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नियम 134ए : दाखिले की राह में निजी स्कूल अटका रहे रोड़ा
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बीईओ कार्यालय पर शिकायत देते अभिभावक। संवाद
- फोटो : Sonipat
नियम 134ए के तहत स्कूल अलॉट होने के बावजूद विद्यार्थियों के दाखिले की राह मुश्किल बनी हुई है। कहीं निजी स्कूल एसएलसी (स्कूल छोड़ने का प्रमाण पत्र) नहीं दे रहे, तो कहीं निजी स्कूल नियम दाखिला लेने मेें ही आनाकानी कर रहे हैं। ऐसे में अभिभावकों की परेशानियां बढ़ती जा रही हैं, क्योंकि विद्यार्थियों को 24 दिसंबर तक दस्तावेजों की जांच करवाने के साथ दाखिला लेना जरूरी है। ऐसा न होने पर विद्यार्थी का दाखिला रद्द कर दिया जाएगा। अभिभावकों ने शिक्षा अधिकारियों से इस मामले में एसएलसी दिलवाने व दाखिला सुनिश्चित करवाने की मांग की है।
नियम 134ए के तहत 3302 में से 3098 विद्यार्थियों ने 55 प्रतिशत से अधिक अंक लेकर मूल्यांकन परीक्षा उत्तीर्ण की थी। शिक्षा विभाग ने परिणाम जारी करने के साथ ही स्कूल अलॉटमेेंट लिस्ट भी जारी कर दी थी। पहले ड्रॉ में 2544 उत्तीर्ण विद्यार्थियों को स्कूल अलॉट किए गए थे। जिन्हें 24 दिसंबर तक अपने मूल प्रमाण पत्रों के साथ अलॉट स्कूल मेें उपस्थिति दर्ज करवाने के निर्देश दिए गए थे। अब अभिभावक अपने बच्चों के एसएलसी के लिए चक्कर काट रहे हैं, लेकिन निजी स्कूल संचालक पूरी फीस जमा करने के बाद ही एसएलसी जारी करने की बात कह रहे हैं। वहीं कुछ स्कूल दस्तावेज पूरे होने के बावजूद दाखिला देने में आनाकानी कर रहे हैं। ऐसे में अभिभावकों की मुश्किलें बढ़ी हुई हैं। अभिभावकों ने जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में शिकायत देते हुए समाधान की मांग की है।
एनरोलमेंट हो चुके पूरे, अब कैसे दें दाखिला
सीबीएसई स्कूलों ने 9वीं कक्षा में पढ़ने वाले सभी विद्यार्थियों के एनरोलमेंट करवाने के साथ ही फीस भी जमा करवा दी है। ऐसे में नए विद्यार्थियों का एनरोलमेंट कैसे होगा। इसको लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। वहीं विद्यार्थी परेशान हैं कि उन्होंने पुराने स्कूल से एसएलसी ले लिया और नए अलॉट हुए स्कूल में एनरोलमेंट पूरे हो चुके हैं।
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बोले अभिभावक
मेरी बेटी दीया दूसरी कक्षा में पढ़ती है। कोरोना काल के बाद से आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है। घर का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है, ऐसे में फीस देने में असमर्थ हूं। स्कूल वालों को स्थिति बताते हुए एसएलसी मांगा, लेकिन वे नहीं दे रहे। इससे मेरी बेटी स्कूल नहीं जा पा रही। अधिकारियों से मांग है कि एसएलसी दिलवाएं।
- सुषमा, अभिभावक
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मेरा बेटा दिव्यांश तीसरी कक्षा में पढ़ता है। आय का साधन न होने के कारण मैं फीस भरने में असमर्थ हूं। 134ए के तहत बेटे ने परीक्षा दी और पास हो गया। उसे स्कूल भी अलॉट हो गया है। अब पुराने स्कूल वाले एसएलसी देने से मना कर रहे हैं। बिना एसएलसी बच्चे की पढ़ाई रुक जाएगी। डीईओ का पत्र लिख एसएलसी दिलवाने की मांग की है।
- सीमा, अभिभावक
