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Sonipat News: राष्ट्रमंडल में छठे स्थान पर रहे सुधीर, 183 किलोग्राम भार उठा किया अब तक का शानदार प्रदर्शन

Sat, 25 Jul 2026 08:29 PM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत Updated Sat, 25 Jul 2026 08:29 PM IST
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Sudhir finished sixth at the Commonwealth Games, delivering a stellar performance by lifting 183 kg.
फोटो :: सुधीर लाठ
संवाद न्यूज एजेंसी
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सोनीपत। स्कॉटलैंड के ग्लासगो में आयोजित राष्ट्रमंडल खेल 2026 की पुरुष हेवीवेट पैरा पावरलिफ्टिंग स्पर्धा में सोनीपत के स्टार पैरा पावरलिफ्टर सुधीर लाठ ने दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाडिय़ों के बीच बेहतर प्रदर्शन करते हुए छठा स्थान हासिल किया। पदक भले इस बार उनकी झोली में नहीं आया, लेकिन उनकी चुनौती अंत तक मजबूत बनी रही।
भारत के पहले राष्ट्रमंडल पैरा पावरलिफ्टिंग स्वर्ण पदक विजेता सुधीर ने प्रतियोगिता में अपने पहले दो प्रयासों में 182 और 183 किलोग्राम का भार सफलतापूर्वक उठाया। यह उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन था। तीसरे प्रयास में उन्होंने 211 किलोग्राम का भार उठाकर बड़ा दांव खेला, हालांकि यह प्रयास सफल नहीं हो सका। कुल 114.1 अंक के साथ उन्होंने छठा स्थान प्राप्त किया। अंतरराष्ट्रीय स्तर की कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच उनका यह प्रदर्शन उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति और उच्च स्तरीय तैयारी का परिचायक रहा।
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सुधीर ने फोन पर बताया कि पदक से चूकने के बावजूद यह प्रतियोगिता उनके लिए विशेष रही है क्योंकि उन्होंने हाल ही में हाथ की गंभीर मांसपेशीय चोट से उबरकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर वापसी की है। लंबे समय तक चोट के कारण नियमित अभ्यास प्रभावित रहा था।
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रोज पांच घंटे मेहनत करते थे सुधीर
ग्लासगो रवाना होने से पहले सुधीर दिल्ली में प्रतिदिन करीब पांच घंटे अभ्यास करते थे। सुबह तीन घंटे और शाम दो घंटे के कठिन प्रशिक्षण के साथ उन्होंने अपनी ताकत और फिटनेस को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उनका आत्मविश्वास और समर्पण आज भी युवा खिलाडिय़ों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

संघर्षपूर्ण रहा जीवन
सोनीपत के गांव लाठ के एक साधारण किसान परिवार से निकलकर अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाने वाले सुधीर का जीवन संघर्ष और सफलता की मिसाल है। तीन वर्ष की उम्र में बुखार के बाद लगाए गए इंजेक्शन के कारण वह दिव्यांग हो गए थे, लेकिन उन्होंने परिस्थितियों को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। वर्ष 2013 में फिटनेस के लिए पावरलिफ्टिंग शुरू की और पैरा खिलाड़ी वीरेंद्र धनखड़ से प्रेरित होकर इसी खेल को अपना जीवन बना लिया। महज दो वर्षों में राष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण जीतने के बाद उन्होंने लगातार नई उपलब्धियां हासिल कीं।


बेहतरीन रही हैं उपलब्धियां
सुधीर लगातार आठ बार राष्ट्रीय चैंपियन रहे हैं। दो बार स्ट्रांगमैन ऑफ इंडिया का खिताब जीत चुके हैं। वर्ष 2019 एशियन पैरा चैंपियनशिप और 2021 एशिया-ओसियाना ओपन पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता। वर्ष 2022 के बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेलों में उन्होंने भारत को पैरा पावरलिफ्टिंग का पहला स्वर्ण पदक दिलाकर इतिहास रचा। इसके बाद 2025 खेलो इंडिया और राष्ट्रीय चैंपियनशिप में भी स्वर्ण पदक जीतकर अपनी बादशाहत बरकरार रखी।
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