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Sonipat News: ओलंपिक में फिर कांसा लाया सुमित, बजे ढोल-नगाड़े, समर्थकों ने बरसाए पुष्प

Tue, 13 Aug 2024 11:25 PM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत Updated Tue, 13 Aug 2024 11:25 PM IST
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Sumit again brought bronze in Olympics, drums played, supporters showered flowers
राई। मैं ओलंपिक पदक अपने देशवासियों व अपनी मां को समर्पित करना चाहता हूं। हमने किसी भी मुकाबले को हल्के में नहीं लिया, सभी मुकाबलों में जी जान लगा कर खेलें। स्वर्ण पदक न जीतने का मलाल जरूर है, लेकिन कप्तान ने कहा था कि खाली हाथ वापस नहीं लौटना। करो या मरो के मुकाबले में सभी ने अपनी जी-जान लगा दी। यह बात अमर उजाला से विशेष बातचीत में पेरिस ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने वाली भारतीय पुरुष हॉकी टीम के सदस्य एवं गांव कुराड़-इब्राहिमपुर निवासी सुमित कुमार ने कही।
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वह मंगलवार को अपने गांव पहुंचे थे। गांव पहुंचने पर उनका पुष्प वर्षा कर भव्य स्वागत किया गया। दिल्ली से आते समय बहालगढ़ चौक पर सुमित को सनरूफ कार में धूम-धड़ाके के साथ गांव तक लाया गया। बहालगढ़, बीसवां मील, राई में वाहनों का काफिला लेकर खेल प्रेमियों ने डीजे पर बज रहे गीतों पर नाचते हुए सुमित का स्वागत किया। सुमित ने कहा कि लगातार दूसरी बार ओलंपिक में कांस्य पदक जीतकर बेहद खुश हूं। पूरी टीम ने एकजुट होकर बेहतर प्रदर्शन किया है। टीम प्रबंधन ने हर मुकाबले के लिए पहले ही रणनीति बनाई थी। क्वार्टरफाइनल मुकाबले में अमित रोहिदास को रेड कार्ड मिलने पर उन्होंने कहा कि इसके बाद पूरी टीम के साथ मेरी जिम्मेदारी भी बढ़ गई थी। पूरी टीम का संतुलन गड़बड़ा गया था, पूरी टीम ने यह संकल्प लिया था कि यह मुकाबला नहीं हारना है। क्वार्टर फाइनल में जीतने के बाद टी शर्ट निकाल कर फहराने पर सुमित ने कहा कि मुकाबला जीतने के बाद बहुत ज्यादा खुशी थी, अति उत्साहित होकर टी शर्ट लहराकर खुशी जाहिर की। सेमीफाइनल में मिली हार के बाद टीम ने मन में ठान लिया था कि यहां से खाली हाथ वापस नहीं जाना है, कांस्य पदक के लिए हुए मुकाबले में ऐड़ी चोटी का जोर लगा दिया था। उन्होंने कहा कि खेल प्रेमियों का प्यार व भरोसा यूं ही बना रहा तो भविष्य में पदक का रंग जरूर बदलेंगे।
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मां हमेशा मेरे साथ, उनसे मिलती हैं प्रेरणा
सुमित ने कहा कि मैदान पर खेलते समय हमेशा लगा कि मेरी मां मेरे साथ है और मुझे अंदर से प्रेरित करती रही कि देश के लिए कुछ बेहतर करना है। टोक्यो ओलंपिक से करीब छह माह पहले सुमित कुमार की माता का निधन हो गया था। सुमित ने मां के झुमके तुड़वाकर लॉकेट बनवाया था। इसमें उनकी मां की तस्वीर लगी हुई हैं।
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पदक जीत लौटे लाडले को लगाया गले

पेरिस ओलंपिक में देश के लिए पदक जीतकर लौटे सुमित जैसे ही बहालगढ़ चौक पर पहुंचे खेल प्रेमियों ने फूलों की वर्षा कर जोरदार स्वागत किया। ढोल नगाड़ों, बीन बांसुरी की धुन व डीजे की धमक पर खेल प्रेमी झूमते हुए सुमित को गांव कुराड़-इब्राहिमपुर लेकर पहुंचे, जहां ग्रामीणों ने उसे गले लगा लिया और फूलमाला पहनाकर जोरदार स्वागत किया गया। इस दौरान सुमित के भाई जयसिंह व अमित भी उनके साथ रहे।
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