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मेरी बेटी कुंजन दूसरी कक्षा में पढ़ती है। पहले हम हर महीने फीस देते थे। मेरे पति बीमार हो गए। लंबी बीमारी के कारण आय का साधन खत्म हो गया। घर का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है। ऐसे में फीस दे पाना मुमकिन नहीं है। बेटी की पढ़ाई न छूटे, इसलिए 134ए का फॉर्म भरा था। अब बिना एसएलसी दूसरे स्कूल में दाखिला कैसे हो। अधिकारियों से मांग है कि पुराने स्कूल से एसएलसी दिलवाया जाए।
- गीता, अभिभावक
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मेरा बेटा ध्रुव चौथी कक्षा में पढ़ता है। कोरोना काल में घर बैठा रहा, ऑनलाइन पढ़ाई भी नहीं हुई। फिर भी स्कूल के कहने पर डेवलपमेंट चार्ज सहित पूरी फीस जमा करवा दी थी। काम न होने के कारण आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है। फिर भी स्कूल वालों को कहा था कि मैं ट्यूशन फीस देने को तैयार हूं, जब बच्चा स्कूल गया ही नहीं तो डेवलपमेंट चार्ज क्यों दूं। फिर भी स्कूल ने एसएलसी रोक लिया। सरकार भी डेवलपमेंट चार्ज न लेने की बात कह चुकी है। अधिकारियों से आग्रह है कि बच्चे का एसएलसी दिलवाया जाए।
- विकास चुघ, अभिभावक
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कोरोना काल में आर्थिक संकट के चलते प्रदेश में हजारों अभिभावक अपने बच्चों की फीस नहीं भर सके। काफी बच्चे घर बैठे हैं। बिना एसएलसी के 134ए के तहत भी दाखिले नहीं हो रहे। बिना बकाया फीस लिए निजी स्कूल एसएलसी नहीं दे रहे। हमारी मांग है कि सरकार बिना एसएलसी सरकारी स्कूलों और 134ए में दाखिला दिलवाए या निजी स्कूलों से ऐसे बच्चों के एसएलसी दिलवाए जाएं। निजी स्कूलों से भी आग्रह है कि बच्चों के भविष्य को देखते हुए एसएलसी जारी करें।
- विमल किशोर, संयोजक, छात्र-अभिभावक संघ
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वर्जन
नियम 134ए के तहत सभी निजी स्कूलों को नियमानुसार दाखिले देने होंगे। अगर कोई स्कूल किसी विद्यार्थी को दाखिला देने से इनकार करता है और अभिभावक शिकायत देता है तो संबंधित स्कूल के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। विद्यार्थी को दाखिला देना जरूरी है। इस बारे में निर्देश जारी कर दिए हैं। नियमों की अवहेलना करने वाले स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- नवीन गुलिया, उप जिला शिक्षा अधिकारी, सोनीपत
जब तक सरकार लंबित फीस की प्रतिपूर्ति नहीं करती, तब तक नहीं देंगे दाखिला
सेक्टर-15 स्थित डीएवीएम पब्लिक स्कूल में मंगलवार को हरियाणा संयुक्त विद्यालय संघ सोनीपत की आमसभा हुई। अध्यक्षता अजमेर सिंह ने की। सभा में जिले के सभी निजी स्कूल संचालक मौजूद रहे। इसमें सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि जब तक सरकार नियम 134ए के तहत विद्यार्थियों की लंबित फीस की प्रतिपूर्ति नहीं करती, तब तक विद्यार्थियों को प्रवेश नहीं दिया जाएगा।
