राष्ट्रमंडल खेलों से कुश्ती बाहर: पहलवान व प्रशिक्षक नाखुश, बताया कुश्ती को नुकसान पहुंचाने की साजिश
2026 के राष्ट्रमंडल खेलों में निशानेबाजी को शामिल किया गया है और कुश्ती को बाहर किया गया है। देश ने कुश्ती स्पर्धा में ही अधिक पदक जीते हैं, फैसले को कुश्ती को नुकसान पहुंचाने की साजिश बताया है।
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वर्ष 2026 में होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों में अब देश के पहलवान दांव नहीं लगा पाएंगे। ऑस्ट्रेलिया के विक्टोरिया के विभिन्न शहरों में होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों में निशानेबाजी को शामिल कर कुश्ती को बाहर कर दिया है। राष्ट्रमंडल खेल महासंघ (सीजीएफ) के इस फैसले से सोनीपत के पहलवान व प्रशिक्षक नाखुश हैं। उन्होंने महासंघ के इस फैसले को गलत बताया है। उनका कहना है कि इसका असर कुश्ती पर पड़ेगा। देश व प्रदेश के पहलवानों ने सबसे अधिक पदक कुश्ती में ही जीते हैं। इससे देश में कुश्ती की लोकप्रियता भी कम होगी।
सोनीपत के पहलवानों व प्रशिक्षकों ने वर्ष 2026 में होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों से कुश्ती को बाहर किए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि कुश्ती के साथ साजिश की जा रही है। भारत कुश्ती में सिरमौर बन चुका है। ऐसे में साजिश के तहत भारत को पदक तालिका में नीचे रखने के लिए कुश्ती को बाहर किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि भारतीय कुश्ती संघ को इसे लेकर कठोर फैसला लेना चाहिए। जिसमें राष्ट्रमंडल खेलों का बहिष्कार तक करने से पीछे नहीं हटना चाहिए। उन्होंने भारत सरकार व खेल मंत्रालय से गुजारिश की है इन खेलों में कुश्ती की वापसी के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आवाज उठाई जाए।
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राष्ट्रमंडल में भारत अकेले कुश्ती में जीत चुका 114 पदक राष्ट्रमंडल खेलों में कुश्ती में भारत का प्रदर्शन काफी बेहतर रहा है। हर बार भारत के पहलवान कुश्ती में कई पदक देश की झोली में डालते हैं। वर्ष 2022 में बर्मिंघम में हुए राष्ट्रमंडल खेलों में कुश्ती स्पर्धा में भारत ने 12 पदक जीते। 2018 में ऑस्ट्रेलिया के गोल्ड कोस्ट में हुए राष्ट्रमंडल खेलों में भी भारत ने पांच स्वर्ण सहित 12 पदक जीते थे।
इतना ही नहीं स्कॉटलैंड के ग्लासगो में वर्ष 2014 में हुए राष्ट्रमंडल खेलों में भी भारत ने पांच स्वर्ण, छह रजत व दो कांस्य समेत 13 पदक जीते थे। वहीं वर्ष 2010 में देश की राजधानी दिल्ली में हुए राष्ट्रमंडल खेलों में पहलवानों ने 8 स्वर्ण सहित 17 पदक जीते थे। अब तक भारत राष्ट्रमंडल खेलों में कुश्ती में कुल 114 पदक जीत चुका है।
भारत को पदक तालिका में नीचे लाने की साजिश राष्ट्रमंडल खेलों से कुश्ती को बाहर करना जाना भारत के खिलाफ है। कुश्ती के क्षेत्र में सोनीपत ने अपनी अलग पहचान बनाई है। राष्ट्रमंडल खेलों में हमारे पहलवानों का कोई सानी नहीं है। राष्ट्रमंडल खेलों से कुश्ती को बाहर करने के फैसले ने पहलवानों को निराश किया है। सरकार से मांग है कि कुश्ती को राष्ट्रमंडल खेलों में शामिल कराने के लिए प्रयास करें। -कुलदीप मलिक, अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षक
भारत के लिए बड़ा झटका
राष्ट्रमंडल खेलों से कुश्ती को बाहर करना भारत के लिए बड़ा झटका है। पिछला रिकॉर्ड देखें तो देश ने पहलवानों ने इसी स्पर्धा में सबसे ज्यादा पदक जीते हैं। इस फैसले का सबसे अधिक नुकसान भारत को ही होगा। कुश्ती को राष्ट्रमंडल खेलों से बाहर रखा जाता है तो यह पहलवानों के लिए काला दिन होगा। भारतीय पहलवान कुश्ती में काफी पदक जीत रहे हैं। भारत को इस फैसले का विरोध करना चाहिए। -राज सिंह छिक्कारा, अंतरराष्ट्रीय कुश्ती प्रशिक्षक
आहत करने वाला है फैसला
कुश्ती को राष्ट्रमंडल खेलों से बाहर करने का फैसला आहत करने वाला है। राष्ट्रमंडल खेलों में हमारे पहलवानों का प्रदर्शन शानदार रहा है। भारत ही एक ऐसा देश है, जो सभी 20 भार वर्गों में पदक जीतने को चुनौती देता है। भारतीय कुश्ती संघ को इसे लेकर कड़ा संज्ञान लेना चाहिए। खेल संघ कुश्ती को वापस राष्ट्रमंडल खेल का हिस्सा बनवाने के लिए ठोस कदम उठाएं। भारतीय पहलवानों संग यह बहुत बड़ी नाइंसाफी है। राष्ट्रमंडल खेलों की पदक तालिका में देश को नीचे करने के लिए यह साजिश की जा रही है। सभी फेडरेशन को इसे लेकर मिलकर लड़ाई लड़नी चाहिए। -ओमप्रकाश दहिया, द्रोणाचार्य अवॉर्डी
इस फैसले से टूटेगा पहलवानों का मनोबल
कुश्ती को राष्ट्रमंडल खेलों से बाहर किए जाने का फैसला बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। कुश्ती स्पर्धा में देश के पहलवानों ने सदैव तिरंगे का मान बढ़ाया है। पुरुष हों या महिला पहलवान सभी ने कुश्ती में लगातार शानदार प्रदर्शन किया है। भारत कुश्ती में सिरमौर बन चुका है। ऐसी स्थिति में कुश्ती को बाहर करने से पहलवानों का मनोबल टूटेगा। इससे देश के लाखों युवाओं को निराशा होगी। कुश्ती में देश के पहलवानों का प्रदर्शन लगातार सराहनीय रहा है। ओलंपिक हो या राष्ट्रमंडल खेल कुश्ती की स्पर्धा शुरू होते ही पदक तालिका में एकदम से भारत का स्थान बदल जाता है। इस फैसलने पर दोबारा से विचार किए जाने की आवश्यकता है। -बजरंग पूनिया, ओलंपिक कांस्य पदक विजेता
हैरान करने वाला फैसला
राष्ट्रमंडल खेलों से कुश्ती को बाहर करने का फैसला हैरान करने वाला है। वर्ष 2002 में भी राष्ट्रमंडल खेलों से कुश्ती को बाहर किया गया था, लेकिन बाद में विरोध किए जाने पर कुश्ती को फिर से शामिल किया गया। पहले की तरह सभी पहलवानों व प्रशिक्षकों को एकजुट होकर इसका विरोध करना होगा। यह पहलवानों के साथ ही देश के लिए दुखद खबर है। पहलवानों ने सदैव बेहतर प्रदर्शन कर देश का मान बढ़ाया है। -योगेश्वर दत्त, ओलंपिक कांस्य पदक विजेता।
सरकार आगे आकर करे पैरवी
देेश के पहलवानों ने कुश्ती में देश का मान बढ़ाया है। कोई भी स्पर्धा हो देश के पहलवान पदक जीतकर देशवासियों को झूमने का अवसर प्रदान कर रहे हैं। कुश्ती को बाहर करने से भारत को बड़ा नुकसान झेलना पड़ेगा। राष्ट्रमंडल संघ को इस बारे में फिर से विचार करना चाहिए। सरकार को भी आगे आकर पैरवी करनी चाहिए ताकि पहलवानों का मनोबल टूटने से बचाया जा सके। -अनिल खत्री, राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक विजेता