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Sonipat News: पूनम ने केंचुआ खाद से बदली खेती की दिशा, 20 महिलाओं को बनाया आत्मनिर्भर

Sun, 02 Nov 2025 01:53 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत Updated Sun, 02 Nov 2025 01:53 AM IST
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Poonam changed the direction of farming with earthworm manure, made 20 women self-reliant.
सोनीपत। गांव नकलोई की पूनम परंपरागत खेती को छोड़कर पर्यावरण संरक्षण और महिला सशक्तीकरण के लिए बेहतर पहल शुरू की है। पूनम प्राकृतिक खेती करने के साथ केंचुआ खाद (वर्मी कंपोस्ट) उत्पादन का मॉडल खड़ा किया है। साथ ही मिट्टी की उर्वरता को पुनर्जीवित कर 20 महिलाओं को आत्मनिर्भरता का रास्ता दिखाया है।
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पूनम ने अपने गांव नकलोई में तीन एकड़ भूमि पर प्राकृतिक खेती शुरू की है। उनकी दो एकड़ भूमि में अमरूद और सरसों की फसल लहलहा रही है जबकि एक एकड़ भूमि पर उन्होंने केंचुआ खाद तैयार करने का प्लांट स्थापित किया है। यह संयंत्र हर महीने 150 से 200 टन वर्मी कंपोस्ट तैयार करता है जिसकी मांग अब हरियाणा ही नहीं बल्कि पड़ोसी राज्यों से भी आने लगी है। पूनम का यह प्रयास खेती को मुनाफे के साथ पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में प्रेरक पहल बन गया है।
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महिलाओं को मिला सशक्तीकरण का मंच

पूनम के संयंत्र में काम करने वाली 15 से 20 महिलाएं अब आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हो चुकी हैं। गांव की महिलाएं जो पहले घरेलू कार्यों तक सीमित थीं अब पूनम की अगुवाई में जैविक खाद तैयार करने और विपणन का कार्य संभाल रही हैं। पूनम कहती हैं कि मेरा उद्देश्य सिर्फ खेती करना नहीं बल्कि मिट्टी को जहरमुक्त बनाकर किसानों और महिलाओं को सशक्त बनाना है।
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राज्यपाल ने भी की सराहना

पूनम को उनकी उपलब्धियों के लिए प्रदेशस्तरीय प्रगतिशील किसान सम्मान से नवाजा जा चुका है। गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने भी उनकी पहल की प्रशंसा की थी और कहा था कि ऐसे प्रयास ही देश में टिकाऊ कृषि और महिला सशक्तीकरण की असली मिसाल है।


प्राकृतिक खेती की बढ़ रही लोकप्रियता

रासायनिक खादों के दुष्प्रभावों से जूझ रहे किसान अब पूनम के मॉडल को अपनाने लगे हैं। उनके संयंत्र से तैयार खाद से फसलों की गुणवत्ता में सुधार और उत्पादन में बढ़ोतरी देखने को मिली है। कृषि विभाग भी अब पूनम जैसे प्रगतिशील किसानों को प्रेरणा स्रोत के रूप में प्रस्तुत कर रहा है।
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