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बेहद खराब हुई जिले की हवा, मास्क व चश्मा लगाकर बाहर निकलें
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प्रदूषण से वातावरण में छाई धुंध के कारण कम हुई दृश्यता के बीच दिन में लाइट जलाकर चलते वाहन। संवाद
- फोटो : Sonipat
वायु प्रदूषण को कम करने के लिए एनजीटी द्वारा पटाखे न जलाने के दिए आदेश दिवाली पर धुएं में उड़ते नजर आए। दिवाली पर गांवों से लेकर शहर तक जमकर आतिशबाजी हुई, जिससे जिले की हवा बेहद खराब हो गई। लोगों को सांस लेने में परेशानी होती रही, साथ ही आंखों में जलन की समस्या का भी सामना करना पड़ा। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि घर से बाहर निकलना है तो मास्क व चश्मा लगाकर निकलें। दिवाली पर आतिशबाजी के कारण एक्यूआई (एयर क्वालिटी इंडेक्स) 412 तक पहुंच गया। शुक्रवार को इसमें कोई गिरावट नहीं आई। दोपहर 12 बजे यह 413 तक बना रहा। हालांकि हवा का एक्यूआई (एअर क्वालिटी इंडेक्स) 100 माइक्रोग्राम प्रति मीट्रिक क्यूब तक होना चाहिए।
लगातार बढ़ रहे प्रदूषण को रोकने के लिए एनजीटी ने दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में पटाखे जलाने पर पाबंदी लगाई थी। साथ ही नियमों की अवहेलना करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए थे। दिवाली से पहले ही जिला प्रशासन द्वारा विभिन्न माध्यम से लोगों को पटाखा रहित दिवाली मनाने के लिए जागरूक किया गया था, लेकिन दिवाली पर्व के उल्लास में लोग सभी नियमों को भूल गए और दिवाली पर देर रात तक जमकर आतिशबाजी होती रही।
खतरनाक स्तर पर पहुंचा वायु गुणवत्ता स्तर
दिवाली पर देर रात तक आतिशबाजी के कारण वायु गुणवत्ता स्तर 412 तक पहुंच गया था। शुक्रवार को इसमें गिरावट नहीं आई। दोपहर 12 बजे यह 413 रहा, जो सेहत के लिए खराब है। लोगों को आंखों में जलन व सांस लेने में दिक्कतों का सामना करना पड़ा। दिनभर वातावरण में प्रदूषण की परत के तौर पर धुंध छाई रही। सुबह के समय दृश्यता बेहद कम रही। जीटी रोड सहित मार्गों पर वाहन दिन में भी लाइट जलाकर चलते दिखाई दिए।
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डीसी के नेतृत्व में प्रशासनिक अधिकारियों ने किया निरीक्षण
एनजीटी के आदेशों का पालन करवाने के लिए दिवाली पर्व पर डीसी ललित सिवाच के नेतृत्व में प्रशासनिक अधिकारियों ने देर रात तक निरीक्षण किया और शहर के हालात का जायजा लिया। इस दौरान शहर के मॉडल टाउन में पटाखे जलाते हुए एक व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई भी की गई। टीम के साथ संबंधित थाना क्षेत्र की पुलिस भी मौजूद रही।
प्रतिबंध के बावजूद जमकर बिके पटाखे
पटाखे बेचने व चलाने पर भले ही प्रतिबंध हो, लेकिन उसके बावजूद दिवाली पर खूब पटाखे बेचे भी गए और आतिशबाजी भी हुई। सोनीपत शहर में जहां चोरी-छिपे पटाखे बेचे गए, वहीं ग्रामीण क्षेत्र में खुलेआम पटाखे बिके। इस तरह करोड़ों के पटाखे बिकने का अनुमान है। इन पटाखों में पोटेशियम, सल्फर डाईआक्साइड जैसे रसायन होते हैं, जिनका स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है। इस पर पोटेशियम को लोहे के पाइप में भरकर भी लोग पटाखा बनाकर बजाते नजर आए।
मास्क व आंखों पर चश्मा लगाकर निकलें बाहर
नागरिक अस्पताल के फिजिशियन डॉ. शैलेंद्र राणा ने बताया कि दिवाली पर जिस तरह से आतिशबाजी करने पर धुआं छाया रहा। उससे सांस की बीमारी होने की आशंका ज्यादा रहती है। जिन लोगों को पहले से श्वास की बीमारी है, उनके लिए यह धुआं काफी खतरनाक है। धुएं से आंखों में जलन की शिकायत भी सबसे ज्यादा रहती है और आंखों के मरीज भी बढ़ जाते हैं। इस तरह के मौसम में ठंडा पानी नहीं पीना चाहिए, क्योंकि शरीर के अंदर गए कण ठंडे पानी से जम जाते हैं। घर से बाहर निकलना है तो मास्क व चश्मा लगाकर निकलें। आंखों को दिन में कई बार पानी से धोते रहें।
इस तरह होता है औसत एक्यूआई
0-50 अच्छा
51-100 औसत
101-200 मॉडरेट
201-300 खराब
301-400 ज्यादा खराब
400 से ज्यादा बेहद खतरनाक
इस तरह बढ़ा एक्यूआई
4 नवंबर :
देर शाम सात बजे-328
देर शाम आठ बजे -331
रात 10 बजे -343
रात 11 बजे-350
5 नवंबर
तड़के 3 बजे -403
तड़के 5 बजे -400
दोपहर-12 बजे-413
वर्जन