अजमेर सिंह ने कहा कि शिक्षा विभाग द्वारा गत वर्षों की भांति इस वर्ष भी 134ए में प्रवेश के लिए जो अधिसूचना जारी की गई है, वह तर्कसंगत नहीं है। 134ए के तहत दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों की फीस की प्रतिपूर्ति पिछले कई वर्षों से लंबित है। 9वीं से 12वीं के विद्यार्थियों की किसी भी स्कूल को कोई फीस प्रतिपूर्ति नहीं की है। हम मांग करते हैं कि प्रदेश में शिक्षा के अधिकार को लागू कर 10 प्रतिशत की बजाय 25 प्रतिशत गरीब परिवारों से संबंधित बच्चों को शिक्षा दिलाएं, लेकिन फीस की प्रतिपूर्ति शिक्षा के अधिकार नियम के अनुसार होनी चाहिए।
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नियम 134ए के तहत 3302 में से 3098 विद्यार्थियों ने 55 प्रतिशत से अधिक अंक लेकर मूल्यांकन परीक्षा उत्तीर्ण की थी। शिक्षा विभाग ने परिणाम जारी करने के साथ ही स्कूल अलॉटमेेंट लिस्ट भी जारी कर दी थी। पहले ड्रॉ में 2544 उत्तीर्ण विद्यार्थियों को स्कूल अलॉट किए गए थे। जिन्हें 24 दिसंबर तक अपने मूल प्रमाण पत्रों के साथ अलॉट स्कूल मेें उपस्थिति दर्ज करवाने के निर्देश दिए गए थे। अब अभिभावक अपने बच्चों के एसएलसी के लिए चक्कर काट रहे हैं, लेकिन निजी स्कूल संचालक पूरी फीस जमा करने के बाद ही एसएलसी जारी करने की बात कह रहे हैं। वहीं कुछ स्कूल दस्तावेज पूरे होने के बावजूद दाखिला देने में आनाकानी कर रहे हैं। ऐसे में अभिभावकों की मुश्किलें बढ़ी हुई हैं। अभिभावकों ने जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में शिकायत देते हुए समाधान की मांग की है।
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एनरोलमेंट हो चुके पूरे, अब कैसे दें दाखिला
सीबीएसई स्कूलों ने 9वीं कक्षा में पढ़ने वाले सभी विद्यार्थियों के एनरोलमेंट करवाने के साथ ही फीस भी जमा करवा दी है। ऐसे में नए विद्यार्थियों का एनरोलमेंट कैसे होगा। इसको लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। वहीं विद्यार्थी परेशान हैं कि उन्होंने पुराने स्कूल से एसएलसी ले लिया और नए अलॉट हुए स्कूल में एनरोलमेंट पूरे हो चुके हैं।
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बोले अभिभावक
मेरी बेटी दीया दूसरी कक्षा में पढ़ती है। कोरोना काल के बाद से आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है। घर का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है, ऐसे में फीस देने में असमर्थ हूं। स्कूल वालों को स्थिति बताते हुए एसएलसी मांगा, लेकिन वे नहीं दे रहे। इससे मेरी बेटी स्कूल नहीं जा पा रही। अधिकारियों से मांग है कि एसएलसी दिलवाएं।
- सुषमा, अभिभावक
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मेरा बेटा दिव्यांश तीसरी कक्षा में पढ़ता है। आय का साधन न होने के कारण मैं फीस भरने में असमर्थ हूं। 134ए के तहत बेटे ने परीक्षा दी और पास हो गया। उसे स्कूल भी अलॉट हो गया है। अब पुराने स्कूल वाले एसएलसी देने से मना कर रहे हैं। बिना एसएलसी बच्चे की पढ़ाई रुक जाएगी। डीईओ का पत्र लिख एसएलसी दिलवाने की मांग की है।
- सीमा, अभिभावक
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मेरी बेटी कुंजन दूसरी कक्षा में पढ़ती है। पहले हम हर महीने फीस देते थे। मेरे पति बीमार हो गए। लंबी बीमारी के कारण आय का साधन खत्म हो गया। घर का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है। ऐसे में फीस दे पाना मुमकिन नहीं है। बेटी की पढ़ाई न छूटे, इसलिए 134ए का फॉर्म भरा था। अब बिना एसएलसी दूसरे स्कूल में दाखिला कैसे हो। अधिकारियों से मांग है कि पुराने स्कूल से एसएलसी दिलवाया जाए।
