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Sonipat News: गुप्त नवरात्र कल से, घोड़े पर सवार होकर आएंगी मां दुर्गा

Fri, 05 Jul 2024 05:43 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत Updated Fri, 05 Jul 2024 05:43 AM IST
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From Gupta Navratri 6, Maa Durga will come riding on a horse.
आचार्य मनमोहन मिश्रा। स्रोत : स्वयं
नवरात्र का पर्व शक्ति की उपासना का पर्व है। वर्ष में चार बार यह पर्व मनाया जाता है। इनमें एक चैत्र नवरात्र, दूसरा शारदीय नवरात्र और दो गुप्त नवरात्र होते हैं। पंचांग के अनुसार, आषाढ़ माह के गुप्त नवरात्र का शुभारंभ शनिवार 6 जुलाई से शुरू होगा और समापन सोमवार 15 जुलाई को होगा।
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आचार्य मनमोहन मिश्रा ने कहा कि नवरात्र का त्योहार मां दुर्गा को समर्पित है। इस बार आषाढ़ माह के नवरात्र नौ नहीं, 10 दिन मनाए जाएंगे। सृष्टि में मौजूद प्रकृति ही वह शक्ति है जो जीवन के संचालन में अपना योगदान देती है। इसी प्रकृति का सानिध्य पाकर मनुष्य का जीवन नए चरण व स्वरूप को पाता है। नवरात्र में माता दुर्गा के वाहन का विशेष महत्व माना गया है। इस बार मां दुर्गा घोड़े पर सवार होकर आएंगी। माना जाता है कि जब घोड़े पर सवार होकर मां दुर्गा आएंगी तो प्राकृतिक आपदा की आशंका होती है।
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उन्होंने बताया कि आषाढ़ में आने वाले गुप्त नवरात्र सुखों व मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए वरदान होते हैं। तंत्र-मंत्र की साधना में लीन रहने वाले लोगों के लिए भी गुप्त नवरात्र महत्वपूर्ण है। इस शक्ति उपासना में अनेक नियमों का पालन होता है। गुप्त नवरात्र में सिद्धियों की प्राप्ति होती है।
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महाविद्याओं का किया जाता है पूजन

गुप्त नवरात्र में 10 महाविद्याओं के पूजन को प्रमुखता दी जाती है। यह एक चरणबद्ध प्रक्रिया होती है, इसमें शक्ति का हर रंग प्रकट होता है। इस शक्ति पूजन में मां काली, देवी तारा, देवी ललिता, मां भुवनेश्वरी, देवी त्रिपुर भैरवी, देवी छिन्नमस्तिका, मां धूमावती, मां बगलामुखी, देवी मातंगी, देवी कमला, समस्त शक्तियां तंत्र साधना में प्रमुख रूप से पूजनीय हैं। यह शक्ति के 10 स्वरूप हैं, इन्हें तंत्र साधना में सामर्थ्यशील माना गया है।




ऐसे करें पूजा व मंत्र जाप



यह समय तांत्रिक क्रियाओं व शक्ति साधना से संबंधित होता है। साधकों को कठोर नियमों व आचरण का पालन करना होता है साथ ही शुद्धता और सात्विकता का पर ध्यान देना होता है। गुप्त नवरात्र में इस मंत्र का जाप कर सकते हैं।

काली तारा महाविद्या षोडशी भुवनेश्वरी,

भैरवी छिन्नमस्ता च विद्या धूमावती तथा।

बगला सिद्ध विद्या च मातंगी कमलात्मिका,

एता दशमहाविद्याः सिद्धविद्या: प्राकृर्तिता।

देवी के प्रत्येक रूप का इस मंत्र में वर्णन किया गया है। यह मंत्र देवी को प्रसन्न करने का अत्यंत ही सहज व सरल माध्यम भी है।
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