हरियाणा विस चुनावः कांग्रेस, इनेलो, जजपा से जाट प्रत्याशियों के बीच भाजपा ने खेला ब्राह्मण कार्ड
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राई विधानसभा सीट पर वर्ष 2005 से लगातार कांग्रेस ने कब्जा जमाया हुआ है। जहां से वर्ष 2005 में कांग्रेस के टिकट पर वर्तमान में भाजपा सांसद रमेश कौशिक ने चुनाव लड़ते हुए इनेलो के अजीत आंतिल को हराया था। जिसके बाद वर्ष 2009 में कांग्रेस ने पूर्व सांसद व मंत्री रिजक राम के बेटे जयतीर्थ दहिया को मैदान में उतारा, जिन्होंने इनेलो के इंद्रजीत दहिया को हराकर जीत दर्ज की। वर्ष 2014 के चुनाव में दोबारा से कांग्रेस ने जयतीर्थ दहिया को प्रत्याशी बनाया तो इनेलो ने भी इंद्रजीत दहिया को मैदान में उतार दिया। इस चुनाव में दोनों के बीच कांटे की टक्कर रही और जयतीर्थ दहिया को तीन वोट से विजेता घोषित किया गया। लेकिन यह मामला हाईकोर्ट में पहुंचा तो पिछले महीने वहां से जयतीर्थ दहिया का चुनाव निरस्त कर दिया गया।
अब एक बार फिर तैयार हुए चुनावी मैदान में कांग्रेस ने तीसरी बार जयतीर्थ दहिया पर भरोसा जताया है तो इनेलो ने भी तीसरी बार इंद्रजीत दहिया को चुनाव मैदान में उतारा है। जजपा ने पहले इनेलो से चुनाव लड़ चुके अजीत आंतिल को प्रत्याशी बनाया है। इस तरह तीन प्रमुख पार्टियों ने जाट प्रत्याशियों पर दांव खेला तो भाजपा ने गैर जाट यानी ब्राह्मण नेता मोहनलाल बड़ौली को मैदान में उतार दिया। बड़ौली पहलवान हैं। जहां तीन पार्टियों के प्रत्याशी पहले भी चुनाव लड़ चुके हैं, वहीं केवल मोहनलाल बड़ौली ऐसे प्रत्याशी हैं जो पहली बार चुनावी जंग में उतरकर किस्मत आजमा रहे हैं। अब यह देखना होगा कि पहली बार मैदान में उतरे मोहनलाल बड़ौली राई सीट को कांग्रेस से छीनकर कमल खिला पाते हैं या इस सीट पर तीसरी बार जयतीर्थ दहिया कुर्सी पर काबिज होते हैं।
क्षेत्र की सबसे बड़ी समस्याएं
राई विधानसभा क्षेत्र अधिकतर गांव यमुना के पास हैं, लेकिन उसके बावजूद पेयजल की स्थिति काफी खराब है और भूजल स्तर भी नीचे गिरता जा रहा है। पानी की समस्या का समाधान अभी तक कोई नहीं करा पाया है। सरकार ने दिल्ली से पानीपत से नेशनल हाईवे को चौड़ा करने के लिए चार साल पहले काम शुरू कराया था, लेकिन वह अभी तक आधा भी नहीं हो सका है। जिससे नेशनल हाईवे के किनारे के एक दर्जन गांव के लोगों को समस्या से जूझना पड़ रहा है। इसके अलावा भी काफी समस्याएं क्षेत्र में बनी हुई है।