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खुशी में छल्के मां के आंसू, बोली-बेटे को खिलाऊंगी देसी घी के लड्डू
अमर उजाला ब्यूरो राई
Updated Mon, 19 Dec 2016 12:34 AM IST
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जीत के बाद सुमित के गांव कुराड़ में जश्न मनातीं उनकी मां।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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50 साल की उम्र हो गई। अब तक गरीबी ही देखी है। बेटे सुमित ने देश के लिए जूनियर हॉकी विश्वकप जीतने में जो योगदान दिया है, उससे न केवल देश, बल्कि हरियाणा, सोनीपत व कुराड़ जिले का नाम रोशन हुआ है। सुमित की कामयाबी और आगे बढ़ने में परिवार ही नहीं पूरे गांव का अहम योगदान है। बेटा जब घर आएगा तो उसे देसी घी के लड्डू खिलाऊंगी। इतना कहते कि सुमित की मां दर्शना देवी की आंखों में खुशी के आंसू छलक आए।
रविवार को फाइनल मैच जीतने के बाद अमर उजाला की टीम सुमित के घर कुराड़ गांव में पहुंची। पेशे से श्रमिक का काम करने वाले सुमित के पिता प्रताप सिंह ने बताया कि मजदूरी करके उसने तीन बेटों जयसिंह, अमित व सुमित को पाल पोस कर बड़ा किया है। सबसे छोटे बेटे सुमित को बचपन से ही हॉकी खेलने का शौक रहा है। चौथी क्लास से ही उसने स्कूल में हाकी खेलना शुरू कर दिया था। बाद में वह साई में चला गया, जहां कोच एनके गौतम व पीयूष ने उसकी प्रतिभा को पहचाना। 2014 से ही वह जूनियर हॉकी टीम में शामिल रहा। चार साल से ही भारतीय टीम विश्व कप की तैयारी कर रही थी। हर खिलाड़ी का विश्व कप जीतना का सपना होता है, जो आज पूरा हो गया।
अब उम्मीद है कि उसके परिवार के भी दिन बदलेंगे। वहीं, जीत से विकास दहिया के गांव गढ़ शहजानपुर में भी जश्न का माहौल रहा। परिजनों ने पूरे गांव में लड्डू बांटे।
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मां नहीं जा सकी लखनऊ मैच देखने
सुमित की मां दर्शना देवी ने बताया कि सुमित ने कहा था कि टीम फाइनल में पहुंचेगी तो वह उसे मैच देखने लखनऊ बुलाएगा। रेल की टिकट भी ले ली थी, लेकिन मैच से पहले बुखार आ गया। इसके चलते वह जा नहीं सकीं। अब बेटा घर आएगा तो उसे सीने से लगा लूंगी। टीवी पर लगातार मैच देखा।
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रविवार को फाइनल मैच जीतने के बाद अमर उजाला की टीम सुमित के घर कुराड़ गांव में पहुंची। पेशे से श्रमिक का काम करने वाले सुमित के पिता प्रताप सिंह ने बताया कि मजदूरी करके उसने तीन बेटों जयसिंह, अमित व सुमित को पाल पोस कर बड़ा किया है। सबसे छोटे बेटे सुमित को बचपन से ही हॉकी खेलने का शौक रहा है। चौथी क्लास से ही उसने स्कूल में हाकी खेलना शुरू कर दिया था। बाद में वह साई में चला गया, जहां कोच एनके गौतम व पीयूष ने उसकी प्रतिभा को पहचाना। 2014 से ही वह जूनियर हॉकी टीम में शामिल रहा। चार साल से ही भारतीय टीम विश्व कप की तैयारी कर रही थी। हर खिलाड़ी का विश्व कप जीतना का सपना होता है, जो आज पूरा हो गया।
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अब उम्मीद है कि उसके परिवार के भी दिन बदलेंगे। वहीं, जीत से विकास दहिया के गांव गढ़ शहजानपुर में भी जश्न का माहौल रहा। परिजनों ने पूरे गांव में लड्डू बांटे।
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मां नहीं जा सकी लखनऊ मैच देखने
सुमित की मां दर्शना देवी ने बताया कि सुमित ने कहा था कि टीम फाइनल में पहुंचेगी तो वह उसे मैच देखने लखनऊ बुलाएगा। रेल की टिकट भी ले ली थी, लेकिन मैच से पहले बुखार आ गया। इसके चलते वह जा नहीं सकीं। अब बेटा घर आएगा तो उसे सीने से लगा लूंगी। टीवी पर लगातार मैच देखा।