- गीता, अभिभावक
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मेरा बेटा ध्रुव चौथी कक्षा में पढ़ता है। कोरोना काल में घर बैठा रहा, ऑनलाइन पढ़ाई भी नहीं हुई। फिर भी स्कूल के कहने पर डेवलपमेंट चार्ज सहित पूरी फीस जमा करवा दी थी। काम न होने के कारण आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है। फिर भी स्कूल वालों को कहा था कि मैं ट्यूशन फीस देने को तैयार हूं, जब बच्चा स्कूल गया ही नहीं तो डेवलपमेंट चार्ज क्यों दूं। फिर भी स्कूल ने एसएलसी रोक लिया। सरकार भी डेवलपमेंट चार्ज न लेने की बात कह चुकी है। अधिकारियों से आग्रह है कि बच्चे का एसएलसी दिलवाया जाए।
- विकास चुघ, अभिभावक
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कोरोना काल में आर्थिक संकट के चलते प्रदेश में हजारों अभिभावक अपने बच्चों की फीस नहीं भर सके। काफी बच्चे घर बैठे हैं। बिना एसएलसी के 134ए के तहत भी दाखिले नहीं हो रहे। बिना बकाया फीस लिए निजी स्कूल एसएलसी नहीं दे रहे। हमारी मांग है कि सरकार बिना एसएलसी सरकारी स्कूलों और 134ए में दाखिला दिलवाए या निजी स्कूलों से ऐसे बच्चों के एसएलसी दिलवाए जाएं। निजी स्कूलों से भी आग्रह है कि बच्चों के भविष्य को देखते हुए एसएलसी जारी करें।
- विमल किशोर, संयोजक, छात्र-अभिभावक संघ
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वर्जन
नियम 134ए के तहत सभी निजी स्कूलों को नियमानुसार दाखिले देने होंगे। अगर कोई स्कूल किसी विद्यार्थी को दाखिला देने से इनकार करता है और अभिभावक शिकायत देता है तो संबंधित स्कूल के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। विद्यार्थी को दाखिला देना जरूरी है। इस बारे में निर्देश जारी कर दिए हैं। नियमों की अवहेलना करने वाले स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- नवीन गुलिया, उप जिला शिक्षा अधिकारी, सोनीपत
जब तक सरकार लंबित फीस की प्रतिपूर्ति नहीं करती, तब तक नहीं देंगे दाखिला
सेक्टर-15 स्थित डीएवीएम पब्लिक स्कूल में मंगलवार को हरियाणा संयुक्त विद्यालय संघ सोनीपत की आमसभा हुई। अध्यक्षता अजमेर सिंह ने की। सभा में जिले के सभी निजी स्कूल संचालक मौजूद रहे। इसमें सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि जब तक सरकार नियम 134ए के तहत विद्यार्थियों की लंबित फीस की प्रतिपूर्ति नहीं करती, तब तक विद्यार्थियों को प्रवेश नहीं दिया जाएगा।
अजमेर सिंह ने कहा कि शिक्षा विभाग द्वारा गत वर्षों की भांति इस वर्ष भी 134ए में प्रवेश के लिए जो अधिसूचना जारी की गई है, वह तर्कसंगत नहीं है। 134ए के तहत दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों की फीस की प्रतिपूर्ति पिछले कई वर्षों से लंबित है। 9वीं से 12वीं के विद्यार्थियों की किसी भी स्कूल को कोई फीस प्रतिपूर्ति नहीं की है। हम मांग करते हैं कि प्रदेश में शिक्षा के अधिकार को लागू कर 10 प्रतिशत की बजाय 25 प्रतिशत गरीब परिवारों से संबंधित बच्चों को शिक्षा दिलाएं, लेकिन फीस की प्रतिपूर्ति शिक्षा के अधिकार नियम के अनुसार होनी चाहिए।