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Sonipat News: 900 करोड़ के हाईवे एनएच-44 पर सुरक्षा व्यवस्था ध्वस्त, खुले नाले और गड्ढे बने हादसों का खतरा

Fri, 12 Jun 2026 01:34 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Fri, 12 Jun 2026 01:34 AM IST
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Open safety loopholes pose a threat to drivers and pedestrians
फोटो :: सोनीपत में नेशनल हाईवे-44 पर बहालगढ़ के पास खोदा गया गड्ढा। संवाद
सोनीपत। सबसे व्यस्त राष्ट्रीय राजमार्गों में शामिल एनएच-44 पर करोड़ों रुपये खर्च कर विकसित की गई आधुनिक सड़क व्यवस्था अब सुरक्षा के मोर्चे पर सवालों के घेरे में है। करीब 900 करोड़ रुपये की लागत से तैयार कुंडली-पानीपत खंड के लोकार्पण को तीन वर्ष भी पूरे नहीं हुए हैं। कई स्थानों पर खुली सुरक्षा खामियां वाहन चालकों और राहगीरों के लिए खतरा बनी हुई हैं। खुले नाले, क्षतिग्रस्त ग्रिल, गायब स्लैब, टूटे स्प्रिंग पोस्ट और संपर्क मार्गों पर बने गहरे गड्ढे किसी भी समय बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं।
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दिल्ली से पानीपत के बीच लगभग 24 किलोमीटर लंबे इस हाईवे का चौड़ीकरण आधुनिक मानकों के अनुरूप किया गया था। 20 जून 2023 को इसका लोकार्पण हुआ था। यह मार्ग दिल्ली-एनसीआर को हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, चंडीगढ़ और जम्मू-कश्मीर से जोड़ने वाली महत्वपूर्ण कड़ी है। प्रतिदिन हजारों वाहन इस मार्ग से गुजरते हैं, लेकिन कई स्थानों पर सुरक्षा प्रबंधन की अनदेखी साफ दिखाई दे रही है।
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हाईवे के संपर्क मार्गों पर कई जगह नालों के स्लैब गायब हैं, जबकि कुछ स्थानों पर नालों के किनारे गहरे गड्ढे बने हुए हैं। यातायात को व्यवस्थित रखने और वाहनों की सुरक्षित आवाजाही के लिए लगाए गए स्प्रिंग पोस्ट भी कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त पड़े हैं।
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अंधेरे में और बढ़ जाता है खतरा
रात के समय स्थिति और अधिक गंभीर हो जाती है। जहां खुले नाले, गड्ढे और क्षतिग्रस्त सुरक्षा ढांचा मौजूद है, वहां पर्याप्त पथ प्रकाश व्यवस्था नहीं है। कम रोशनी के कारण वाहन चालकों को सड़क पर मौजूद खतरे समय रहते दिखाई नहीं देते, जिससे दुर्घटना का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है। बहालगढ़ के पास निकासी दुरुस्त करने को खोदा गया गड्ढा भी कभी भी हादसे का कारण बन सकता है।
बारिश के मौसम से पहले बढ़ी चिंता
मानसून की दस्तक से पहले स्थानीय लोगों की चिंता और बढ़ गई है। उनका कहना है कि बरसात के दौरान यदि नालों और गड्ढों में पानी भर गया तो राहगीरों और दोपहिया वाहन चालकों के लिए स्थिति और खतरनाक हो जाएगी। खुले नालों में गिरने और फिसलने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
स्थानीय लोगों ने उठाई सुधार की मांग
राई निवासी राजेश, सुनील, अमित और संजय ने प्रशासन से मांग की है कि खुले नालों को तुरंत ढका जाए। गहरे गड्ढों की मरम्मत कराई जाए और संपर्क मार्गों पर पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उनका कहना है कि प्रतिदिन हजारों वाहन इस मार्ग का उपयोग करते हैं। समय रहते सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए तो कोई बड़ी दुर्घटना हो सकती है।
एनएच-44 और उसके संपर्क मार्गों पर वाहन चालकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। जहां नालों के स्लैब गायब हैं, वहां उन्हें लगाया जा रहा है। यदि कहीं गड्ढे या क्षतिग्रस्त बैरिकेड हैं तो उन्हें भी शीघ्र दुरुस्त कराया जाएगा, ताकि यात्रियों को सुरक्षित और सुगम यात्रा का अनुभव मिल सके।-जगभूषण शर्मा, परियोजना निदेशक, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण

फोटो :: सोनीपत में नेशनल हाईवे-44 पर बहालगढ़ के पास खोदा गया गड्ढा। संवाद

फोटो :: सोनीपत में नेशनल हाईवे-44 पर बहालगढ़ के पास खोदा गया गड्ढा। संवाद

फोटो :: सोनीपत में नेशनल हाईवे-44 पर बहालगढ़ के पास खोदा गया गड्ढा। संवाद

फोटो :: सोनीपत में नेशनल हाईवे-44 पर बहालगढ़ के पास खोदा गया गड्ढा। संवाद

फोटो :: सोनीपत में नेशनल हाईवे-44 पर बहालगढ़ के पास खोदा गया गड्ढा। संवाद

फोटो :: सोनीपत में नेशनल हाईवे-44 पर बहालगढ़ के पास खोदा गया गड्ढा। संवाद

फोटो :: सोनीपत में नेशनल हाईवे-44 पर बहालगढ़ के पास खोदा गया गड्ढा। संवाद

फोटो :: सोनीपत में नेशनल हाईवे-44 पर बहालगढ़ के पास खोदा गया गड्ढा। संवाद

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