कुंडली बॉर्डर पर गई पानीपत के किसान की जान, अब तक 17 की हो चुकी है मौत
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कृषि कानूनों के खिलाफ कुंडली बॉर्डर पर जारी धरनास्थल में एक और किसान की मौत हो गई। रात को वह खाना खाकर सो गया था लेकिन सुबह मृत मिला। सूचना के बाद पहुंची कुंडली थाना पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम करवाने के बाद परिजनों को सौंप दिया। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
पानीपत के गांव सिवाह का रहने वाला हरेंद्र सिंह (39) कुंडली बॉर्डर पर चल रहे किसान आंदोलन में ढाई माह से सक्रिय था। वह लगातार कुंडली बॉर्डर पर रहकर साथी किसानों की सेवा कर रहा था। हरेंद्र सिंह 12 दिन से धरनास्थल पर ही था। वह सोमवार रात को खाना खाकर अपने टेंट में सो गया था। जब वह मंगलवार सुबह नहीं उठा तो साथी किसानों ने उसे उठाने का प्रयास किया।
उसके बावजूद नहीं उठने पर साथी किसानों ने चिकित्सक को बुलाया। चिकित्सक ने हरेंद्र सिंह को मृत घोषित कर दिया। मामले की सूचना के बाद पहुंची कुंडली थाना पुलिस ने सामान्य अस्पताल में हरेंद्र के शव का पोस्टमार्टम कराया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के कारणों का पता लग सकेगा।
दो बेटों का पिता था हरेंद्र
सामान्य अस्पताल में पहुंचे हरेंद्र के भाई विरेंद्र सिंह ने बताया कि वह चार भाई था, जिसमें हरेंद्र ने किसान आंदोलन में सेवा करते हुए अपनी कुर्बानी दी है। उसके दो बेटे हैं। हरेंद्र खेतीबाड़ी कर परिवार का गुजर -बसर करता था। वह शुरुआत से ही किसान आंदोलन में शामिल था।
कुंडली धरनास्थल पर 17 किसानों की हो चुकी है मौत
कुंडली धरनास्थल पर लगातार किसान अपनी जान गवां रहे है। संत राम सिंह समेत कई किसान आत्महत्या तक कर चुके है और कई किसानों की हृदय गति रुकने से मौत हो गई है। अब तक कुल 17 किसानों की मौत हो चुकी है। सामान्य अस्पताल में हरेंद्र का शव लेने आए साथी किसानों ने कहा कि सरकार को जल्द ही किसानों की मांगों को पूरा करना चाहिए। जिससे अन्य किसान आंदोलन की भेंट न चढ़ें।
कुंडली धरनास्थल पर आंदोलन में शामिल किसान की मौत की सूचना मिली थी। अस्पताल में पहुंचे परिजनों ने बताया कि वह खाना खाकर सो गया था। सुबह मृत मिला। शव का पोस्टमार्टम कराया गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत के कारणों की पुष्टि हो सकेगी। किसान 10-12 दिन से लगातार धरनास्थल पर ही था। - शमशेर सिंह, जांच अधिकारी, कुंडली थाना।