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वाड्रा-डीएलएफ: मुख्य सचिव के दफ्तर में दबकर रह गईं दोनों रिपोर्ट
डॉ. सुरेंद्र धीमान
Updated Tue, 13 Aug 2013 12:11 AM IST
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कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा और डीएलएफ के बीच हुई डील मामले की दो रिपोर्ट हरियाणा के मुख्य सचिव दफ्तर में दबकर रह गई हैं।
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टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग ने जिस रिपोर्ट पर 24 घंटे में फैसला दे दिया उसी रिपोर्ट पर मुख्य सचिव पीके चौधरी तीन महीने से फैसला नहीं कर पा रहे हैं। वे वेट एंड वाच की पॉलिसी अपना रहे हैं।
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चकबंदी महानिदेशक के पद पर रहते हुए डॉ. अशोक खेमका ने डील के डीएलएफ की खरीद गई जमीन का इंतकाल 15 अक्तूबर, 2012 को रद्द किया था।
इस आदेश को परखने के लिए मुख्य सचिव ने अतिरिक्त मुख्य सचिव कृष्ण मोहन, केके जालान और प्रधान सचिव राजन गुप्ता की कमेटी 19 अक्तूबर, 2012 को गठित की थी।
कमेटी ने बाद में राजस्व विभाग के विशेष सचिव अशोक यादव को कमेटी का सचिव नियुक्त कर लिया था। कमेटी ने अपनी रिपोर्ट 29 दिसंबर, 2012 को मुख्य सचिव को सौंप दी थी। कमेटी ने खेमका के आदेश को गलत बताया था और डील को क्लीन चिट दे दी थी।
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यह रिपोर्ट मुख्य सचिव के दफ्तर में करीब सवा दो महीने पड़ी रही। मार्च, 2013 को मुख्य सचिव ने इस पर खेमका से जवाब देने को कहा।
खेमका ने करीब ढाई महीने जवाब तैयार करने में लगाए और यह रिपोर्ट 21 मई, 2013 को मुख्य सचिव को सौंप दी। तब से यह रिपोर्ट मुख्य सचिव के दफ्तर में पड़ी हुई है।
एक्सटेंशन पर चल रहे हैं मुख्य सचिव
दरअसल जब कमेटी ने रिपोर्ट सौंपी उस समय मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव छतर सिंह की रिटायरमेंट 31 मार्च को होनी थी। तब तक खेमका का जवाब नहीं पहुंचा था। हालांकि मुख्यमंत्री ने छतर सिंह को रिटायरमेंट के बाद 30 जून के लिए पुनर्नियुक्ति दे दी थी।
इसी बीच 21 मई को खेमका ने अपनी रिपोर्ट दे दी। मुख्य सचिव ने उस पर कोई फैसला नहीं किया। अब मुख्य सचिव को छह महीने की एक्सटेंशन मिली हुई है मगर वे अभी तक रिपोर्ट को परख ही रहे हैं।
खेमका की रिपोर्ट सही या गलत
खेमका ने अपने आदेश और बाद में रिस्पांस के तौर पर दी गई रिपोर्ट को सही बताया है। कमेटी ने खेमका के आदेश को गलत बताया है। मुख्य सचिव को यह तय करना है कि कौन सी रिपोर्ट सही है। अगर खेमका की रिपोर्ट गलत हुई तो नियमानुसार कार्रवाई करनी पड़ेगी।
अफसरशाही में चर्चा है कि एक्सटेंशन पर चल रहे मुख्य सचिव दोनों रिपोर्ट पर फैसला देकर किसी फसाद में नहीं फंसना चाहते। यह अलग बात है कि टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग ने खेमका की रिपोर्ट को गलत करार दिया है।
मुख्य सचिव से अमर उजाला ने पूछे ये सवाल
1. पिछले आठ महीने से तीन अफसरों की कमेटी की रिपोर्ट और उस पर तीन महीने से अशोक खेमका का दिया गया जवाब आपके दफ्तर में क्यों लंबित है?
2. अगर खेमका का जवाब गलत है तो हरियाणा सरकार ने क्या कार्रवाई की है?
3. खेमका के जवाब को कौन परख रहा है और इसमें कितना समय लगेगा?
इन तीनों सवालों का मुख्य सचिव पीके चौधरी ने सिर्फ एक ही जवाब दिया :
‘रिपोर्ट परखी जा रही है और इसके लिए समय सीमा तय नहीं की जा सकती।’
उन्होंने इसका जवाब नहीं दिया कि खेमका का जवाब कौन परख रहा है।