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महिला मेडिकल कॉलेज के अस्पताल में चिकित्सकों व स्टाफ कर्मियों का टोटा

Wed, 23 Feb 2022 01:29 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Wed, 23 Feb 2022 01:29 AM IST
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Tota of doctors and staff personnel in the hospital of Women's Medical College
बीपीएस राजकीय महिला मेडिकल कॉलेज। संवाद - फोटो : Sonipat
गांव खानपुर कलां स्थित बीपीएस राजकीय महिला मेडिकल कॉलेज के अस्पताल में इन दिनों चिकित्सकों व स्टाफ कर्मियों का टोटा बना हुआ है। हालात यह हैं कि चयनित पदों पर करीब 50 फीसदी यानी 197 चिकित्सक ही अस्पताल में नियुक्त हैं। स्टाफ कर्मियों के भी 38 पद खाली हैं। इस कारण अस्पताल में चिकित्सा सुविधाएं प्रभावित हो रही हैं, जिनके अभाव मरीजों को भी परेशानी उठानी पड़ रही है।
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गांव खानपुर कलां में सरकार की तरफ से 500 बेड का अस्पताल स्थापित किया है। इस अस्पताल में मरीजों के इलाज के लिए आठ विभाग स्थापित हैं, जिनमें स्त्री रोग, फैमिली मेडिसिन, नाक-कान-गला, आंख, रेडियोलॉजी, आर मेडिसिन, एनस्थीसिया व बच्चों का विभाग स्थापित हैं। ऐसे में अस्पताल में हर रोज दो हजार से अधिक मरीजों की ओपीडी होती है। मरीजों को बेहतर इलाज मिल सके, इसके लिए सरकार ने जेआर समेत 408 चिकित्सकों के पद चयनित किए हैं। इसके बावजूद अस्पताल में महज 211 चिकित्सक ही नियुक्त हैं, जिससे 197 पद खाली हैं। 310 स्टाफ कर्मियों के 272 पद भरे हुए हैं, जबकि 38 खाली हैं। ऐसे में यहां सबसे अधिक चिकित्सकों की कमी खल रही है। इस कारण मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिल रही हैं। चिकित्सकों की पूर्ति करने के लिए मेडिकल कॉलेज प्रशासन पीजी की 65 छात्राओं का सहारा ले रहा है, ताकि मरीजों को अधिक परेशानी न हो।
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चिकित्सकों की नियुक्ति में यह आ रही समस्या
मेडिकल कॉलेज प्रशासन के अनुसार, अस्पताल में चिकित्सकों के जो 197 पद खाली हैं, उनमें सर्वाधिक पद रिजर्व कैटेगरी के शामिल हैं। इन पर भर्ती के लिए मेडिकल कॉलेज प्रशासन की तरफ से कई बार विज्ञापन भी जारी किया जा चुका है। इसके बावजूद चिकित्सक यहां आने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं, जिनका खामियाजा आमजन को भुगतना पड़ रहा है।
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वर्जन
मेडिकल कॉलेज के अस्पताल में मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं मुहैया कराने के लिए प्रशासन प्रयासरत है। चिकित्सकों के जो पद खाली हैं, उनमें अधिकतर रिजर्व कैटेगरी के हैं। बार-बार विज्ञापन जारी करने के बाद भी नए चिकित्सक नहीं आ रहे हैं। फिर भी मेडिकल कॉलेज प्रशासन की तरफ से मरीजों की सुविधा के लिए पीजी छात्राओं की ड्यूटी लगाई जा रही है, ताकि उन्हें कोई परेशानी न हो।
- डॉ. राजीव महेंद्रु, निदेशक, बीपीएस राजकीय महिला मेडिकल कॉलेज
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