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शराब ठेकों का टेंडर : 21.01 करोड़ में बिका प्याऊ मनियारी जोन
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शराब ठेकों का टेंडर : 21.01 करोड़ में बिका प्याऊ मनियारी जोन, 40 में से 33 जोन की हुई बिक्री
दिल्ली बॉर्डर से साथ लगता कुंडली जोन 16 करोड़ रुपये में बिका
ई-टेंडरिंग के जरिए बेचे गए 33 जोन, 12 जून से खोले जाएंगे नए शराब ठेके
फोटो 21: शराब ठेकों की ई-नीलामी के दौरान कागजी कार्रवाई करते अधिकारी। संवाद
फोटो 22: शराब ठेकों की ई-नीलामी के दौरान उपस्थित ठेकेदार।
संवाद न्यूज एजेंसी
सोनीपत। आबकारी विभाग को 289.12 करोड़ रुपये राजस्व चुकाकर शराब ठेकेदार 33 जोन में मदिरपान करा सकेंगे। आबकारी एवं कराधान विभाग की ओर से शुक्रवार को ई-टेंडरिंग के माध्यम से 33 जोन बेचे गए। इनमें नेशनल हाईवे (एनएच-44) के साथ लगता प्याऊ मनियारी जोन इस बार सबसे महंगा बिका। विभाग की ओर से इस जोन का रिजर्व प्राइस 17.68 करोड़ रुपये निर्धारित किया था। यह जोन 21.01 करोड़ रुपये में बिका।
आबकारी एवं कराधान विभाग ने इस बार जिले में 40 जोन निर्धारित कर रखे हैं। इनमें से 33 जोन ई टेंडर के जरिए बिक गए। विभाग ने 33 जोन के लिए 235 करोड़ रुपये रिजर्व प्राइस तय कर रखा था। इन जोन से 289.12 करोड़ रुपये का राजस्व मिला है। इसके बाद दिल्ली बॉर्डर के साथ लगते कुंडली जोन का रिजर्व प्राइस 10 करोड़ रुपये रखा गया था। यह जोन 16 करोड़ का बिका। कुंडली जोन के साथ लगते दिल्ली की सीमा में काफी संख्या में शराब ठेके हैं। वहां पर एक शराब की बोतल के साथ एक शराब की बोतल मुफ्त बिक रही है। ऐसे में कुंडली जोन के शराब ठेकेदार को काफी नुकसान हुआ था और आबकारी विभाग के राजस्व भी कम हुआ। पहले कुंडली जोन सबसे महंगा बिका करता था। इस बार दिल्ली सरकार ने आबकारी नीति में संशोधन किया। उस नीति के साथ दिल्ली के शराब ठेकों पर एक शराब की बोतल के साथ एक शराब की बोतल मुफ्त दी जा रही है। इसका विपरीत प्रभाव कुंडली जोन के शराब ठेकों पर पड़ा है। दूसरी ओर गन्नौर जीटी रोड जोन का रिजर्व प्राइस 5.31 करोड़ रुपये निर्धारित कर रखा था। यह जोन 38 प्रतिशत ज्यादा बोली लगने पर 7.32 करोड़ रुपये में बिका।
इंसेट
राजस्व 350 करोड़ से पार होने की उम्मीद
ठेके लेने के लिए प्रक्रिया को ऑनलाइन किया गया था। 19 मई सुबह 9 बजे से 20 मई शाम 4 बजे तक ठेका लेने के लिए ऑनलाइन आवेदन मांगे गए थे। मगर 40 में से 33 जोन के बिकने के बाद विभाग को 289.12 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है। विभाग को उम्मीद है सात जोन और बिकने के बाद राजस्व प्राप्त होने का आंकड़ा 350 करोड़ रुपये से पार हो जाएगा। वहीं सही खरीदार नहीं मिलने के कारण बाकी सात जोन की बोली नहीं हो सकी। इस जोन की बोली आगे खिसका दी गई है।
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वर्जन
40 में से 33 जोन की नीलामी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। सात जोन को सही खरीदार नहीं मिलने के कारण इसकी नीलामी नहीं हो सकी। विभाग को 289.12 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है। -नरेश कुमार फुले, जिला आबकारी एवं कराधान आयुक्त
