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Sonipat News: विदेशी कॉल को स्थानीय में बदलकर लोगों तक पहुंचाने वाले गैंग के मुख्य आरोपी
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अवैध टेलीफोन एक्सचेंज चलाने का आरोपी पुलिस टीम के साथ। संवाद
- फोटो : Sonipat
रामनगर स्थित पत्थर वाली गली में अवैध टेलीफोन एक्सचेंज चलाने के मामले में साइबर थाना पुलिस ने तीसरे आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी विदेशी कॉल को स्थानीय वॉयस कॉल बनाकर आठ राज्यों के लोगों को सुनवाते थे। आरोपी विदेशी कॉल को सरकार की अनुमति के बिना चोरी से लोगों को सुनवाते थे। इससे सरकार को आर्थिक नुकसान होने के साथ ही राष्ट्र सुरक्षा के लिए खतरा होने की आशंका थी। पुलिस ने एक्सचेंज चलाने वाले सेवानिवृत्त बीएसएनएल कर्मी व मकान मालिक को जेल भेज चुकी है। वहीं मुख्य आरोपी को रिमांड पर लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। अवैध एक्सचेंज को हांगकांग में बैठी दो महिलाओं की मदद से चलाया जा रहा था।
मुख्यमंत्री उड़नदस्ता की टीम ने साइबर थाना पुलिस के साथ 12 अक्तूबर को रामनगर स्थित पत्थर वाली गली में सुनील कुमार के मकान पर छापा मारा था। वहां पर अवैध टेलीफोन एक्सचेंज पकड़ा था। वह बिना लाइसेंस के विदेश से आने वाली वॉयस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल (वीओआईपी) को लोकर बनाकर देश के कई राज्यों के लोगों तक पहुंचाते थे। इन विदेशी कॉल पर सरकार की निगरानी नहीं थी। इसके साथ ही सरकार को बड़े स्तर पर राजस्व की क्षति हो रही थी। पुलिस जांच में सामने आया कि सुनील कुमार का घर कोने में एक तरफ है। वहां पर ज्यादा लोगों की आवाजाही नहीं है।
सुनील कुमार के घर को रामनगर के ही रहने वाले राजकुमार पांडेय ने किराये पर लिया हुआ था। वह अवैध रूप एक्सचेंज चला रहा था। टीम ने उसे पकड़ लिया था। उससे 13 हजार रुपये बरामद किए थे। आरोपी सुनील कुमार और राजकुमार पांडे को पुलिस ने जेल भेज दिया था। सुनील ने बिना किसी कागजात के राजकुमार को अपना घर किराए पर दे रखा था। आरोपी ने पुलिस को एक्सचेंज का संचालन कराने वाले मास्टरमाइंड की जानकारी दी थी। जिस पर साइबर थाना पुलिस ने मामले में आरोपी उत्तराखंड के देहरादून स्थित संगम विहार निवासी अनुराग गुप्ता को गिरफ्तार कर लिया है। उसके पास से एक लैपटॉप और 22 हजार रुपये बरामद किए गए हैं। अनुराग गुप्ता को रिमांड पर लेकर पूछताछ की जा रही है। कंप्यूटर के मास्टरमाइंड अनुराग ने साइबर टीम को बताया है कि वह उसका संपर्क हांगकांग की रहने वाली महिला मेडिसिन व सेमहुई से सोशल मीडिया के माध्यम से हुआ था। महिलाओं ने अनुराग को इस तरह के अवैध एक्सचेंज चलाने के बारे में बताया था। पुलिस उससे लगातार पूछताछ कर रही है।
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हांगकांग से चलाया जा रहा था अवैध एक्सचेंज
हांगकांग में बैठी दो महिला अनुराग से मिलकर वहां से अवैध एक्सचेंज चलाने में मदद कर रही थीं। वह कनाडा, यूएसए और हांगकांग से आने वाली कॉल को अनुराग गुप्ता के अवैध एक्सचेंज में भेजती थी। वह इन कॉल को अवैध एक्सचेंज में वॉयस कॉल में बदलकर आगे लोगों को सुनवाता था। यह जम्मू कश्मीर, पंजाब, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और दिल्ली के लोगों से बातचीत कराते थे। पुलिस इनको संदिग्ध मानकर उनके बारे में जांच कर रही है।
ऐसे होती है वीओआईपी से बातचीत
वॉयस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल तकनीक से यह बातचीत कराई जाती थी। इसमें कॉल को वॉयस पैकेज के रूप में भेजा जाता है। इसको एक्सचेंज में परिवर्तित करके वॉयस कॉल बना लिया जाता है। इसके लिए किसी वायर लाइन की जरूरत नहीं होती है। इस तरह के एक्सचेंज के लिए 2.50 करोड़ रुपये की सरकारी फीस देनी होती है और उन कॉल की सरकार की तरफ से निगरानी होती है।
