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दमघोंटू होने लगी हवा, सुबह व रात को छा रहा स्मॉग
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जीटी रोड पर बीसवां मील के पास वातावरण में छाया स्मॉग। संवाद
- फोटो : Sonipat
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दिल्ली-एनसीआर में शामिल सोनीपत जिले में प्रदूषण की हालत बेहद खराब है। सुबह-रात को स्मॉग छाने से लोगों की परेशानी बढ़ने लगी है। धुंध और उसमें शामिल धूल, धुएं के कणों के कारण सांस लेने में परेशानी होने लगी है। साथ ही गले में खराश महसूस होने लगी है। मंगलवार सुबह कई इलाकों में स्मॉग के कारण हवा दमघोंटू बनी रही। जीटी रोड पर सुबह वाहन चालकों को भी परेशानी महसूस हुई।
सर्दी बढ़ने के साथ ही वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ने लगा है। सुबह-शाम तो स्मॉग छा जाता है। रात को इससे ज्यादा दिक्कत होती है। दिन में हवा चलने से मौसम थोड़ा साफ हो जाता है लेकिन यह समस्या कम नहीं हो रही है। जिले का एयर क्वालिटी इंडेक्स बढ़ रहा है। यह बेहद खराब स्तर पर जा चुका है। सर्दी बढऩे के साथ ही प्रदूषण के स्तर में और इजाफा होने का अनुमान है।
पीएम-10 का स्तर 413 पहुंचा
जिले में मंगलवार को पीएम-10 का स्तर 413 व पीएम 2.5 का स्तर 425 तक पहुंच गया है। यह स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक हैँ।
बुजुर्गों को घर पर रहने की सलाह
बढ़ता प्रदूषण लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर डालता है। इसमें बुजुर्गों और सांस के मरीजों के लिए यह बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। स्मॉग के साथ अनेक प्रकार के प्रदूषित तत्व मिले होते हैं। यह शरीर में जाकर सांस से संबंधित रोग के कारण बनते हैं। चिकित्सक स्मॉग में बाहर न निकलने की हिदायत देने लगे हैं। वह सुबह-शाम घूमने वालों को सावधानी बरतने की कह रहे हैं। साथ ही लोगों को बेहतर क्वालिटी का मास्क लगाने के लिए हिदायत दे रहे हैं।
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अस्पताल में श्वास के मरीजों की संख्या बढ़ी
जिले में प्रदूषण का स्तर ज्यादा बढऩे के कारण जिला अस्पताल में सांस के मरीज बढ़े हैं। सांस के मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है। रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने से सबसे अधिक बुजुर्ग इसका शिकार हो रहे हैं। जिला अस्पताल में रोज 90 से 100 मरीज रोजाना इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। पहले 50 से 60 सांस के मरीज पहुंचते थे।
श्वास नली में आ जाती है सूजन
चिकित्सक के अनुसार बढ़ते प्रदूषण के कारण सांस के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। अस्थमा में सांस नली या इससे जुड़े हिस्सों में सूजन आ जाती है। इसके चलते फेफड़ों में हवा जाने में रुकावट पैदा होती है। इससे सांस लेने में परेशानी होने लगती है।
वर्जन
सर्दी की शुरुआत के साथ बढ़ रहे प्रदूषण के स्तर की वजह से सांस के मरीजों की ओपीडी लगातार बढ़ रही है। प्रदूषण से बुजुर्गो में अस्थमा का अटैक आने की आशंका बढ़ जाती है। अटैक आने पर शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को ऑक्सीजन की आपूर्ति बंद हो जाती है। ऐसे में मरीज की जान भी जा सकती है।
डॉ. संदीप शर्मा, फिजिशयन, जिला नागरिक अस्पताल सोनीपत
वर्जन
प्रदूषण फैलाने वालों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। वहीं पराली जलाने वालों पर कृषि विभाग कार्रवाई कर रहा है। मेरी टीम भी लगातार प्रदूषण फैलाने वालों पर शिकंजा कस रही है। लोगों को बेहतर मास्क लगाने की सलाह भी दी जा रही है।
-भूपेंद्र सिंह, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड।
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सर्दी बढ़ने के साथ ही वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ने लगा है। सुबह-शाम तो स्मॉग छा जाता है। रात को इससे ज्यादा दिक्कत होती है। दिन में हवा चलने से मौसम थोड़ा साफ हो जाता है लेकिन यह समस्या कम नहीं हो रही है। जिले का एयर क्वालिटी इंडेक्स बढ़ रहा है। यह बेहद खराब स्तर पर जा चुका है। सर्दी बढऩे के साथ ही प्रदूषण के स्तर में और इजाफा होने का अनुमान है।
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पीएम-10 का स्तर 413 पहुंचा
जिले में मंगलवार को पीएम-10 का स्तर 413 व पीएम 2.5 का स्तर 425 तक पहुंच गया है। यह स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक हैँ।
बुजुर्गों को घर पर रहने की सलाह
बढ़ता प्रदूषण लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर डालता है। इसमें बुजुर्गों और सांस के मरीजों के लिए यह बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। स्मॉग के साथ अनेक प्रकार के प्रदूषित तत्व मिले होते हैं। यह शरीर में जाकर सांस से संबंधित रोग के कारण बनते हैं। चिकित्सक स्मॉग में बाहर न निकलने की हिदायत देने लगे हैं। वह सुबह-शाम घूमने वालों को सावधानी बरतने की कह रहे हैं। साथ ही लोगों को बेहतर क्वालिटी का मास्क लगाने के लिए हिदायत दे रहे हैं।
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अस्पताल में श्वास के मरीजों की संख्या बढ़ी
जिले में प्रदूषण का स्तर ज्यादा बढऩे के कारण जिला अस्पताल में सांस के मरीज बढ़े हैं। सांस के मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है। रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने से सबसे अधिक बुजुर्ग इसका शिकार हो रहे हैं। जिला अस्पताल में रोज 90 से 100 मरीज रोजाना इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। पहले 50 से 60 सांस के मरीज पहुंचते थे।
श्वास नली में आ जाती है सूजन
चिकित्सक के अनुसार बढ़ते प्रदूषण के कारण सांस के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। अस्थमा में सांस नली या इससे जुड़े हिस्सों में सूजन आ जाती है। इसके चलते फेफड़ों में हवा जाने में रुकावट पैदा होती है। इससे सांस लेने में परेशानी होने लगती है।
वर्जन
सर्दी की शुरुआत के साथ बढ़ रहे प्रदूषण के स्तर की वजह से सांस के मरीजों की ओपीडी लगातार बढ़ रही है। प्रदूषण से बुजुर्गो में अस्थमा का अटैक आने की आशंका बढ़ जाती है। अटैक आने पर शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को ऑक्सीजन की आपूर्ति बंद हो जाती है। ऐसे में मरीज की जान भी जा सकती है।
डॉ. संदीप शर्मा, फिजिशयन, जिला नागरिक अस्पताल सोनीपत
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प्रदूषण फैलाने वालों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। वहीं पराली जलाने वालों पर कृषि विभाग कार्रवाई कर रहा है। मेरी टीम भी लगातार प्रदूषण फैलाने वालों पर शिकंजा कस रही है। लोगों को बेहतर मास्क लगाने की सलाह भी दी जा रही है।
-भूपेंद्र सिंह, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड।

फोटो 32: अस्पताल में ओपीडी के बाहर लगी मरीजों की लाइन। संवाद- फोटो : Sonipat