राज्य सचिव मनोज कुमार ने कहा कि छात्र संघ चुनाव विद्यार्थियों का हक है, ये होने चाहिए। वे छात्रों की मांगों को लेकर दस सितंबर को संसद मार्च करने जा रहे हैं।
वर्ष 1979 में वैश्य महाविद्यालय के प्रधान रहे संपूर्ण सिंह ने बताया कि छात्र संघ के चुनाव अवश्य होेने चाहिए। आज के छात्र ही देश के भावी नेता होंगे।
उनका कहना है चुनाव बिना खर्च के हों और झगड़ा फसाद रहित हों। इसके लिए सरकार पूरी जिम्मेदारी ले।
महाविद्यालयों में ही छात्रों के बीच डिबेट हो। चुनाव प्रचार गांव गांव न होकर कॉलेज में ही डिबेट हो। इसके लिए समय सीमा भी एक सप्ताह से ज्यादा की नहीं होनी चाहिए। डिबेट का खर्च भी महाविद्यालय खुद वहन करें।
विस चुनाव सिर पर, अब सभी कर रहे वकालत
अगले साल होने वाले लोकसभा और विधानसभा चुनाव को देखते और प्रदेश में छात्र संघ चुनाव की मांग के जोर पकड़ने के बाद अब सभी पार्टियां इन्हें शुरू करवाने की वकालत कर रही है।
कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा भी चुनाव कराने के पक्ष में हैं। वहीं, इनसो और हजकां के सम्मेलनों में भी इनकी मांग उठ रही है। हजकां सुप्रीमो कुलदीप बिश्नोई के बेटे भव्य बिश्नोई ने भी रोहतक में आयोजित सम्मेलन में छात्र संघ के मुद्दे को उठाने की बात कही थी।
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तब से छात्र संगठन लगातार उन्हें दोबारा शुरू करवाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। हविपा की सरकार के बाद इनेलो, कांग्रेस और भाजपा गठबंधन की सरकार भी आई, लेकिन किसी ने भी इस ओर ध्यान नहीं दिया।
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अब एक बार फिर छात्र संघ चुनावों को कराने की मांग जोर पकड़ने लगी है। सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा भी यही कह रहे हैं कि इस पर विचार किया जा रहा है, लेकिन चुनावों को कराने की घोषणा नहीं की जा रही है।
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लाखों विद्यार्थी बिना नेतृत्व के बिखरे
प्रदेश में 20 सरकारी और प्राइवेट यूनिवर्सिटी हैं। वहीं 21 जिलों में 193 कॉलेज हैं, जिनमें चार लाख से अधिक स्टूडेंट पढ़ते हैं। जब भी इन्हें अपनी मांगों को उठाना होता है तो बिना नेतृत्व के ही ये आंदोलन शुरू कर देते हैं, जिनमें कई बार गलत कदम भी उठा लिए जाते हैं।
हिंसक घटनाओं की वजह से लगी थी रोक
छात्र राजनीति के दौरान कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी के प्रधान और एसएफआई नेता जसबीर सिंह की हत्या कर दी गई थी। वहीं, एमडीयू रोहतक के प्रधान रहे देवेंद्र कोच का मर्डर भी हुआ था। इसके बाद से इन्हें बंद कराने की भूमिका बांधी जाने लगी थी।
छात्र राजनीति ने दिए कई नेता
पूर्व छात्र नेता और हरियाणा की राजनीति में अच्छी खासी पैठ रखने वाले शांति सेना प्रमुख संपूर्ण सिंह ने बताया कि सीपीएस राव दान सिंह, प्रो. छत्रपाल सिंह, राव इंद्रजीत सिंह, पृथी सिंह गोरखपुरिया, फूल सिंह श्योकंद, देवेंद्र शर्मा, मुख्य संसदीय सचिव धर्मबीर सिंह, निर्मल सिंह आदि कई नेता छात्र राजनीति में सक्रिय रहे।
छात्र प्रतिनिधि करवा सकते हैं मांगें पूरी
हिसार कृषि विश्वविद्यालय में छात्र नेता रहे फूल सिंह श्योकंद ने कहा कि 1970 के दशक में छात्र राजनीति से बखूबी कॉलेज संबंधी मांगों को उठाया।
इसके बाद चौधराहट के लिए इन चुनावों में बेतहाशा पैसा फूंका जाने लगा और दंगे होने लगे। फिजूलखर्ची आदि पर रोक जैसी कड़ी शर्तों के साथ चुनावों को बहाल करवाना चाहिए।
हमने 1970 के दशक में बस किराया, हॉस्टल, फीस आदि कई मुद्दों पर छात्रों की लड़ाई लड़ी और जीत हासिल की। छात्रों के चुने हुए प्रतिनिधियों के माध्यम से उनकी मांगों को आसानी से उठाया जा सकता है। पड़ोसी राज्यों में स्थापित यूनिवर्सिटी में हर साल सफलतापूर्वक चुनाव हो रहे हैं तो हरियाणा में क्यों नहीं हो सकते।
वहीं, एसएफआई के राज्य सचिव मनोज कुमार ने कहा कि छात्र संघ चुनाव विद्यार्थियों का हक है, ये होने चाहिए। वे छात्रों की मांगों को लेकर दस सितंबर को संसद मार्च करने जा रहे हैं।
वर्ष 1979 में वैश्य महाविद्यालय के प्रधान रहे संपूर्ण सिंह ने बताया कि छात्र संघ के चुनाव अवश्य होेने चाहिए। आज के छात्र ही देश के भावी नेता होंगे।
उनका कहना है चुनाव बिना खर्च के हों और झगड़ा फसाद रहित हों। इसके लिए सरकार पूरी जिम्मेदारी ले।
महाविद्यालयों में ही छात्रों के बीच डिबेट हो। चुनाव प्रचार गांव गांव न होकर कॉलेज में ही डिबेट हो। इसके लिए समय सीमा भी एक सप्ताह से ज्यादा की नहीं होनी चाहिए। डिबेट का खर्च भी महाविद्यालय खुद वहन करें।
विस चुनाव सिर पर, अब सभी कर रहे वकालत
अगले साल होने वाले लोकसभा और विधानसभा चुनाव को देखते और प्रदेश में छात्र संघ चुनाव की मांग के जोर पकड़ने के बाद अब सभी पार्टियां इन्हें शुरू करवाने की वकालत कर रही है।
कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा भी चुनाव कराने के पक्ष में हैं। वहीं, इनसो और हजकां के सम्मेलनों में भी इनकी मांग उठ रही है। हजकां सुप्रीमो कुलदीप बिश्नोई के बेटे भव्य बिश्नोई ने भी रोहतक में आयोजित सम्मेलन में छात्र संघ के मुद्दे को उठाने की बात कही थी।