बढ़ते प्रदूषण को रोकने के लिए दिवाली पर लोगों को पटाखे न जलाने के लिए जागरूक किया गया था, लेकिन शहर में विभिन्न स्थानों पर लोगों ने जमकर आतिशबाजी की। रात को शहर के विभिन्न क्षेत्रों का निरीक्षण किया। इस दौरान नियमों की अवहेलना करने वालों के खिलाफ कार्रवाई भी की गई। त्योहारी सीजन में प्रदूषण को फैलने से रोकने के लिए लगातार कारगर कदम उठाए जा रहे हैं।
- ललित सिवाच, उपायुक्त, सोनीपत
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लगातार बढ़ रहे प्रदूषण को रोकने के लिए एनजीटी ने दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में पटाखे जलाने पर पाबंदी लगाई थी। साथ ही नियमों की अवहेलना करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए थे। दिवाली से पहले ही जिला प्रशासन द्वारा विभिन्न माध्यम से लोगों को पटाखा रहित दिवाली मनाने के लिए जागरूक किया गया था, लेकिन दिवाली पर्व के उल्लास में लोग सभी नियमों को भूल गए और दिवाली पर देर रात तक जमकर आतिशबाजी होती रही।
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खतरनाक स्तर पर पहुंचा वायु गुणवत्ता स्तर
दिवाली पर देर रात तक आतिशबाजी के कारण वायु गुणवत्ता स्तर 412 तक पहुंच गया था। शुक्रवार को इसमें गिरावट नहीं आई। दोपहर 12 बजे यह 413 रहा, जो सेहत के लिए खराब है। लोगों को आंखों में जलन व सांस लेने में दिक्कतों का सामना करना पड़ा। दिनभर वातावरण में प्रदूषण की परत के तौर पर धुंध छाई रही। सुबह के समय दृश्यता बेहद कम रही। जीटी रोड सहित मार्गों पर वाहन दिन में भी लाइट जलाकर चलते दिखाई दिए।
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डीसी के नेतृत्व में प्रशासनिक अधिकारियों ने किया निरीक्षण
एनजीटी के आदेशों का पालन करवाने के लिए दिवाली पर्व पर डीसी ललित सिवाच के नेतृत्व में प्रशासनिक अधिकारियों ने देर रात तक निरीक्षण किया और शहर के हालात का जायजा लिया। इस दौरान शहर के मॉडल टाउन में पटाखे जलाते हुए एक व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई भी की गई। टीम के साथ संबंधित थाना क्षेत्र की पुलिस भी मौजूद रही।
प्रतिबंध के बावजूद जमकर बिके पटाखे
पटाखे बेचने व चलाने पर भले ही प्रतिबंध हो, लेकिन उसके बावजूद दिवाली पर खूब पटाखे बेचे भी गए और आतिशबाजी भी हुई। सोनीपत शहर में जहां चोरी-छिपे पटाखे बेचे गए, वहीं ग्रामीण क्षेत्र में खुलेआम पटाखे बिके। इस तरह करोड़ों के पटाखे बिकने का अनुमान है। इन पटाखों में पोटेशियम, सल्फर डाईआक्साइड जैसे रसायन होते हैं, जिनका स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है। इस पर पोटेशियम को लोहे के पाइप में भरकर भी लोग पटाखा बनाकर बजाते नजर आए।
मास्क व आंखों पर चश्मा लगाकर निकलें बाहर
नागरिक अस्पताल के फिजिशियन डॉ. शैलेंद्र राणा ने बताया कि दिवाली पर जिस तरह से आतिशबाजी करने पर धुआं छाया रहा। उससे सांस की बीमारी होने की आशंका ज्यादा रहती है। जिन लोगों को पहले से श्वास की बीमारी है, उनके लिए यह धुआं काफी खतरनाक है। धुएं से आंखों में जलन की शिकायत भी सबसे ज्यादा रहती है और आंखों के मरीज भी बढ़ जाते हैं। इस तरह के मौसम में ठंडा पानी नहीं पीना चाहिए, क्योंकि शरीर के अंदर गए कण ठंडे पानी से जम जाते हैं। घर से बाहर निकलना है तो मास्क व चश्मा लगाकर निकलें। आंखों को दिन में कई बार पानी से धोते रहें।
इस तरह होता है औसत एक्यूआई
0-50 अच्छा
51-100 औसत
101-200 मॉडरेट
201-300 खराब
301-400 ज्यादा खराब
400 से ज्यादा बेहद खतरनाक
इस तरह बढ़ा एक्यूआई
4 नवंबर :
देर शाम सात बजे-328
देर शाम आठ बजे -331
रात 10 बजे -343
रात 11 बजे-350
5 नवंबर
तड़के 3 बजे -403
तड़के 5 बजे -400
दोपहर-12 बजे-413
वर्जन
बढ़ते प्रदूषण को रोकने के लिए दिवाली पर लोगों को पटाखे न जलाने के लिए जागरूक किया गया था, लेकिन शहर में विभिन्न स्थानों पर लोगों ने जमकर आतिशबाजी की। रात को शहर के विभिन्न क्षेत्रों का निरीक्षण किया। इस दौरान नियमों की अवहेलना करने वालों के खिलाफ कार्रवाई भी की गई। त्योहारी सीजन में प्रदूषण को फैलने से रोकने के लिए लगातार कारगर कदम उठाए जा रहे हैं।
- ललित सिवाच, उपायुक्त, सोनीपत

आतिशबाजी के कारण प्रदूषित हुए वातावरण के बीच धुएं की चादर से ढका शहर। संवाद- फोटो : Sonipat