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किसान आंदोलन से हुए नुकसान के लिए व्यापारियों ने मांगा राहत पैकेज

Wed, 24 Nov 2021 01:21 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Wed, 24 Nov 2021 01:21 AM IST
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trederes demond on bellout pacage  for loss off  farmers protest
बैठक में विभिन्न मुद्दों पर बातचीत करते व्यापारी। संवाद - फोटो : Sonipat
कुंडली बॉर्डर पर करीब एक साल से चल रहे किसान आंदोलन के कारण कुंडली, राई, मुरथल व बड़ी के उद्योगों को बड़ा नुकसान झेलना पड़ा है। किसान आंदोलन के कारण यहां 50 प्रतिशत से अधिक उद्योगों पर विपरित प्रभाव पड़ा है। लंबे समय से नुकसान झेल रहे बहुत से उद्योगपति यहां से पलायन तक कर चुके हैं। क्षेत्र के व्यापारियों व दुकानदारों को भी नुकसान झेलना पड़ा है। ऐसे में उद्योगपतियों व व्यापारियों ने किसान आंदोलन से हुए नुकसान के लिए सरकार से राहत पैकेज की मांग की है। साथ ही अन्य मुद्दों पर सरकार को सलाह दी है।
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राई स्थित एथनिक इंडिया रिसोर्ट में मंगलवार को राष्ट्रीय जन उद्योग व्यापार संगठन के प्रतिनिधियों, औद्योगिक क्षेत्र के उद्यमियों व व्यापारी वर्ग के प्रतिनिधियों ने बैठक की। बैठक में विभिन्न मुद्दों पर विचार विमर्श किया गया। इस दौरान कई अहम फैसले लिए गए और अपनी मांगों को सरकार के सामने रखने का निर्णय लिया गया। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित गुप्ता ने कहा कि किसान आंदोलन के कारण दिल्ली से लगते सभी प्रदेशों के बॉर्डर एक साल से बंद हैं। इतने लंबे समय तक कारखाने, रिटेल आउटलेट व छोटे व्यापारी मंदी की मार झेल रहे हैं। सरकार व किसानों के बीच सबसे ज्यादा व्यापारी वर्ग पिसता रहा है। उद्यमियों व व्यापारियों को हुए बड़े नुकसान को देखते हुए सरकार को बड़े राहत पैकेज की घोषणा करनी चाहिए। साथ ही अब कानून वापस लिए जाने पर सभी मार्ग खोले जाएं ताकि कारोबार को दोबारा पटरी पर लाया जा सके। उद्यमियों ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने व्यापारियों की समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया तो वे सड़क से लेकर संसद तक आंदोलन करने मजबूर होंगे।
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कुंडली में 50 प्रतिशत इकाइयां हो चुकी हैं बंद
अमित गुप्ता ने बताया कि अकेले कुंडली में करीब 1400 व्यवसायिक इकाइयां स्थापित हैं। किसान आंदोलन के कारण इनमें से करीब 50 प्रतिशत से अधिक ईकाइयां बंद हो चुकी हैं। जिससे उद्यमी कर्ज के बोझ तले दब चुके हैं। राज्य व केंद्र सरकार ने उद्यमियों की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया। हमारी मांग है कि आंदोलन अवधि का आंकलन करते हुए नुकसान की भरपाई की जाए। बंद औद्योगिक ईकाइयों को एकमुश्त समाधान योजना लाकर दोबारा चालू करवाया जाए। उद्यमियों व फर्मों के लोन पर उस अवधि में पूर्ण ब्याज माफ किया जाए।
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प्रदूषण के लिए उद्योगों को जिम्मेदार ठहराना बंद करे सरकार
राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष अशोक बुवानीवाला ने कहा कि एनसीआर में प्रदूषण के नाम पर उद्योगों को बंद किया जा रहा है। जब भी कोई औद्योगिक इकाई लगाई जाती है तो उसे समयानुसार सरकार के सभी नियम व शर्तें पूरी करनी होती हैं, जिनमें प्रदूषण की नियमावली भी शामिल है। ऐसे में प्रदूषण का जिम्मा उद्योगों पर थोपना गलत है। सरकार उद्यमियों को इस प्रकार प्रताड़ित करना बंद करें। उन्होंने कहा कि बंद हो चुकी ईकाइयों के बिजली के बिल अभी भी आ रहे हैं। सरकार इस तरफ भी ध्यान दें।
आरक्षण प्रणाली से पहले युवाओं को किया जाए प्रशिक्षित
राष्ट्रीय संयोजक संतोष मंगल, जिला व्यापार मंडल के प्रधान संजय सिंगला ने कहा कि किसान आंदोलन से हरियाणा का व्यापारी सबसे अधिक प्रभावित हुआ है। कुंडली बॉर्डर से दिल्ली में कच्चे माल एवं उत्पादन की आवाजाही सबसे ज्यादा प्रभावित हुई है। जिस कारण यहां के व्यापारियों को भूखे मरने की नौबत आ गई है। राष्ट्रीय जन उद्योग व्यापार संगठन के प्रदेश अध्यक्ष गुलशन डंग ने कहा कि प्रदेश सरकार निजी क्षेत्र में 75 प्रतिशत आरक्षण की दोबारा समीक्षा करे, क्योंकि स्थानीय युवाओं में स्कील की कमी है। उन्होंने कहा कि आरक्षण देने से पहले प्रदेश सरकार को स्किल डेवलेपमेंट के संस्थान स्थापित कर युवाओं को पूरा प्रशिक्षण देना चाहिए।

बैठक में राष्ट्रीय वरिष्ठ महामंत्री दीपक अग्रवाल, राष्ट्रीय महासचिव विकास गर्ग, राष्ट्रीय प्रवक्ता अभय जैन, अग्रसेन धाम कुंडली के अध्यक्ष राजेंद्र अग्रवाल, राकेश देवगन, महेंद्र गोयल, विशाल गोयल आदि मौजूद रहे।
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