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दिल्ली बॉर्डर से साथ लगता कुंडली जोन 16 करोड़ रुपये में बिका
ई-टेंडरिंग के जरिए बेचे गए 33 जोन, 12 जून से खोले जाएंगे नए शराब ठेके
फोटो 21: शराब ठेकों की ई-नीलामी के दौरान कागजी कार्रवाई करते अधिकारी। संवाद
फोटो 22: शराब ठेकों की ई-नीलामी के दौरान उपस्थित ठेकेदार।
संवाद न्यूज एजेंसी
सोनीपत। आबकारी विभाग को 289.12 करोड़ रुपये राजस्व चुकाकर शराब ठेकेदार 33 जोन में मदिरपान करा सकेंगे। आबकारी एवं कराधान विभाग की ओर से शुक्रवार को ई-टेंडरिंग के माध्यम से 33 जोन बेचे गए। इनमें नेशनल हाईवे (एनएच-44) के साथ लगता प्याऊ मनियारी जोन इस बार सबसे महंगा बिका। विभाग की ओर से इस जोन का रिजर्व प्राइस 17.68 करोड़ रुपये निर्धारित किया था। यह जोन 21.01 करोड़ रुपये में बिका।
आबकारी एवं कराधान विभाग ने इस बार जिले में 40 जोन निर्धारित कर रखे हैं। इनमें से 33 जोन ई टेंडर के जरिए बिक गए। विभाग ने 33 जोन के लिए 235 करोड़ रुपये रिजर्व प्राइस तय कर रखा था। इन जोन से 289.12 करोड़ रुपये का राजस्व मिला है। इसके बाद दिल्ली बॉर्डर के साथ लगते कुंडली जोन का रिजर्व प्राइस 10 करोड़ रुपये रखा गया था। यह जोन 16 करोड़ का बिका। कुंडली जोन के साथ लगते दिल्ली की सीमा में काफी संख्या में शराब ठेके हैं। वहां पर एक शराब की बोतल के साथ एक शराब की बोतल मुफ्त बिक रही है। ऐसे में कुंडली जोन के शराब ठेकेदार को काफी नुकसान हुआ था और आबकारी विभाग के राजस्व भी कम हुआ। पहले कुंडली जोन सबसे महंगा बिका करता था। इस बार दिल्ली सरकार ने आबकारी नीति में संशोधन किया। उस नीति के साथ दिल्ली के शराब ठेकों पर एक शराब की बोतल के साथ एक शराब की बोतल मुफ्त दी जा रही है। इसका विपरीत प्रभाव कुंडली जोन के शराब ठेकों पर पड़ा है। दूसरी ओर गन्नौर जीटी रोड जोन का रिजर्व प्राइस 5.31 करोड़ रुपये निर्धारित कर रखा था। यह जोन 38 प्रतिशत ज्यादा बोली लगने पर 7.32 करोड़ रुपये में बिका।
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राजस्व 350 करोड़ से पार होने की उम्मीद
ठेके लेने के लिए प्रक्रिया को ऑनलाइन किया गया था। 19 मई सुबह 9 बजे से 20 मई शाम 4 बजे तक ठेका लेने के लिए ऑनलाइन आवेदन मांगे गए थे। मगर 40 में से 33 जोन के बिकने के बाद विभाग को 289.12 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है। विभाग को उम्मीद है सात जोन और बिकने के बाद राजस्व प्राप्त होने का आंकड़ा 350 करोड़ रुपये से पार हो जाएगा। वहीं सही खरीदार नहीं मिलने के कारण बाकी सात जोन की बोली नहीं हो सकी। इस जोन की बोली आगे खिसका दी गई है।
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40 में से 33 जोन की नीलामी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। सात जोन को सही खरीदार नहीं मिलने के कारण इसकी नीलामी नहीं हो सकी। विभाग को 289.12 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है। -नरेश कुमार फुले, जिला आबकारी एवं कराधान आयुक्त