साइबर टीम तीन आरोपियों को काबू कर चुकी है। गैंग के अन्य सदस्यों के बारे में पता लगाने के साथ ही पता लगाया जा रहा है कि यह कोई देश विरोधी काम तो नहीं करा रहे थे। यह भी पता लगाया जा रहा है कि इनके संबंध अन्य किन देशों में थे। सुनील ने बिना पुलिस सत्यापन व बिना एग्रीमेंट के घर दे रखा था। जिसके चलते उसे गिरफ्तार किया गया। -इंस्पेक्टर राजीव कुमार, प्रभारी साइबर थाना सोनीपत
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मुख्यमंत्री उड़नदस्ता की टीम ने साइबर थाना पुलिस के साथ 12 अक्तूबर को रामनगर स्थित पत्थर वाली गली में सुनील कुमार के मकान पर छापा मारा था। वहां पर अवैध टेलीफोन एक्सचेंज पकड़ा था। वह बिना लाइसेंस के विदेश से आने वाली वॉयस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल (वीओआईपी) को लोकर बनाकर देश के कई राज्यों के लोगों तक पहुंचाते थे। इन विदेशी कॉल पर सरकार की निगरानी नहीं थी। इसके साथ ही सरकार को बड़े स्तर पर राजस्व की क्षति हो रही थी। पुलिस जांच में सामने आया कि सुनील कुमार का घर कोने में एक तरफ है। वहां पर ज्यादा लोगों की आवाजाही नहीं है।
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सुनील कुमार के घर को रामनगर के ही रहने वाले राजकुमार पांडेय ने किराये पर लिया हुआ था। वह अवैध रूप एक्सचेंज चला रहा था। टीम ने उसे पकड़ लिया था। उससे 13 हजार रुपये बरामद किए थे। आरोपी सुनील कुमार और राजकुमार पांडे को पुलिस ने जेल भेज दिया था। सुनील ने बिना किसी कागजात के राजकुमार को अपना घर किराए पर दे रखा था। आरोपी ने पुलिस को एक्सचेंज का संचालन कराने वाले मास्टरमाइंड की जानकारी दी थी। जिस पर साइबर थाना पुलिस ने मामले में आरोपी उत्तराखंड के देहरादून स्थित संगम विहार निवासी अनुराग गुप्ता को गिरफ्तार कर लिया है। उसके पास से एक लैपटॉप और 22 हजार रुपये बरामद किए गए हैं। अनुराग गुप्ता को रिमांड पर लेकर पूछताछ की जा रही है। कंप्यूटर के मास्टरमाइंड अनुराग ने साइबर टीम को बताया है कि वह उसका संपर्क हांगकांग की रहने वाली महिला मेडिसिन व सेमहुई से सोशल मीडिया के माध्यम से हुआ था। महिलाओं ने अनुराग को इस तरह के अवैध एक्सचेंज चलाने के बारे में बताया था। पुलिस उससे लगातार पूछताछ कर रही है।
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हांगकांग से चलाया जा रहा था अवैध एक्सचेंज
हांगकांग में बैठी दो महिला अनुराग से मिलकर वहां से अवैध एक्सचेंज चलाने में मदद कर रही थीं। वह कनाडा, यूएसए और हांगकांग से आने वाली कॉल को अनुराग गुप्ता के अवैध एक्सचेंज में भेजती थी। वह इन कॉल को अवैध एक्सचेंज में वॉयस कॉल में बदलकर आगे लोगों को सुनवाता था। यह जम्मू कश्मीर, पंजाब, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और दिल्ली के लोगों से बातचीत कराते थे। पुलिस इनको संदिग्ध मानकर उनके बारे में जांच कर रही है।
ऐसे होती है वीओआईपी से बातचीत
वॉयस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल तकनीक से यह बातचीत कराई जाती थी। इसमें कॉल को वॉयस पैकेज के रूप में भेजा जाता है। इसको एक्सचेंज में परिवर्तित करके वॉयस कॉल बना लिया जाता है। इसके लिए किसी वायर लाइन की जरूरत नहीं होती है। इस तरह के एक्सचेंज के लिए 2.50 करोड़ रुपये की सरकारी फीस देनी होती है और उन कॉल की सरकार की तरफ से निगरानी होती है।
साइबर टीम तीन आरोपियों को काबू कर चुकी है। गैंग के अन्य सदस्यों के बारे में पता लगाने के साथ ही पता लगाया जा रहा है कि यह कोई देश विरोधी काम तो नहीं करा रहे थे। यह भी पता लगाया जा रहा है कि इनके संबंध अन्य किन देशों में थे। सुनील ने बिना पुलिस सत्यापन व बिना एग्रीमेंट के घर दे रखा था। जिसके चलते उसे गिरफ्तार किया गया। -इंस्पेक्टर राजीव कुमार, प्रभारी साइबर थाना सोनीपत