फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   The funeral of a soldier's death 45 years later

मौत के 45 साल बाद होगा फौजी का अंतिम संस्कार

Sun, 01 Sep 2013 12:30 AM IST
रेवाड़ी/सिद्धार्थ यादव
रेवाड़ी/सिद्धार्थ यादव Updated Sun, 01 Sep 2013 12:30 AM IST
विज्ञापन
The funeral of a soldier's death 45 years later

मौत के 45 साल बाद सेना के एक हवलदार का अंतिम संस्कार हो सकेगा।

विज्ञापन


लेह में 1968 में एक विमान दुर्घटना के दौरान लापता हुए 98 जवानों की तलाश के दौरान रेवाड़ी के मीरपुर गांव के हवलदार जगमाल सिंह का शव बरामद हुआ है।

एक-दो दिन में सम्मान के साथ जगमाल सिंह के शव को उनके पैतृक गांव में लाया जाएगा। करीब 45 साल बाद अंतिम संस्कार होने के बाद उनकी राख को उनके गांव की माटी में मिलने का सौभाग्य प्राप्त होगा।

इससे पहले तक उनके परिवार वालों के मन में यही टीस थी कि वे अपने फौजी का अंतिम संस्कार भी नहीं कर पाए। शुक्रवार को सेना के जवान उनके घर पर यह सूचना लेकर आए।
विज्ञापन


हवलदार जगमाल सिंह को सिल्वर मेडल, उनकी जेब से मिली जीवन बीमा पॉलिसी और परिवार के एक खत से पहचाना गया है।

यूं दुर्घटनागस्त हुआ था विमान
वेस्टर्न कमांड के एक अधिकारी ने बताया कि सात फरवरी 1968 में सुबह चंडीगढ़ से एन-12 विमान लेह जाने के लिए सेना के 92 और छह एयरफोर्स के जवानों को लेकर उड़ा था।
विज्ञापन
विज्ञापन


विमान के चालक फ्लाइट ले. एचके सिंह ने मौसम खराब होने के कारण विमान को वापिस मोड़ा था, लेकिन विमान के चालक का रोहतांग के पास संपर्क टूट गया था।

2003 तक जवानों का लापता होना एकपहेली बनी रही। इसके बाद पर्वतारोही दल को अचानक विमान के पुर्जे ढाका ग्लेशियर में मिल गए।

उसके बाद सेना ने एक सर्च अभियान चलाकर तीन सैनिकों के शव को ढूंढ निकाला। अब 16 अगस्त को रेवाड़ी के मीरपुर गांव के हवलदार जगमाल सिंह का शव लाहौल स्पीति के चंद्र भागा क्षेत्र में बर्फ में दबा मिला है।

ऐसा लगा मानो वक्त का पहिया उल्टा घूम रहा है : रामचंद्र
ईएमई यूनिट में तैनात हवलदार जगमाल सिंह के बेटे रिटायर्ड नायब सूबेदार रामचंद्र ने कहा कि शुक्रवार को जेसीओ सोमवीर उनके घर पर यह खबर लेकर आए कि उनके पिता का शव पहाड़ों में मिल गया है। उन्हें पहले तो इस बात का यकीन नहीं हुआ।

वे तो अब उनकी यादों के सहारे जी रहे थे। उन्हें लगा कि मानो वक्त का पहिया उल्टा घूम रहा है। रामचंद्र ने कहा कि काश उनकी मां भी इस वक्त जिंदा होती।

उनकी मां भगवान कौर का 2008 में निधन हो गया। पिता का शव मिलने की सूचना दो बड़ी और एक छोटी बहन को भी कर दी गई है।

छुट्टी पूरी करके लौट रहे थे जगमाल सिंह
रिटायर्ड नायक सूबेदार रामचंद्र सिंह ने अमर उजाला को बताया कि फरवरी 1968 में उसके पिता जब छुट्टी पूरी करके ड्यूटी पर जा रहे थे तब वह मात्र 6-7 साल का था। उस दौरान सेना से सूचना मिली थी कि विमान दुर्घटना में पिता की मौत हो गई है।


अब बस इंतजार उस पल का है, जब अपने पिता के शव का पैतृक गांव में अंतिम संस्कार कर सकूंगा। वहीं सेना के अधिकारियों ने बताया कि हवलदार जगमाल सिंह के शव को एक-दो दिन में मीरपुर गांव भेजा जा रहा है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed