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हमें तकनीकी का उपयोगकर्ता ही नहीं, सृजनकर्ता बनना है : कुलपति
Fri, 21 Nov 2025 12:21 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Fri, 21 Nov 2025 12:21 AM IST
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फोटाे 03- सोनीपत के मुरथल स्थित दीनबंधु छोटू राम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में का
सोनीपत। मुरथल स्थित दीनबंधु छोटू राम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (डीसीआरयूएसटी) की एनएसएस इकाई की ओर से एआई को लेकर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कुलपति प्रो. श्रीप्रकाश सिंह ने हमें तकनीक का उपभोक्ता ही नहीं बल्कि तकनीक का सृजनकर्ता बनना होगा।
उन्होंने बताया कि एआई आज मानव जीवन के हर क्षेत्र को प्रभावित कर रही है इसलिए युवाओं को इस क्षेत्र में शोध, नवाचार, अध्ययन पर जोर देना होगा। कृत्रिम बुद्धिमत्ता हमारी प्रगति का साधन बन सकती है लेकिन हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि तकनीक हमारी रचनात्मकता को समाप्त न कर दे।
कुलपति ने कहा कि नई पीढ़ी की बड़ी जिम्मेदारी है कि वह अपने ज्ञान, कौशल का उपयोग भारत के उत्थान के लिए करे। विद्यार्थियों में जब सेवा, तकनीक, संवेदनशीलता का संगम होगा तभी हम विकसित, आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को साकार कर पाएंगे।
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एनएसएस केवल एक गतिविधि नहीं बल्कि समाज को बदलने की एक जीवंत प्रक्रिया है। सभी एनएसएस स्वयंसेवकों को तकनीक, सेवा, संवेदनशीलता को साथ लेकर राष्ट्र निर्माण में योगदान देना चाहिए।
ग्रामीण विकास देश की प्रगति का आधार : डाॅ. वीरेंद्र सिंह
अतिथि हरियाणा ग्रामीण विकास संस्थान के निदेशक डाॅ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि ग्रामीण विकास देश की प्रगति का आधार है। देश की 65 फीसदी जनसंख्या आज भी गांवों में निवास करती है। भारतीय गांव केवल भौगोलिक इकाइयां नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति, परंपरा व वास्तविक जीवन का आधार हैं। यदि गांव मजबूत होंगे तो भारत अपने आप मजबूत हो जाएगा।
एनएसएस स्वयंसेवकों को ग्रामीण समस्याओं का समाधान तकनीक, जागरूकता, जन सहभागिता के माध्यम से करना चाहिए। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का प्रत्येक स्वयंसेवक अपने निकट के किसी गांव को अपनाएं। वहां के जीवनस्तर को बेहतर बनाने के लिए कार्य करे। विद्यार्थियों को तकनीक का वास्तविक उपयोग ग्रामीण जीवन को सरल, सुगम, सुरक्षित बनाने में करना चाहिए।
कार्यक्रम में एनएसएस समन्वयक प्रो. अनिल सिंधु, प्रो. अशोक शर्मा, डाॅ. ममता भगत, डाॅ. सुदेश चौधरी, डाॅ. प्रदीप शर्मा, डाॅ. देवानंद शर्मा मौजूद रहे।
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उन्होंने बताया कि एआई आज मानव जीवन के हर क्षेत्र को प्रभावित कर रही है इसलिए युवाओं को इस क्षेत्र में शोध, नवाचार, अध्ययन पर जोर देना होगा। कृत्रिम बुद्धिमत्ता हमारी प्रगति का साधन बन सकती है लेकिन हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि तकनीक हमारी रचनात्मकता को समाप्त न कर दे।
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कुलपति ने कहा कि नई पीढ़ी की बड़ी जिम्मेदारी है कि वह अपने ज्ञान, कौशल का उपयोग भारत के उत्थान के लिए करे। विद्यार्थियों में जब सेवा, तकनीक, संवेदनशीलता का संगम होगा तभी हम विकसित, आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को साकार कर पाएंगे।
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एनएसएस केवल एक गतिविधि नहीं बल्कि समाज को बदलने की एक जीवंत प्रक्रिया है। सभी एनएसएस स्वयंसेवकों को तकनीक, सेवा, संवेदनशीलता को साथ लेकर राष्ट्र निर्माण में योगदान देना चाहिए।
ग्रामीण विकास देश की प्रगति का आधार : डाॅ. वीरेंद्र सिंह
अतिथि हरियाणा ग्रामीण विकास संस्थान के निदेशक डाॅ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि ग्रामीण विकास देश की प्रगति का आधार है। देश की 65 फीसदी जनसंख्या आज भी गांवों में निवास करती है। भारतीय गांव केवल भौगोलिक इकाइयां नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति, परंपरा व वास्तविक जीवन का आधार हैं। यदि गांव मजबूत होंगे तो भारत अपने आप मजबूत हो जाएगा।
एनएसएस स्वयंसेवकों को ग्रामीण समस्याओं का समाधान तकनीक, जागरूकता, जन सहभागिता के माध्यम से करना चाहिए। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का प्रत्येक स्वयंसेवक अपने निकट के किसी गांव को अपनाएं। वहां के जीवनस्तर को बेहतर बनाने के लिए कार्य करे। विद्यार्थियों को तकनीक का वास्तविक उपयोग ग्रामीण जीवन को सरल, सुगम, सुरक्षित बनाने में करना चाहिए।
कार्यक्रम में एनएसएस समन्वयक प्रो. अनिल सिंधु, प्रो. अशोक शर्मा, डाॅ. ममता भगत, डाॅ. सुदेश चौधरी, डाॅ. प्रदीप शर्मा, डाॅ. देवानंद शर्मा मौजूद रहे।